डिब्बाबंद खाने पर स्टार रेटिंग ठीक नहीं, उपभोक्ता होंगे गुमराह
Warning: स्टार रेटिंग में यह पता लगा पाना कठिन है कि उसमें शुगर या साल्ट कम है या ज्यादा। भारत में जिस प्रकार से मधुमेह और बीपी के रोगी बढ़ रहे हैं, वैसे फ्रंट पैक वार्निग ज्यादा महत्वपूर्ण है।

खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) की डिब्बाबंद खाद्य पदार्थों के लिए स्टार रेटिंग शुरू किए जाने की कवायद के बीच उपभोक्ता विशेषज्ञों ने सरकार को इसे लेकर आगाह किया है। उनका कहना है कि स्टार रेटिंग से उपभोक्ता गुमराह होंगे और कंपनियों को इससे स्वास्थ्य के लिए हानिकारक खाद्य पदार्थ बेचने का मौका मिल जाएगा। इससे बेहतर होगा कि पैकेट पर खाद्य पदार्थ को लेकर स्पष्ट चेतावनी (फ्रंट पैक वार्निंग ) दी जाए।
दरअसल, एफएसएसएआई ने कुछ समय पहले आईआईएम अहमदाबाद से स्टार रेटिंग को लेकर एक अध्ययन कराया था। इसके बाद यह कवायद तेज हुई है। गैर सरकारी संगठन कंज्यूमर वाइस के प्रमुख असीम सान्याल के अनुसार स्टार रेटिंग उपयुक्त नहीं है। नेशनल इंस्टीट्यूट आफ न्यूट्रीशियन ने भी कहा है कि इससे अनहेल्दी भोजन को जबरदस्ती स्वास्थ्यकर बनाकर पेश किया जाएगा, जो उपभोक्ताओं के हित में नहीं होगा। विशेषज्ञ यह सवाल भी उठा रहे हैं कि यदि किसी खाद्य उत्पाद की स्टार रेटिंग 2.5 है तो उपभोक्ता कैसे तय करेगा कि वह स्वास्थ्यकर है या नहीं।
कंपनियां बढ़वा लेती हैं रेटिंग
कई देशों में स्टार रेटिंग प्रचलित है, जहां ऐसे खाद्य पदार्थों और पेयों को 1 से 4 की स्टार रेटिंग दी जाती है। लेकिन यह देखा गया है कि कंपनियां अनहेल्दी खाद्य पदार्थ के लिए भी जोड़-तोड़ करके स्टार रेटिंग हासिल कर लेती हैं। जैसे यदि कोई खाद्य पदार्थ जंक फूड की श्रेणी में आता है और वह दो स्टार या इससे नीचे की अहमियत रखता है तो वे उसमें कुछ विटामिन्स या कोई पौष्टिक सामग्री जोड़कर उसकी स्टार रेटिंग बढ़वा लेती हैं, लेकिन एक अनहेल्दी खाद्य पदार्थ में इस प्रकार कोई अन्य सामग्री मिलाकर उसके दुष्प्रभाव कम नहीं होते हैं।
पैकेट पर स्पष्ट चेतावनी बेहतर विकल्प
विशेषज्ञों का कहना है कि भारतीय परिप्रेक्ष्य में यह बेहतर है कि खाद्य पदार्थों पर सामने की लेबलिंग हो, जिसमें सैचुरेटेट फैट, चीनी और नमक को लेकर स्पष्ट चेतावनी लिखी जाए। इससे लोगों को उत्पादन चुनने में आसानी होगी। स्टार रेटिंग में यह पता लगा पाना कठिन है कि उसमें शुगर या साल्ट कम है या ज्यादा। भारत में जिस प्रकार से मधुमेह और उच्च रक्तचाप के रोगी बढ़ रहे हैं, उसके मद्देनजर फ्रंट पैक वार्निग ज्यादा महत्वपूर्ण है।
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Drigraj Madheshiaदृगराज मद्धेशिया:-लाइव हिन्दुस्तान में पिछले 6 साल से बिजनेस टीम का अहम हिस्सा हैं। दृगराज को पत्रकारिता में 21 वर्षों का लंबा अनुभव है। इन्होंने टीवी, प्रिंट और डिजिटल मीडिया में अपनी स्पेशल खबरों से खास पहचान बनाई है। शेयर मार्केट, कमोडिटी, पर्सनल फाइनेंस और यूटिलिटी पर विशेष पकड़। मैथ्स से ग्रेजुएट, मास कम्युनिकेशन और कंप्यूटर साइंस में पीजी डिप्लोमा। दृगराज, रिसर्च और एनॉलिस के जरिए मार्केट डेटा को आसान भाषा में 'कुछ अलग' पाठकों तक पहुंचाते हैं। लाइव हिन्दुस्तान से पहले साढ़े सात साल तक हिन्दुस्तान अखबार में बतौर सीनियर रिपोर्टर काम किया। इसके अलावा सहारा समय, दैनिक जागरण, न्यूज नेशन में भी अपनी सेवाएं दे चुके हैं।
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