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पोस्टपेड से प्रीपेड सिम के लिए अब KYC जरूरी नहीं, टेलीकॉम सेक्टर के लिए सरकार ने लिए ये बड़े फैसले

लाइव हिन्दुस्तान,नई दिल्लीPublished By: Deepak Kumar
Wed, 15 Sep 2021 04:45 PM
पोस्टपेड से प्रीपेड सिम के लिए अब KYC जरूरी नहीं, टेलीकॉम सेक्टर के लिए सरकार ने लिए ये बड़े फैसले

लंबे समय से एजीआर बकाया के संकट से जूझ रही टेलीकॉम इंडस्ट्री के लिए सरकार ने एकसाथ कई अहम ऐलान किए हैं। टेलीकॉम ऑपरेटर को एजीआर चुकाने पर राहत दी गई है तो वहीं 100 फीसदी एफडीआई को भी मंजूरी मिली है। इसके अलावा ग्राहकों को केवाईसी पर भी राहत देने का ऐलान किया गया है। आइए सिलसिलेवार समझते हैं कि केंद्र सरकार की कैबिनेट ने टेलीकॉम इंडस्ट्री और ग्राहकों के हित में कौन से बड़े फैसले लिए हैं।

एजीआर पर क्या हुआ: लंबे समय से टेलीकॉम सेक्टर को एडजस्ट ग्रॉस रेवेन्यू यानी एजीआर पर किसी बड़े फैसले का इंतजार था। सरकार ने कहा है कि एजीआर बकाये के परिभाषा में बदलाव किया जाएगा।  टेलीकॉम कंपनियां भी इसकी मांग कर रही थीं। वहीं, टेलीकॉम कंपनियों को मंथली इंटरेस्ट रेट को अब एनुअल कर दिया गया है। इसके अलावा पेनल्टी पर भी राहत दी गई है। 

यही नहीं, टेलीकॉम ऑपरेटर्स बकाये को लेकर मोरेटोरियम ले सकेंगे। ये 4 साल तक के लिए दिया गया है। जो टेलीकॉम ऑपरेटर ये विकल्प चुनते हैं उन्हें सरकार को ब्याज भी देना होगा। आपको बता दें कि एजीआर की वजह से वोडाफोन-आइडिया और एयरटेल पर भारी वित्तीय बोझ है। इस वजह से कंपनियां काफी संघर्ष कर रही थीं। इसके खिलाफा कंपनियों ने कोर्ट का भी दरवाजा खटखटाया था।

क्या होता है एजीआर: एडजस्टेड ग्रॉस रेवेन्यू (एजीआर) एक तरह की यूजेज और लाइसेंसिग फीस है। ये फीस संचार मंत्रालय के दूरसंचार विभाग (DoT) द्वारा लिया जाता है। दूरसंचार विभाग पिछले कई सालों का बकाया मांग रहा है, जिसे देने में टेलीकॉम कंपनियां आनाकानी कर रह थीं। 

 -आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया है कि टेलीकॉम सेक्टर के ऑटोमेटिक रूट में 100 फीसदी एफडीआई की अनुमति दी गई है।
- इसके अलावा टेलीकॉम सेक्टर में अब डिजिटल फॉर्मेट में कस्टमर का वेरिफिकेशन होगा। अभी तक डॉक्युमेंट सब्मिट करना होता था लेकिन सरकार के इस फैसले से ग्राहक अब बिना किसी डॉक्युमेंट की हार्डकॉपी के वेरिफिकेशन करा सकेंगे। आईटी मंत्री ने बताया कि कागजी ग्राहक अधिग्रहण फॉर्म  (CAF) को डेटा के डिजिटल स्टोरेज से बदल दिया जाएगा।

- इसके अलावा ग्राहकों को प्रीपेड से पोस्टपेड में जाने पर दोबारा KYC की जरूरत नहीं होगी। 
- वहीं, टावर के इंस्टॉलेशन के नियम में भी बदलाव हुआ है। सेल्फ डिक्लेरेशन के आधार पर अब ये काम हो सकेगा। 
- स्पेक्ट्रम नीलामी सामान्यतः प्रत्येक वित्तीय वर्ष की अंतिम तिमाही में आयोजित की जाएगी।
- भविष्य की नीलामी में, स्पेक्ट्रम की अवधि 20 से बढ़ाकर 30 वर्ष कर दी गई है, भविष्य में प्राप्त स्पेक्ट्रम के लिए 10 वर्षों के बाद स्पेक्ट्रम के सरेंडर की अनुमति दी जाएगी।

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