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23 अक्तूबर, 2020|5:00|IST

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भारतीयों की जिंदादिली ने अर्थव्यवस्था को संभाला, 5 कोर सेक्टर्स में सुधार, दो में बदलाव नहीं औैर एक में गिरावट

13.85 लाख करोड़ रुपये का ई-वे बिल अगस्त महीने में जारी हुआ, महज 3.90 लाख करोड़ के ई-वे बिल जारी हुए थे अप्रैल में लॉकडाउन की वजह से

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कोरोना के बढ़ते मामलों के बावजूद भारतीयों की जिंदादिली ने देश की अर्थव्यवस्था को संभालने का काम किया है। ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय अर्थव्यवस्था में गिरावट रुकने और स्थिर होने के संकेत अगस्त महीने में मिले हैं। यानी, भारतीय अर्थव्यवस्था में गिरावट का दौर खत्म हो गया है। यह मैन्युफैक्चरिंग (विर्निमाण) और सेवा क्षेत्र में लगातार हो रहे सुधार के कारण हुआ है।

ये पांच सूचक दे रहे सुधारक के संकेत

1. पेट्रोल और डीजल की मांग में बढ़ोतरी

2. बिजली की मांग 90% तक पहुंची

3. टो संग्रह में लगातार हो रही वृद्धि

4. जीएसटी संग्रह में गिरावट के बाद सुधार

5. ई-वे बिल की संख्या में बढ़ोतरी जारी

रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय अर्थव्यवस्था के आठ कोर सेक्टर्स में पांच में सुधार हुआ है। वहीं, दो में बदलाव नहीं औैर एक में गिरावट दर्ज की गई है। रिपोर्ट के अुनसार लोगों की जिंदादिली (एनिमल स्पिरिट) ने अर्थव्यवस्था को नीचे लुढ़ने से रोका है। कोरोना और लॉकडाउन के कारण तीन महीने तक भारतीय अर्थव्यवस्था एकदम रुक गई थी। इससे अर्थव्यवस्था में बड़ी गिरावट चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में आई थी।

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भारतीय जीडीपी पहली तिमाही में करीब 24 फीसदी नीचे लुढ़क गई थी लेकिन तीन महीने के बाद अगस्त में एक बार फिर से मांग बढ़ी है। यह भारतीय अर्थव्यवस्था को स्थिर करने का काम कर रहा है। हालांकि, अभी भी अर्थव्यवस्था को पूरी तरह से रफ्तार में आने में लंबा वक्त लगेगा क्योंकि कोरोना के बढ़ते मामले से आर्थिक गतिविधियां लगातार बाधित हो रही हैं। इसके चलते कई रेटिंग एजेंसियों और अर्थशास्त्रतियों ने भारतीय अर्थव्यवस्था को लेकर पहले लगाए गए अनुमान में कमी की है।

कारोबार जगत में लगातार सुधार

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रिपोर्ट के अनुसार, भारत के सेवा क्षेत्र में लगातार सुधार हो रहा है। सेवा क्षेत्र का सूचकांक अगस्त में बढ़कर 41.8 हो गया जो जुलाई महीने में 34.2 था। वहीं, अप्रैल में यह गिरकर 5.4 पर पहुंच गया था। यह सूचकांक इस बात के संकेत हैं कि भारतीय अर्थव्यवस्था में लगातार सुधार हो रहा है। हालांकि, 50 50 से नीचे की संख्या यह बताती है कि अभी भी भारतीय अर्थव्यवस्था संकुचन में है। इसी तरह मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर चार महीने लगातार संकुचन के बाद अगस्त में उछला है।

निर्यात पर संकट बरकरार

export  photo - mint

निर्यात के मार्चे पर अभी भी संकट बरकार है क्योंकि दुनिया के अधिकांश देश कोरोना से लड़ाई लड़ रहे हैं। इसके चलते पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले इस साल अगस्त में शिपमेंट में 12.7 फीसदी की गिरावट आई है। हालांकि, दवा और फार्मास्युटिकल्स निर्यात का शिपमेंट क्रमशः 22% और 17% बढ़ा है। वहीं, दूसरी ओर त्योहारों को देखते हुए सोने की मांग बढ़ी थी जिससे व्यापार घटा बढ़ा है।

उपभोक्ताओं की ओर से मांग बढ़ी

liquor store in shopping mall

लॉकडाउन में ढील के बाद से उपभोक्ता गतिविधि में लगातार सुधार हो रहा है। अगस्त महीने में गाड़ियों की बिक्री पिछले साल के मुकाबले 14.10 फीसदी बढ़ी। यह संकेत हैं कि बाजार में मांग फिर से लौट रही है। रिटेल सेल्स में भी लगातार सुधार हो रहा है। खुदरा दुकानदारों की बिक्री बढ़ी है लेकिन अभी भी सालाना अधार पर 70 फीसदी कम है। इस सब के बीच लोन की मांग नहीं बढ़ी है जो एक चिंता का विषय है। सेंट्रल बैंक के डेटा के अनुसार, लोन की मांग अगस्त महीने में 5.5 फीसदी बढ़ी जबकि पिछले साल समान अवधि में यह 12 फीसदी की दर से बढ़ी थी।

औद्योगिक मोर्चे पर भी राहत

food processing industry

जुलाई में औद्योगिक उत्पादन 10.4% गिरा था। वहीं, जून में यह 15.8% गिरा था। कैपिटल गुड्स आउटपुट जो अर्थव्यवस्था में मांग का एक प्रमुख संकेतक 22.8% गिरा था। इंफ्रास्ट्रक्चर में भी गिरावट दर्ज की गई लेकिन सभी सेक्टर्स में सुधार के संकेत मिल रहे हैं। अर्थशास्त्रियों का कहना है कि आने वाले महीने में और सुधार होंगे और अर्थव्यवस्था तेजी से पटरी पर लौटेगी।
 

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  • Web Title:vivacity of Indians handled economy five core sectors improved two did not change and one declined