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उदारीकरण के 30 साल: मुकेश अंबानी ने बताया, कब तक चीन-US को टक्कर देगा भारत

लाइव हिन्दुस्तान,नई दिल्लीPublished By: Deepak Kumar
Sat, 24 Jul 2021 06:48 PM
उदारीकरण के 30 साल: मुकेश अंबानी ने बताया, कब तक चीन-US को टक्कर देगा भारत

देश के सबसे अमीर कारोबारी मुकेश अंबानी ने भरोसा जताया है कि 2047 तक देश की इकोनॉमी अमेरिका और चीन के बराबर पहुंच सकती है। देश में आर्थिक उदारीकरण के 30 साल के पूरे होने के मौके पर मुकेश अंबानी ने एक लेख में ये बात कही है।  

क्या कहा अंबानी ने: मुकेश अंबानी का मानना है कि भारत में तीन दशक के आर्थिक सुधारों का नागरिकों को मिला लाभ ‘असमान’ रहा है। उन्होंने कहा कि समाज के सबसे निचले स्तर पर संपत्ति के सृजन के लिए विकास का ‘भारतीय मॉडल’ जरूरी है। अंबानी ने कहा कि साहसी आर्थिक सुधारों की वजह से 1991 में जो हमारा सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) 266 अरब डॉलर था, आज यह दस गुना बढ़ चुका है। अंबानी ने लिखा है कि भारत ने 1991 में अर्थव्यवस्था की दिशा और निर्धारण दोनों को बदलने की दूरदृष्टि और साहस दिखाया।

लाइसेंस-कोटा राज समाप्त हुआ: उन्होंने कहा, ‘‘सरकार ने निजी क्षेत्र को भी राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था में प्रभावशाली ऊंचाई पर रखा। इससे पिछले चार दशकों में यह स्थान सिर्फ सार्वजनिक क्षेत्र को हासिल था। इससे लाइसेंस-कोटा राज समाप्त हुआ, व्यापार और औद्योगिक नीतियां उदार हुईं।’’अंबानी ने कहा कि इन सुधारों से भारत दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन सका। हालांकि, इस दौरान आबादी 88 करोड़ से 138 करोड़ हो गई, लेकिन गरीबी की दर आधी रह गई। 

अंबानी ने कहा, ‘‘महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचा हमारी सोच से कहीं अधिक सुधरा है। अब हमारे एक्सप्रेसवे, हवाईअड्डे और बंदरगाह विश्वस्तरीय हैं। कुछ ऐसा ही हमारे उद्योगों और सेवाओं के साथ है।’’

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अमेरिका और चीन के बराबर: उन्होंने लिखा है, ‘‘अब यह अकल्पनीय लगेगा कि लोगों को टेलीफोन या गैस कनेक्शनों के लिए इंतजार करना पड़ता था। या फिर कंपनियों को कंप्यूटर खरीदने के लिए सरकार की मंजूरी लेनी होती थी। ’’उन्होंने कहा कि 2047 में हम अपनी आजादी के सौ साल का जश्न मनाएंगे। इससे बड़ा सपना और क्या होगा कि उस समय तक हम भारत को दुनिया के तीन सबसे अमीर देशों में से एक बनाने में सक्षम होंगे। हम अमेरिका और चीन के समकक्ष होंगे।

अंबानी ने कहा कि आगे का रास्ता आसान नहीं है लेकिन हमें महामारी जैसी अचानक आने वाली अस्थायी समस्याओं से घबराना नहीं है। न ही गैर-महत्वपूर्ण मुद्दों की वजह से अपना ध्यान भटकाना है। 

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