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सर्विस सेक्टर और उपभोक्ता मांग ने सुधारी अर्थव्यवस्था की रफ्तार

नई दिल्ली। शायन घोषDrigraj Madheshia
Fri, 26 Nov 2021 06:51 AM
सर्विस सेक्टर और उपभोक्ता मांग ने सुधारी अर्थव्यवस्था की रफ्तार

कोरोना महामारी के असर से भारतीय अर्थव्यवस्था तेजी से बाहर निकलती दिख रही है। त्योहारी सीजन के बाद भी भारतीय अर्थव्यवस्था में तेजी बनी हुई और सेवा क्षेत्र, कारोबारी गतिविधि और निर्यात जैसे अहम संकेतक में लगातार विस्तार हो रहा है। ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट में यह बात कही गई है।

ब्लूमबर्ग ने अपनी एनिमल स्प्रिट गेज संकेतक के आधार पर कहा है कि सेवा क्षेत्र और कारोबारी गतिवधियों में चार माह लगातार वृद्धि हुई है और पांचवें माह में तेजी के रास्ते पर बढ़ रहे हैं। इसमें कहा गया है कि कंपनियों द्वारा विस्तार पर जोर देने से तस्वीर बदली है। कंपनियां टीकाकरण में तेजी और सरकार की ओर से हर संभव मदद पर भरोसा जताते हुए निवेश और विस्तार के लिए काफी तेजी से बढ़ रही हैं। जबकि कोरोना की पहली और दूसरी लहर के दौरान विस्तार की योजनाओं को रोक लिया गया था और नया निवेश करने का जोखिम कोई नहीं ले रहा था।

रिपोर्ट में अनुमान लगाया है कि भारत इन अहम क्षेत्रों में तेजी के दम पर फिर से चालू वित्त वर्ष में दुनिया की सबसे तेज बढ़ने वाली अर्थव्यवस्था बन सकता है। साथ ही कहा गया है कि चालू वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही में भारत की आर्थिक वृद्धि दर (जीडीपी) 8.2 रह सकती है। दूसरी तिमाही के आंकड़े सरकार 30 नवंबर को जारी होने वाले हैं।,मूडीज की विश्लेषक श्वेता पटोडियाकहती हैं,  "कोविड-19 टीकाकरण पर भारत की स्थिर प्रगति से आर्थिक गतिविधियों में निरंतर सुधार में मदद मिलेगी। महामारी संबंधी प्रतिबंधों में ढील के बाद उपभोक्ता मांग, खर्च और विनिर्माण गतिविधि में सुधार हो रहा है।"

निर्यात में दोगुना उछाल

चालू वित्त वर्ष में सितंबर में निर्यात में सालाना आधार पर निर्यात 43 फीसदी बढ़ा है। जबकि इसके पिछले माह की तुलना में इसमें करीब दोगुना उछाल आया है। निर्यात किए गए उत्पादों में पेट्रोलिमय उत्पाद, इंजीनियरिंग वस्तुएं और कॉफी का सबसे अधिक योगदान रहा है। इस अवधि में आयात में 63 फीसदी वृद्धि हुई है जिनमें दालें, कोयला, कच्चा तेल और अखबारी कागज शामिल हैं। निर्यात भारत के लिए विदेशी मुद्रा अर्जित करने का सबसे बड़ा जरिया है।

आम उपभोक्ताओं ने बढ़ाई कर्ज की मांग

उपभोक्ता मांग में तेजी आर्थिक गतिवधियों में वृद्धि का एक बेहतर संकेतक होती है। त्योहारी मौसम में 8 अक्तूबर से पांच नवंबर के बीच कर्ज की मांग में 7.3 फीसदी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इस अवधि में 110.9 खरब रुपये की उधारी लोगों ने ली। आंकड़ों के मुताबिक सितंबर में कर्ज की मांग 6.7 फीसदी और अक्तूबर में 6.8 फीसदी रही है। यह दर्शाता है कि लोगों में विश्वास बढ़ा और अर्थव्यवस्था में मांग तेज हुई है।

भारत की आर्थिक वृद्धि में जोरदार उछाल आएगा: मूडीज

मूडीज इन्वेस्टर्स सर्विस ने गुरुवार को कहा कि भारत में टीकाकरण की बढ़ती दर, कम ब्याज दर और लोगों के खर्च में वृद्धि से कॉरपोरेट क्षेत्र के लिए सकारात्मक नजरिये को बल मिल रहा है। मूडीज का अनुमान है कि मार्च 2022 को समाप्त होने वाले चालू वित्त वर्ष में सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में 9.3 प्रतिशत की वृद्धि के साथ भारत की आर्थिक वृद्धि में जोरदार उछाल आएगा। इसके बाद वित्त वर्ष 2022-23 में 7.9 प्रतिशत की वृद्धि होगी।

साख निर्धारित करने वाली कंपनी ने एक रिपोर्ट में कहा कि लगातार जारी आर्थिक सुधार की वजह से भारतीय कंपनियों के लिए ऋण संबंधी बुनियादी चीजें अनुकूल हैं और रेटिंग की जाने वाली (रेटेड) कंपनियों की कमाई मजबूत उपभोक्ता मांग और जिंसों की ऊंची कीमतों के हिसाब से बढ़ेगी। इसमें कहा गया कि भारत में बढ़ती टीकाकरण दर, उपभोक्ता भरोसा स्थिर होना, कम ब्याज दर और लोगों के खर्च में वृद्धि से गैर-वित्तीय कंपनियों के लिए ऋण संबंधी बुनियादी चीजें सकारात्मक दिखती है। जिंसों की ऊंची कीमतों सहित ये रुझान, अगले 12-18 महीनों में रेटिंग वाली कंपनियों के कर पूर्व आय में वृद्धि में मददगार होंगे। रिपोर्ट के अनुसार, हालांकि, अगर संक्रमण की नई लहर आती हैं, तो उनकी वजह से नए सिरे से 'लॉकडाउन' लग सकता है और उपभोक्ता भावना प्रभावित हो सकती है।

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