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15 जुलाई, 2020|1:17|IST

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Howdy Modi: भारत में निवेश बढ़ाएगा अमेरिका, देश को होंगे ये 4 बड़े फायदे

prime minister narendra modi took a sharp swipe at pakistan for its continuing support to terrorism

बढ़ती ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए अमेरिकी तेल और गैस क्षेत्र की कंपनियां भारत में निवेश बढ़ाएंगी।

अमेरिका की यात्रा के पहले दिन शनिवार को ह्यूस्टन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और 17 वैश्विक ऊर्जा कंपनियों के मुख्य कार्यकारी अधिकारियों (सीईओ) के साथ बैठक में इस बात पर सहमति बनी है। सीईओ के साथ हुई बैठक के बाद अमेरिका कंपनी टेल्यूरियन इंक और भारत की पेट्रोनेट एलएनजी के बीच सालाना 50 लाख टन तरलीकृत प्राकृतिक गैस (एलएनजी) का आयात करने के करार की घोषणा हुई। इस करार के तहत पेट्रोनेट और उसकी सहायक इकाइयां अमेरिका से 40 साल की लंबी अवधि तक 50 लाख टन एलएनजी का आयात करेगी। सूत्रों के अनुसार पेट्रोनेट द्वारा टेल्यूरियन की ड्रिफ्टवुड परियोजना में 2.5 अरब डॉलर का निवेश कर 20 प्रतिशत इक्विटी हिस्सेदारी भी हासिल करेगी। इस समझौते को अमेरिका के एलएनजी क्षेत्र में किसी भारतीय कंपनियों की तरफ से सबसे बड़ा सौदा बताया जा रहा है।

ट्वीट से जानकारी: बैठक के बाद मोदी ने ट्वीट किया, यह संभव नहीं है कि ह्यूस्टन आएं और ऊर्जा पर बातचीत ना हो। ऊर्जा क्षेत्र के शीर्ष सीईओ के साथ शानदार बातचीत हुई। हमने ऊर्जा क्षेत्र में अवसर उत्पन्न करने के तरीकों पर चर्चा की। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार ने बताया कि बैठक में वैश्विक ऊर्जा कंपनियों के सीईओ शामिल हुए। इन कंपनियों की उपस्थितिक 150 देशों में है। इनका नेटवर्थ 1,000 अरब डॉलर है।

यह गोलमेज बैठक ऊर्जा सुरक्षा के लिए साथ मिलकर काम करने और भारत-अमेरिका के बीच साझा निवेश के अवसरों को बढ़ाने पर के्द्रिरत थी। इन कंपनियों ने भारत में अपनी मौजूदगी को बढ़ाने के बारे में बात की है।

ह्यूस्टन अमेरिका की तेल और गैस राजधानी के रूप में प्रसिद्ध है। भारत और अमेरिका ने ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने के लिए पिछले साल अमेरिका-इंडिया स्ट्रेटेजिक इनर्जी पार्टनरशिप पर हस्ताक्षर किए थे। अमेरिका ने 2017 में भारत को कच्चा तेल बेचना शुरू किया था। अमेरिका से आपूर्ति वित्त वर्ष 2018-19 में चार गुनी से ज्यादा बढ़कर 64 लाख टन हो चुकी है। अमेरिका से आपूर्ति के पहले सत्र वित्त वर्ष 2017-18 में सिर्फ 14 लाख टन आपूर्ति हुई थी। भारत ने नवंबर 2018 से मई 2019 तक अमेरिका से प्रतिदिन 1,84,000 बैरल तेल प्रतिदिन खरीदा है।

यह संभव नहीं है कि ह्यूस्टन आएं और ऊर्जा पर बातचीत ना हो। ऊर्जा क्षेत्र के शीर्ष सीईओ के साथ शानदार बातचीत हुई। हमने ऊर्जा क्षेत्र में अवसर उत्पन्न करने के तरीकों पर विस्तृत चर्चा की। -नरेंद्र मोदी, प्रधानमंत्री
 
ऊर्जा क्षेत्र के सीईओ के साथ सफल गोलमेज बैठक हुई। भारत और अमेरिका के बीच ऊर्जा सुरक्षा के लिए साथ मिलकर काम करने और निवेश के अवसरों को बढ़ाने पर यह बैठक के्द्रिरत थी। -रवीश कुमार, प्रवक्ता, विदेश मंत्रालय

वैकल्पिक ऊर्जा अग्रणी देश बनने का सपना पूरा होगा
प्रधानमंत्री के साथ सीईओ की बैठक में सिर्फ कच्चे तेल पर ही नहीं बल्कि नवीकरणीय ऊर्जा पर चर्चा हुई है। बढ़ते प्रदूषण को कम करने के लिए अमेरिकी कंपनी नवीकरणीय ऊर्जा को बढ़ाने और इस्तेमाल करने में भी भारतीय कंपनियों को मदद करेंगे।

बाजार में कच्चे तेल की कीमतें नियंत्रित रहेगी
सऊदी अरब की सरकारी तेल कंपनी अरामको के दो बड़े ठिकानों पर ड्रोन से हमले के बाद भारत खाड़ी देशों पर तेल के लिए निर्भर नहीं रहना चाहता है। अमेरिकी कंपनियों के साथ आने से बाजार में कच्चे तेल की कीमत को नियंत्रित करने में भी मदद मिलेगी।

 

नई तकनीक हासिल करने में मदद मिलेगी
कच्चे तेल खनन में अमेरिकी कंपनियों के पास दुनिया भर में सबसे विकसित तकनीक है। तेल कंपनियों के सीईओ के साथ इस बैठक में तकनीक को हस्तांतरण पर भी सहमति बनी है। इसका फायदा भारतीय तेल कंपनियों को भविष्य में मिल सकती है।

 

कच्चे तेल का उत्पादन बढ़ाने का घरेलू लक्ष्य घटेगा
तेल कंपनियों के साथ बैठक में इस बात पर सहमति बनी है कि वे भारत को कच्चे तेल का उत्पादन बढ़ाने में मदद करेंगे। बंगाल की खाड़ी और अरब सागर में कच्चे तेल का बड़ा भंडार है। अमेरिकी कंपनियां इन क्षेत्रों में निवेशबढाएंगी। इससे देश में कच्चे तेल का उत्पादन बढ़ेगा।

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