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कोयले की चुनिंदा बिक्री से उद्योगों पर पड़ी मार, 50 फीसदी बढ़ी देशभर में ईंट की कीमत

 हिन्दुस्तान ब्यूरो,नई दिल्ली Tarun Singh
Sat, 16 Oct 2021 03:13 PM
कोयले की चुनिंदा बिक्री से उद्योगों पर पड़ी मार, 50 फीसदी बढ़ी देशभर में ईंट की कीमत

देश में कोयला संकट उद्योगों के लिए मुसीबत बनता जा रहा है। कोयले की चुनिंदा बिक्री से उद्योगों बड़ी मार पड़ रही है। बिजली संकट के मद्देनजर कोयले की आपूर्ति के लिए बिजली क्षेत्र को प्राथमिकता दी जा रही है। इससे सीमेंट, स्टील, एल्यूमीनियम, तांबा और जिंक समेत तमाम धातुओं के कारखानों में उत्पादन घटने के साथ इनकी कीमतों में इजाफा होने लगा है।

संकट को देखते हुए कोल इंडिया ने गैर बिजली उत्पादकों को कोयले की आपूर्ति रोक दी है। इससे कई धातुओं की कीमत मेटल एक्सचेंज पर 13 साल के उच्तम स्तर पर पहुंच गई हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि समस्या का जल्द समाधान नही निकला तो मुसीबत और बढ़ सकती है। उनका कहना है कि कोरोना संकट के बावजूद स्टील समेत कई धातुओं के दाम 50 फीसदी से अधिक पहले ही बढ़ चुके हैं। अब कोयला संकट की वजह से इनके दाम नई ऊंचाई पर हैं जिसका असर उपभोक्ताओं की जेब पर भी होगा।

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घर बनाना महंगा हुआ

ईंट भट्ठों पर इस्तेमाल होने वाले कोयले का भाव सात हजार रुपये प्रति मीट्रिक टन से 22 हजार रुपये हो गया है। यही वजह है कि देश के कई राज्यों में ईंट भट्ठे इस सीजन में अभी तक नहीं चल सके हैं। इससे ईंट का भाव भी 1500 से 1700 रुपये तक बढ़ गया है। संकट से पहले ईंट का भाव चार हजार रुपये प्रति हजार था जो छह हजार के करीब पहुंच गया है। इसके अलावा सीमेंट की कीमतों में भी इजाफा हुआ है। घर बनाने में स्टील, सीमेंट और ईंट की लागत सबसे अधिक आती है। इनके महंगा होने पर लोगों के लिए घर बनाना अब महंगा हो गया है।

मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर पर असर

बिजली संकट देश के मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर के लिए भारी पड़ सकता है, जो कि अभी बड़ी मुश्किल से कोरोना संकट से उबर रहा था। देश में कोयला संकट के बीच आयातित कोयले की कीमत 61 फीसदी बढ़ी है। इसकी वजह से धातुओं की उत्पादन लागत में तेज इजाफा हुआ है। स्टील और तांबा समेत कई धातुएं मैन्युफैक्चरिंग उद्योग के लिए अहम हैं। इनपर असर पड़ने से घर में इस्तेमाल होने वाली कई वस्तुओं की कीमत बढ़ सकती है।

फ्रोजेन फूड भी महंगा होगा

फ्रोजेन फ्रूड उद्योग बिजली संकट से सबसे ज्यादा प्रभावित हो सकता है। बिजली कटौती की स्थिति में यह उद्योग डीजल जनरेटर पर भरोसा कर सकती है, लेकिन डीजल महंगा होने से उनकी लागत काफी बढ़ जाएगी। इसके अलावा बिजली कटौती की स्थति में पॉल्ट्री, मीट और डेयरी इंडस्ट्री को भी इसी तरह के हालात का सामना करना पड़ सकता है।

कोल इंडिया ने ई-नीलामी रोकी

बिजली उत्पादन संयंत्रों में कोयले के कम भंडार के बीच सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी कोल इंडिया ने अपनी सहायक कंपनियों से हालात सामान्य होने तक बिजली क्षेत्र के लिए विशेष फॉरवर्ड ई-नीलामी को छोड़कर कोयले की किसी भी तरह की ई-नीलामी आयोजित करने से परहेज करने को कहा है। कोल इंडिया ने अपनी सहायक इकाइयों को भेजे एक पत्र में कहा, यदि कोई कोयला कंपनी बिजली क्षेत्र को भेजे जाने वाले कोयले को प्रभावित किए बिना किसी अन्य क्षेत्र को ई-नीलामी करना चाहती है तो ऐसी किसी भी नीलामी की योजना से पहले उचित कारण के साथ कोल इंडिया पहले बताया जा सकता है। इन सहायक कंपनियों में ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (ईसीएल), भारत कोकिंग कोल लिमिटेड (बीसीसीएल) और सेंट्रल कोलफील्ड्स लिमिटेड (सीसीएल) शामिल हैं।

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