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रिपोर्ट: देश में कालाधन पता करने का कोई तरीका नहीं

संसद पर वित्त मामलों की स्थाई समिति की माने तो देश में कालाधन पता लगाने का कोई भरोसेमंद तरीका मौजूद ही नहीं है। संसद को सौंपी गई समिति की रिपोर्ट में साफ लिखा गया है कि कालेधन को लेकर जितने भी आंकड़े देश में मौजूद हैं वे अनुमान पर आधारित हैं। इसमें सबसे चौंकाने वाली बात है कि इसके अनुमान भी अलग-अलग है।

रिपोर्ट के मुताबिक, जिन संस्थाओं ने कालेधन को लेकर अध्ययन किया है उनके मुताबिक सबसे ज्यादा कालाधन रियल स्टेट, माइनिंग,  दवाओं, पान मसाला, गुटखा, तंबाकू, बुलियन, कमोडिटी मार्केट, फिल्म उद्योग, शिक्षण संस्थाओं और प्रोफेशनल क्षेत्रों में है। साथ ही समिति ने ये भी बताया है कि इन क्षेत्रों के अलावा शेयर बाजार और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में भी काला धन पैदा करने की भारी क्षमता है।

इन तीन रिपोर्ट का हवाला दिया
1. समिति ने रिपोर्ट तैयार करने के लिए देश के तीन जाने माने संस्थानों के अनुमान का हवाला दिया है। इनके मुताबिक नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ पब्लिक पॉलिसी एंड फाइनेंस यानि एनआईपीएफपी का अनुमान कहता है कि 1997 से 2009 के बीच जीडीपी का 0.2 फ़ीसदी से लेकर 7.4 फ़ीसदी काला धन गैरकानूनी तरीके से देश के बाहर चला गया।

2. नेशनल काउंसिल ऑफ एप्लाइड इकोनॉमिक रिसर्च यानि एनसीएईआर का अनुमान कहता है कि विदेशों में जमा किया गया कालाधन 384 से 490 अरब डॉलर के करीब हो सकता है। 

3. नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ फाइनेंशियल मैनेजमेंट के मुताबिक भारत से कुल कालाधन जो देश से निकलकर विदेश पहुंचता है वो साल 1990 से 2008 के बीच 216.48 अरब डॉलर यानि करीब  9.41 लाख करोड़ रुपए तक हो सकता है।

शुरुआती रिपोर्ट
कुल मिलाकर कई दौर की बैठकों और वित्त मंत्रालय के अधिकारियों के साथ सवाल जवाब के बाद भी संसदीय समिति इस मुद्दे पर कोई खास जानकारी नहीं दे पाई है। न ही किसी एक अनुमान पर पहुंच पाई है। समिति की तरफ से शुरुआती रिपोर्ट दी गई है। इसमें कहा गया है कि देश में डायरेक्ट टैक्स कोड संसद से जल्द पास कराया जाए।

प्रत्यक्ष कर कोड सरल बनाया जाए
ये भी सुझाया गया है कि प्रत्यक्ष कर कोड को सरल बनाने के लिए सरकार को कदम उठाना चाहिए। हालांकि सरकार ने इस दिशा में कदम उठाने भी शुरू कर दिए हैं। वित्त मंत्रालय ने समिति को प्रत्यक्ष कर कोड को सरल बनाने के लिए प्रत्यक्ष कर कमेटी का कार्यकाल 2 महीने के लिए और बढ़ा दिया है। अब मई के बजाए जुलाई 2019 में कमेटी सरकार को अपनी रिपोर्ट सौंपेगी।

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  • Web Title:There is no system to trace Black Money Committee Report To Parliament