कोरोना संकट में 5.6 लाख करोड़ पर पहुंची भारतीयों की कुल बचत, जानें सेविंग का पैसा कहां रख रहे लोग
मुख्य बातें
- कोरोना संकट के इस दौर में लोगों की घटती आमदनी की वजह से खर्च करने की आदत बदल गई है
- इससे उनका खर्च घटा गया है और बचत बढ़ गई है
- रिजर्व बैंक (आरबीआई) की ओर से जारी रिपोर्ट में यह जानकारी मिली है
कोरोना संकट के इस दौर में लोगों की घटती आमदनी की वजह से खर्च करने की आदत बदल गई है। इससे उनका खर्च घटा गया है और बचत बढ़ गई है। रिजर्व बैंक (आरबीआई) की ओर से जारी रिपोर्ट में यह जानकारी मिली है। रिजर्व बैंक की रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2019-20 में लोगों की ओर से अधिक बचत करने से उनकी शुद्ध वित्तीय संपत्ति बढ़कर 15.6 लाख करोड़ रुपये के स्तर पर पहुंच गई। आंकड़ों के मुताबिक यह राशि देश के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के 7.7 फीसदी के बराबर है। इससे पिछले वित्त वर्ष में लोगों की कुल बचत 13.7 लाख करोड़ थी और यह जीडीपी की 7.2 फीसदी थी।
बैंकों से कर्ज लेने में गिरावट आई
कोरोना से उपजी आर्थिक अस्थिरता के कारण आम लोग बैंक से लोन नहीं ले रहे हैं। इसके चलते बैंकों के कर्ज में बड़ी गिरावट आई है। वित्त वर्ष 2018-19 में बैंकों ने आम लोगों को 7.5 लाख करोड़ रुपये का कर्ज दिया था जो 2019-20 में घटकर 6.01 लाख करोड़ रुपये रह गया है। चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही के आंकड़े अभी जारी नहीं किए गए हैं। इसमें बैंक कर्ज में और बड़ी गिरावट देखने को मिल सकती है।
बचत और बढ़ने की उम्मीद
आरबीआई के अनुसार, चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में आम लोगों की बचत और बढ़ने की उम्मीद है। इसकी वजह कोरोना संकट के कारण खर्च में की गई बड़ी कटौती है। रिपोर्ट के अनुसार, चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में लोगों की बचत वित्त वर्ष 2017-18 के स्तर पर पहुंच गई है।
बचत का पैसा कहां रख रहे हैं लोग
- 5.6 लाख करोड़ पर पहुंची भारतीयों की कुल बचत कोरोना संकट के बीच
- 7.7 फीसदी देशकी कुल जीडीपी के बराबर है यह बचत
- 66 फीसदी भारतीय नकद व एफडी में निवेश करते हैं अपनी बचत का पैसा
- 52.26% बैंकों में एफडी के रूप में
- 23% जीवन बीमा निधि में जमा
- 13.4% नकदी के रूप में
- 7% म्यूचुअल फंड में जमा
- 3.8%कॉपोरेटिव बैंक में जमा
जमा बढ़ने से देनदारी कम हुई
| वित्त वर्ष | कुल जमा | देनदारी | कुल बचत |
| 2017-18 | 20.6 | 7.31 | 13.29 |
| 2018-19 | 21.23 | 7.5 | 13.73 |
| 2019-20 | 21.63 | 6.01 | 15.62 |
आंकड़े लाख करोड़ रुपये में
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Drigraj Madheshiaदृगराज मद्धेशिया पिछले 21 वर्षों से पत्रकारिता जगत का एक विश्वसनीय चेहरा हैं। वर्तमान में 'लाइव हिन्दुस्तान' की बिजनेस टीम के एक महत्वपूर्ण सदस्य के रूप में, वे शेयर बाजार, कमोडिटी, पर्सनल फाइनेंस और यूटिलिटी सेक्टर पर अपनी गहरी पकड़ रखते हैं। वह कलम से बाजार की नब्ज टटोलने वाले एक पत्रकार हैं, जो शेयर बाजार से लेकर आपकी जेब (Personal Finance) तक, हर खबर को आसान बनाते हैं। टीवी, प्रिंट और डिजिटल मीडिया के अपने विस्तृत अनुभव के साथ, दृगराज जटिल मार्केट डेटा को आम पाठकों के लिए 'कुछ अलग' और आसान भाषा में पेश करने के लिए पहचाने जाते हैं। उन्होंने अपने करियर में हिन्दुस्तान, सहारा समय, दैनिक जागरण और न्यूज नेशन जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दी हैं। मूलत: उत्तर प्रदेश के कुशीनगर जिले के रहने वाले दृगराज मैथ्स बैकग्राउंड होने के कारण डेटा और कैलकुलेशन में माहिर हैं, जो बिजनेस पत्रकारिता के लिए एक बड़ा प्लस पॉइंट है। उन्होंने कॅरियर की शुरुआत गोरखपुर से सहारा समय साप्ताहिक से बतौर फ्रीलांसर की और बहुत ही जल्द सहारा समय उत्तर प्रदेश/उत्तराखंड के हिस्सा बन गए। इसके बाद छत्तीसगढ़ में वॉच न्यूज से जुड़े। टीवी को छोड़ हिन्दुस्तान अखबार के बरेली एडिशन की लॉन्चिंग टीम का हिस्सा बने। साढ़े सात साल की मैराथन पारी के बाद अगला पड़ाव न्यूज नेशन डिजिटल रहा। इसके बाद एक बार फिर हिन्दुस्तान दिल्ली से जुड़े और अब डिजिटल टीम का हिस्सा हैं। और पढ़ें


