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बिजनेसअर्श से फर्श: इंटर्न से बने कॉफी किंग, फिर 6.5 हजार करोड़ का कर्ज ले डूबा 

लाइव हिन्दुस्तान टीम,नई दिल्लीPublished By: Sheetal
Wed, 31 Jul 2019 11:21 AM
अर्श से फर्श: इंटर्न से बने कॉफी किंग, फिर 6.5 हजार करोड़ का कर्ज ले डूबा 

कर्नाटक में चिकमंगलूर के रहने वाले कॉफी किंग वीजी सिद्धार्थ ने अपना करियर एक इंटर्न के तौर पर शुरू किया था। इसके बाद उन्हें कैफे कॉफी डे की शुरुआत की। फोर्ब्स की 2005 की रिपोर्ट के मुताबिक, सिद्धार्थ 8200 करोड़ रुपये के मालिक हैं। 2019 आते-आते वह 6.5 हजार करोड़ के कर्ज में डूब गए। 

140 साल पुराना कॉफी बगान का व्यवसाय
- सिद्धार्थ का जन्म कर्नाटक के चिकमंगलूर में हुआ 
- चिकमंगलूर की पहचान जायकेदार कॉफी के लिए है
- सिद्धार्थ का परिवार 140 साल से कॉफी बगान का व्यवसाय कर रहा है
- भारत का सबसे बड़े कॉफी साम्राज्य बनाने का श्रेय सिद्धार्थ को जाता है

पूर्व मुख्यमंत्री एसएम कृष्णा के दामाद थे
- सिद्धार्थ ने कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री एसएम कृष्णा की बेटी से शादी की है
- मैंगलोर विश्वविद्यालय से अर्थशास्त्र से परास्नातक की पढ़ाई की 
- 1983 में 24 वर्ष की उम्र में मुंबई की जेएम फाइनेंशियल सर्विसेज में इंटर्न की नौकरी की
- जेएम फाइनेंशियल में दो साल नौकरी करने के बाद सिद्धार्थ बेंगलुरु लौट आए

पिता के पैसे से व्यापार शुरू किया
- इसके बाद पिता ने बिजनेस शुरू करने के लिए सिद्धार्थ को पैसा दिया
- पिता के दिए पैसे में से सिद्धार्थ ने 30,000 रुपए सिवान सिक्योरिटीज नाम की एक छोटी कंपनी में लगा दिए
- 1985 तक वह शेयर बाजार में एक पूर्णकालिक निवेशक बन चुके थे
- इस दौरान वह 10 हजार एकड़ की कॉफी बगान के मालिक बन चुके थे
- सिद्धार्थ ने बताया था कि 90 के दशक में उदारीकरण के बाद मैंने एक साल के भीतर बागानों में निवेश किए पैसे को दोगुना कर दिया था

कॉफी से सफलता का स्वाद चखा
- 1993 में अमलगेटेड बीन कॉफी कंपनी (एबीसीटीसीएल) की स्थापना की, जो कॉफी का निर्यात करती थी
- सिद्धार्थ के बागानों में 3,000 टन कॉफी का उत्पादन होता है, जबकि एबीसीटीसीएल 20,000 टन का व्यापार किया
- इस दौरान के दो वर्षों में एबीसीटीसीएल भारत की दूसरी सबसे बड़ी कॉफी निर्यातक कंपनी बन गई

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बेंगलुरु से कैफे कॉफी डे की शुरुआत
- 1996 में सिद्धार्थ ने बेंगलुरु के ब्रिगेड रोड पर कैफे कॉफी डे का स्टोर खोला
- 23 साल में 200 शहरों में 1752 कैफे
- 2005 में सिद्धार्थ ने भारत के बाहर पहला कॉफी कैफे कॉफी डे 2005 में ऑस्ट्रिया की राजधानी विएना में खोला था
- ऑस्ट्रिया के अलावा चेक गणराज्य और मलेशिया में भी कंपनी का बिजनेस है
- कैफे कॉफी डे के मार्च 2019 तक देश-विदेश के 200 शहरों में 1752 कैफे हैं
- 4800 वेंडिंग मशीन, 532 कियोस्क और 403 कॉफी आउटलेट्स हैं इनमें 
- स्टोर में कॉफी और एक घंटे की इंटरनेट सर्फिंग के लिए उस समय 100 रुपये देने होते थे
- कॉफी चेन की पहली ऐसे समय में हुई जब बेंगलुरु आईटी हब बनने की कगार पर था
- प्रतिस्पर्धा बढ़ने के बाद कैफ डे ने प्रतिद्वंद्वी के ठीक बगल में स्टोर खोलने की रणनीति बनाई

12 हजार एकड़ में फैला है कॉफी बगान 
वीजी सिद्धार्थ इस समय 12 हजार एकड़ में फैले कॉफी बगान के मालिक हैं। एक मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक कैफे कॉफी डे का सालाना व्यापार 4264 करोड़ रुपये है। 

माइंडट्री के शेयर 3210 करोड़ में बेचे
वर्तमान में सिद्धार्थ जीटीवी, माइंडट्री, लिक्विड क्रिस्टल, वे 2 वेल्थ और इट्टियम के बोर्ड में हैं। सिद्धार्थ ने पिछले दिनों आईटी कंपनी माइंडट्री में अपनी पूरी 20.4 फीसदी हिस्सेदारी 3210 करोड़ रुपए में लार्सन एंड टूब्रो को बेच दी थी।

2017 में आयकर छापे
वीजी सिद्धार्थ 2017 में कर चोरी के आरोपों के चलते चर्चा में आए। इस दौरन कर्नाटक और गोवा के आयकर विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने मुंबई, बेंगलुरु, चेन्नई और चिकमंगलूर में 20 से अधिक स्थानों पर आयकर छापे मारे। आयकर विभाग ने कैफे कॉफी डे की खुदरा श्रृंखला पर भी छापा मारा। जिसमें 650 करोड़ रुपये की आय मिली।

कॉफी डे को बेचने की खबर
पिछले काफी दिनों से मीडिया में खबरें थी कि कैफे कॉफी डे को बेचने के लिए सिद्धार्थ कोका कोला से बातचीत कर रहे थे। रिपोर्ट के मुताबिक, सिद्धार्थ को कॉफी डे की बिक्री से 8,000 से 10,000 करोड़ रुपये मिलने की उम्मीद थी। 

कॉफी डे को एक दिन में 813 करोड़ का नुकसान
सिद्धार्थ के लापता होने की खबरों के बाद कॉफी डे एंटरप्राइजेज लि. (सीसीडी) का शेयर मंगलवार को 20 प्रतिशत लुढ़क गया। इससे कंपनी के बाजार पूंजीकरण में एक दिन में 813 करोड़ रुपये की गिरावट आई।  सीसीडी का शेयर बंबई शेयर बाजार में 19.99 प्रतिशत टूटकर 154.05 रुपये पर आ गया। यह न केवल 52 सप्ताह का न्यूनतम स्तर है बल्कि एक दिन की गिरावट की सीमा को छू गया। नेशनल स्टाक एक्सचेंज (एनएसई) में शेयर 20 प्रतिशत गिरावट की सर्किट ब्रेकर की सीमा पर पहुंचने के साथ एक साल के न्यूनतम स्तर 153.40 रुपये प्रति इकाई पर आ गया। शेयर की कीमत में गिरावट से कंपनी का बाजार पूंजीकरण 812.67 करोड़ रुपये घटकर 3,254.33 करोड़ रुपये पर आ गया। इस बीच एचडीएफसी ने कहा है कि सिद्धार्थ से जुड़ी किसी भी कंपनी पर उसका कोई कर्ज नही हैं। वहीं वैश्विक निजी इक्विटी कंपनी केकेआर ने कहा कि कंपनी में उसके पास करीब 6 प्रतिशत हिस्सेदारी है, जिसे वह बरकरार रखेगी। पहले यह हिस्सेदारी 10.3 प्रतिशत थी। 

कुल संपत्ति का 2.5 गुना हो गया था कर्ज
31 मार्च  2019 तक कॉफी डे एंटरप्राइजेज पर 6,547 करोड़ रुपये का कर्ज था। जो कि 2,529 करोड़ रुपये की कुल संपत्ति का लगभग 2.5 गुना है। हालांकि, यह रिपोर्ट भी है कि माइंडट्री में सिद्धार्थ द्वारा अपनी हिस्सेदारी बेचने के बाद कर्ज काफी कम हो गया था। वित्त वर्ष 2017-18 में कैफे कॉफी-डे वैश्विक राजस्व 1,777 करोड़ रुपये और 2018-19 में 1,814 करोड़ रुपये पहुंच गया। मौजूदा वित्त वर्ष खत्म होने पर कंपनी को 2,250 करोड़ रुपये के राजस्व की उम्मीद है। लेकिन, दूसरा पहलू यह भी है कि पिछले कुछ सालों से सिद्धार्थ कॉफी बिजनेस समेत अन्य कारोबारों में नकदी संकट से जूझ रहे थे।  

आयकर विभाग ने आरोपों को नकारा
सिद्धार्थ के लापता होने के बाद उनका एक पत्र भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। पत्र में सिद्धार्थ ने आयकर विभाग पर उत्पीड़न करने का आरोप लगाया है। वहीं आयकर विभाग ने उत्पीड़न के आरोपों को नकारते हुए कहा कि हमने नियमानुसार कार्रवाई की। इसके साथ विभाग ने बताया कि वायरल पत्र में जो हस्ताक्षर है वह सिद्धार्थ के हस्ताक्षर से मेल नहीं खाता है। 

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