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क्रेडिट कार्ड और पर्सनल लोन के पुनर्गठन में फंसा दूसरी लहर का पेच, क्या आरबीआई करेगा मदद?

तिनेश भशीन,नई दिल्ली Published By: Sheetal Tanwar
Fri, 23 Apr 2021 04:08 PM
क्रेडिट कार्ड और पर्सनल लोन के पुनर्गठन में फंसा दूसरी लहर का पेच, क्या आरबीआई करेगा मदद?

 

कोरोना की दूसरी लहर का असर फिर से उद्योग-धंधे और नौकरीपेशा वर्ग पर पड़ने लगा है। पिछले साल रिजर्व बैंक ने कोरोना संकट को देखते हुए लोन मोरेटोरियम दिया था। साथ ही बैंकों को कर्ज पुनर्गठन का दिशा-निर्देश दिया था। इससे होम और कार लोन के साथ क्रेटिड कार्ड सहित सभी तरह के कर्ज पर राहत मिली थी। लेकिन इस बार रिजर्व बैंक ने अभी तक किसी तरह की राहत की घोषणा नहीं की है। ऐसे में अधिकांश बैंक लोन पुनर्गठन का आवदेन रद्द कर रहे हैं। हालांकि, इसके बावजूद भी आपके विकल्प कम नहीं हुए हैं।

बैंकों के लिए महंगा सौदा

विशेषज्ञों का कहना है कि खुदरा लोन यानी क्रेडिट कार्ड और पर्सनल लोन आदि का पुनर्गठन करना बैंकों के लिए खर्चीला होता है। इसकी वजह से वह ऐसा नहीं करना चाहते हैं। इसके अलावा बैंकों को कर्ज पुनर्गठन के लिए बोर्ड से मंजूरी की जरूरत होती है जो लंबी प्रक्रिया है। इससे भी बैंक बचने की कोशिश करते हैं।

शीर्ष अधिकारियों से करें संपर्क

आमतौर पर बैंक अधिकारी बिना किसी शीर्ष स्तर पर आदेश या रिजर्व बैंक के निर्देश के बगैर कर्ज पुनर्गठन नहीं करते हैं। बैंक ऑफ इंडिया की पहल अभय क्रेडिट काउंसिंलिंग सेंटर मुख्य कर्ज सलाहकार और सेवानिवृत्त बैंकर वी.एन. कुलकर्णी का कहना है कि ऐसी स्थिति में आपको वसूली (रिकवरी) विभाग के महाप्रबंधक (जीएम) से बात करनी चाहिए और अपनी स्थिति उसके सामने रखनी चाहिए। कारण वाजिब होने पर बैंक प्रबंधन अपने ग्राहक को राहत देने से इनकार नहीं करता है।

बैंक के लिए वसूली आसान नहीं

किसी भी तरह का कर्ज देने के पहले बैंक काफी पड़ताल करते हैं। इसके बावजूद मुश्किलों में फंसने पर ग्राहक ईएमआई देने में कई बार चूक जाते हैं। शुरुआत में बैंक ग्राहक को फोन या ईमेल से इसकी जानकारी देते हैं। इसेक बाद वह कोर्ट का सहारा लेते हैं। कुलकर्णी का कहना है कि कोर्ट की प्रक्रिया इतनी लंबी होती है कि बैंक ग्राहक से मोलभाव को तैयार हो जाते हैं। हालांकि, इसके लिए ग्राहक को भी कुछ ऊंचा शुल्क चुकाना पड़ता है।

बैंक को दें सही जानकारी

आपकी नौकरी छूट गई है या वेतन में कटौती हो गई है तो इसकी जानकारी कर्ज देने वाले बैंक को जरूर दें। विशेषज्ञों का कहना है कि वेतनभोगी कर्मचारियों के मामले में बैंक सामान्यत: नरम रुख रखते हैं। उनका कहना है कि बैंकों को लगता है कि एक ईमानदार ग्राहक जो समय पर ईएमआई दे रहा है तो नौकरी दोबारा लगते ही सही स्थिति में सकता है। ऐसे में उस ग्राहक को अपने साथ बनाए रखने के लिए बैंक कुछ रियायत देने को तैयार हो जाते हैं।

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