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पैकेटबंद खाद्य पदार्थों पर लेबलिंग अभिभावकों की है ये राय, इस बात को लेकर हैं अधिक चिंतित 

विशेष संवाददाता,नई दिल्ली Tarun Singh
Sat, 16 Oct 2021 04:04 PM
पैकेटबंद खाद्य पदार्थों पर लेबलिंग अभिभावकों की है ये राय, इस बात को लेकर हैं अधिक चिंतित 

बच्चों में बढ़ते मोटापे और वयस्क होने पर उनमें गैर संक्रामक रोगों के बढ़ते जोखिम के कारण अभिभावकों की चिंता बढ़ रही है। यही कारण है कि एक राष्ट्रव्यापी सर्वेक्षण में 80 फीसदी अभिभावकों ने कहा कि प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों के पैकेट पर वसा, नमक, चीनी आदि की जानकारी को स्पष्ट और प्रमुखता से प्रदर्शित किया जाना चाहिए। यह सर्वेक्षण खाद्य जागरुकता के क्षेत्र में कार्यरत गैर सरकारी संगठन इंस्टीट्यूट ऑफ गवर्नेंस, पॉलिसी एंड पॉलिटिक्स (आईजीपीपी) के द्वारा किया गया। जिसके नतीजे शुक्रवार को जारी किए गए।

सर्वे का एक प्रमुख निष्कर्ष यह है कि अभिभावकों में वसा, नमक और चीनी के अत्यधिक सेवन के स्वास्थ्य पर होने वाले नुकसान के बारे में काफी जागरूकता आ गई है। वे इस बात को समझने लगे है कि मधुमेह, उच्च रक्तचाप जैसी बीमारियों को बढ़ाने में प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों की बड़ी भूमिका है। क्योंकि देश में बिक रहे ज्यादातर पैकेटबंद खाद्य पदार्थों में मौजूद विभिन्न तत्वों की मात्रा का उल्लेख नहीं होता है। यदि कभी किया भी जाता है कि वह इतना अस्पष्ट होता है कि आम उपभोक्ता उसे समझ नहीं पाता है।

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बता दें कि वर्ष 2017 के ग्लोबल बर्डन ऑफ डिजीज रिपोर्ट के अनुसार देश में प्रत्येक वर्ष 17 लाख लोग हृदय रोग की वजह से मरते हैं। इसके अलावा, भारत में समय से पहले होने वाली मृत्यु में 20 वर्ष में 59 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। इस कारण से समय पूर्व होने वाली मौतों का आंकड़ा वर्ष 1990 में 2.32 करोड़ था जो वर्ष 2010 में बढ़कर 3.7 करोड़ हो गया। इसके बावजूद, रोजाना के हमारे खाने में चीनी, नमक और अनसैचुरेटेड फैट (असंतृप्त वसा) की खपत का स्तर लगातार बढ़ता जा रहा है। अरबों डॉलर के प्रसंस्कृत खाद्य उद्योग द्वारा हमारे आहार को नियंत्रित किया जा रहा है और इस तरह के अस्वस्थकर खाद्य पदार्थों को बढ़ावा दिया जा रहा है।

सर्वेक्षण के प्रमुख निष्कर्ष

• 80% अभिभावक मानते हैं कि फूड प्रोसेसिंग कंपनियों के लिए यह अनिवार्य होना चाहिए कि वे डिब्बाबंद खाद्य उत्पादों पर चीनी, वसा और नमक के स्तर को आसानी से समझ आने वाले लेबल के माध्यम से प्रमुखता से प्रदर्शित करें।
• इनमें से लगभग 60% माता-पिता ने इस बात पर चिंता जताई कि बाजार में पैकेज्ड जंक फूड प्रॉडक्ट की संख्या बढ़ती जा रही है जिनकी मार्केटिंग आक्रामक और अनियंत्रित तरीके से हो रही है।

• 77% ने माना कि नमक, चीनी और वसा जैसे हानिकारक तत्वों से संबंधित जानकारी प्रदर्शित करना अगर सरकार द्वारा अनिवार्य कर दिया जाए तथा उन्हें सरल और आसान तरीके से खाद्य उत्पादों पर प्रदर्शित किया जाए तो लोग स्वस्थ विकल्प अपनाने के लिए प्रेरित होंगे। सर्वे में शामिल 62% से ज्यादा अभिभावक ज्यादा वसा, नमक और चीनी (एचएफएसएस) वाले डिब्बाबंद खाद्य पदार्यों को हमेशा के लिए छोड़ने के लिए तैयार दिखे।

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