केंद्र के बाद राज्य सरकारें भी बढ़ाएंगी उधारी, आमदनी में 84 फीसद की कमी
मुख्य बातें
- कोरोना महामारी से सरकारी खजाने पर बढ़ते बोझ को देखते हुए राज्य सरकारों ने भी केंद्र से उनकी उधारी बढ़ाने मांग की है
- तमाम राज्य सरकारें चाहती हैं कि उन्हें उधारी के मौजूदा प्रावधान से ज्यादा रकम लेने..
कोरोना महामारी से सरकारी खजाने पर बढ़ते बोझ को देखते हुए राज्य सरकारों ने भी केंद्र से उनकी उधारी बढ़ाने मांग की है। तमाम राज्य सरकारें चाहती हैं कि उन्हें उधारी के मौजूदा प्रावधान से ज्यादा रकम लेने की इजाजत दी जाए। साथ ही यह रकम खुद भारतीय रिजर्व बैंक की तरफ से कम ब्याज पर उधार मिले ताकि सरकारों पर इस रकम चुकाने को लेकर बड़ा बोझ न पड़े।
घरेलू उत्पाद का तीन फीसदी उधार लेने का प्रावधान
बिहार सरकार के उपमुख्य मंत्री सुशील मोदी ने हिन्दुस्तान को बताया कि उन्होंने इस बारे में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को पत्र लिख राजकोषीय उत्तरदायित्व और बजट प्रबंधन अधिनियम में जरूरी बदलाव कर राज्यों को उधारी में इजाफा करने की इजाजत देने की अपील की है। मौजूदा दौर में एफआरबीएम एक्ट के तहत राज्यों के लिए घरेलू उत्पाद का तीन फीसदी उधार लेने का प्रावधान है। उन्होंने कहा कि अकेले बिहार में कोरोना के चलते राज्य की आमदनी में 84 फीसदी की कमी आई है।
राज्यों ने पेट्रोल पर वैट बढ़ाया
यानी इस अप्रैल में राज्य की आय केवल 16 फीसद ही हुई है। इसको देखते हुए तमाम राज्यों ने पेट्रोल पर वैट बढ़ाया है। अब बिहार समेत कई राज्यों को उम्मीद है कि केंद्र सरकार उन्हें भी उधार बढ़ाने की इजाजत दें। सुशील मोदी ने बताया कि बिहार ने केंद्र सरकार से राज्य की उधारी तीन फीसदी से बढ़ाकर चार फीसदी करने की मांग है। वहीं कई राज्यों की तरफ से इसे बढ़ाकर पांच फीसदी करने की भी मांग है। इसमें रिजर्व बैंक को भी राज्यों की मदद के लिए आगे आना चाहिए।
केंद्र ने बढ़ाई उधारी
केंद्र सरकार ने पिछले हफ्ते ही अपने उधारी कार्यक्रम में 50 फीसदी से ज्यादा इजाफा करते हुए मौजूदा वित्त वर्ष में बॉन्ड और सरकारी सिक्योरिटीज के जरिए 12 लाख करोड़ रुपये उधार लेने का फैसला किया था। इस रकम का इस्तेमाल केंद्र सरकार के खजाने पर बढ़ते घाटे से निपटने और जरूरी खर्च को पूरा के लिए किया जाएगा। कोरोना संकट को देखते हुए चालू वित्त वर्ष में राज्यों की कमाई पर दबाव बढ़ता ही जा रहा है। आर्थिक हालात कमजोर होने के बाद भी राज्यों को वेतन, पेंशन का भुगतान करना होगा साथ ही पुराने कर्ज भी चुकाने होंगे। ऐसे में अगर राज्यों की उधारी नहीं बढ़ाई गई तो उन्हें तमाम जरूरी खर्चों में कटौती करनी होगी। ऐसा करने के अर्थव्यवस्था पर भी बुरे असर पड़ने की आशंका है।
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Drigraj Madheshiaदृगराज मद्धेशिया पिछले 21 वर्षों से पत्रकारिता जगत का एक विश्वसनीय चेहरा हैं। वर्तमान में 'लाइव हिन्दुस्तान' की बिजनेस टीम के एक महत्वपूर्ण सदस्य के रूप में, वे शेयर बाजार, कमोडिटी, पर्सनल फाइनेंस और यूटिलिटी सेक्टर पर अपनी गहरी पकड़ रखते हैं। वह कलम से बाजार की नब्ज टटोलने वाले एक पत्रकार हैं, जो शेयर बाजार से लेकर आपकी जेब (Personal Finance) तक, हर खबर को आसान बनाते हैं। टीवी, प्रिंट और डिजिटल मीडिया के अपने विस्तृत अनुभव के साथ, दृगराज जटिल मार्केट डेटा को आम पाठकों के लिए 'कुछ अलग' और आसान भाषा में पेश करने के लिए पहचाने जाते हैं। उन्होंने अपने करियर में हिन्दुस्तान, सहारा समय, दैनिक जागरण और न्यूज नेशन जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दी हैं। मूलत: उत्तर प्रदेश के कुशीनगर जिले के रहने वाले दृगराज मैथ्स बैकग्राउंड होने के कारण डेटा और कैलकुलेशन में माहिर हैं, जो बिजनेस पत्रकारिता के लिए एक बड़ा प्लस पॉइंट है। उन्होंने कॅरियर की शुरुआत गोरखपुर से सहारा समय साप्ताहिक से बतौर फ्रीलांसर की और बहुत ही जल्द सहारा समय उत्तर प्रदेश/उत्तराखंड के हिस्सा बन गए। इसके बाद छत्तीसगढ़ में वॉच न्यूज से जुड़े। टीवी को छोड़ हिन्दुस्तान अखबार के बरेली एडिशन की लॉन्चिंग टीम का हिस्सा बने। साढ़े सात साल की मैराथन पारी के बाद अगला पड़ाव न्यूज नेशन डिजिटल रहा। इसके बाद एक बार फिर हिन्दुस्तान दिल्ली से जुड़े और अब डिजिटल टीम का हिस्सा हैं। और पढ़ें


