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बीमा की जानकारी लेने के लिए सोशल मीडिया विश्वसनीय स्रोत नहीं

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बीते कुछ सालों में सोशल मीडिया की भूमिका काफी बढ़ गई है। सभी के लिए सूचना हासिल करने और साझा करने की पसंदीदा जगह सोशल मीडिया बन चुका है। बीमा कंपनियां भी फेसबुक पेज या ट्विटर खाते के जरिए सोशल मीडिया पर उपस्थित हैं। लेकिन बीमा विशेषज्ञों का कहना है कि बीमा के बारे में जानकारी लेने के लिए सोशल मीडिया विश्वसनीय स्रोत नहीं है। इसकी वजह यह है कि सोशल मीडिया पर ज्यादा जानकारी इंटरनेट से कॉपी की गई है। उसकी विश्वसनीयता का कोई ठोस प्रमाण नहीं है।

अगर आप सोशल मीडिया से कोई जानकारी लेते हैं तो हो सकता है कि वह गलत हो। अगर आप बीमा पॉलिसी का चुनाव या नए पॉलिसी के चयन में सोशल मीडिया को आधार बनाते हैं तो आप गलत फैसला ले सकते हैं। सोशल मीडिया पर कई पेज या खाते नकली है जो बीमा कंपनी के खाते से मिलते हैं। उस पेज या खाते से कोई जानकारी साझा करने पर आपके साथ फर्जीवाड़ा हो सकता है। बीमा कंपनियां भी अब अपने पेज पर काफी कम सक्रिय है। वह सिर्फ नए उत्पाद की जानकारी ही साझा कर रही है। 

नए-नए तरीके से बढ़ा फर्जीवाड़ा 
ऑनलाइन और सोशल मीडिया के चलन बढ़ने के साथ धोखेबाज नए-नए तरीके भी सामने आ रहे हैं। इन दिनों फर्जीवाड़े को अंजाम देने के लिए धोखेबाज फर्जी एप, हेल्पलाइन नंबर, नकली सोशल मीडिया पेज या ट्विटर खाता आदि का सहारा ले रहे हैं। फर्जी सोशल मीडिया अकाउंट बनाकर ग्राहकों से अहम जानकारियां चुराकर फर्जीवाड़ा के घटनाएं तेजी से बढ़ी है।

शिकायत करने का बेहतर माध्यम 
सोशल मीडिया एक उत्कृष्ट शिकायत निवारण तंत्र हो सकता है। बीमा कंपनियां इस पर काम भी कर रही है। ट्विटर के जरिए शिकायत करन पर बीमा कंपनी जल्द से जल्द निपटारा भी करना चाहती है। लेकिन, कई ऐसे मामले भी सामने आए हैं जब शिकायतकर्ता ने बिना किसी आधार के शिकायत दर्ज करा दी। इस पर रोक लगाने की जरूरत है।

न करें ये गलतियां
अगर आप बीमा से जुड़े कोई जानकारी सोशल मीडिया पर सर्च करते हैं और उसके बाद आपके पास कोई ई-मेल या फोन आता है और आपसे व्यक्तिगत जानकारी जैसे पॉलिसी नंबर, बैंक खाता या प्रीमियम आदि की जानकारी मांगी जाती है। कभी भी अपनी बैंकिंग या बीमा से जुड़ी जानकारी साझा नहीं करें। फर्जीवाड़ा को अंजाम देने के लिए इन दिनों इस तरीके का चलन तेजी से बढ़ा है। 

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