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17 अक्तूबर, 2020|5:59|IST

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लोन पुनर्गठन कराने से आम लोगों पर बढ़ेगा वित्तीय बोझ

25 हजार रुपये से कम के लोन को पुनर्गठन नहीं करेगा एसडीएफसी बैंक, 0.35 फीसदी अतिरिक्त ब्याज वसूलेगा लोन पुनर्गठन कराने वाले से एसबीआई

कोरोना महामारी के कारण वित्तीय संकट में आए कर्जदारों को लोन पुनर्गठन (रिस्ट्रक्चरिंग) कराने में शर्तों और शुल्क की दोहरी मार पड़ रही है। सेबी पंजीकृत निवेश सलाहकार जितेंद्र सोलंकी ने हिन्दुस्तान को बताया कि लोन पुनर्गठन कराना से आम लोगों पर वित्तीय बोझ बढ़ेगा। अगर संभव हो लोन पुनर्गठन नहीं कराकर ईएमआई का भुगतान भविष्य निधि फंड (पीएफ), सावधि जमा (एफडी) या गोल्ड लोन लेकर कर सकते हैं। आप पीएफ से कर्ज लेकर कम ब्याज पर लोन की ईएमआई चुका सकते हैं। बाद में आप पीएफ में वह पैसा जमा कर सकते हैं। या वीपीएफ खोलकर पीएफ में अधिक राशि मासिक जमा कर सकते हैं। इसी तरह आपके पास अगर एफडी है तो उसे तोड़कर लोन की ईमएआई दे सकते हैं। ऐसा कर आप अपने वित्तीय बोझ को कम कर सकते हैं। बाद में पैसा आने पर फिर से आप एफडी करा सकते हैं।

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क्या हो रही दिक्कतें

  • लोन पुणर्गठन कराने के लिए बैंकों ने सैलरी स्लिप, इनकम का डिक्लेरेशन, नौकरी जाने के मामले में डिस्चार्ज लेटर, अकाउंट का स्टेटमेंट आदि समेत कई दस्तावेज मांगे हैं। 
  • लोन मोरेटोरियम सुविधा 31 अगस्त खत्म होने के बाद आरबीआई के नए दिशानिर्देशों के अनुसार बैंक खुद नियम और शर्तें बनाकर कर्जदारों को लोन पुनर्गठन के लिए पेशकश कर रहे हैं। हर बैंक अपने अनुसार नियम बना रहे हैं। इससे कर्जदारों को दिक्कत का सामना करना पड़ रहा है।
  • सेंट्रल बैंक की वेबसाइट के अनुसार, वह अपने ग्राहकों से लोन पुनर्गठन के लिए एक हजार से 10 हजार रुपये चार्ज करेगा।
  • निजी क्षेत्र के सबसे बड़े बैंक एचडीएफसी ने भी कहा कि वह भी लोन पुनर्गठन कराने वाले ग्राहकों से शुल्क वसूलेगा। इसके साथ है बैंक ने कहा कि वह 25000 से नीचे के लोन का पुनर्गठन नहीं करेगा।
  • भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) ने लोन पुनर्गठन पर 0.35 फीसदी अधिक ब्याज वूसलेगा। 

ऐसे में क्या करें

लोन पुनर्गठन कराने में अतिरिक्त ब्याज लागत के साथ-साथ लोन अवधि के संभावित विस्तार पर भी ध्यान दें। अगर आप नौकरीपेशा हैं और रिटायरमेंट के करीब हैं तो लोन पुनर्गठन विकल्प से लोन चुकाने की अवधि में संभावित विस्तार बेहद जोखिमभरा हो सकता है। ऐसा इसलिए क्योंकि पुनर्गठन लोन की अवधि आपके रिटायरमेंट के बाद के सालों तक जाएगी, जहां आपकी आय के माध्यम कम होंगे। इसलिए फैसला लेने से पहले लोन की बढ़ी हुई अवधि में रिपेमेंट की संभावना का आकलन जरूर कर लें।

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बता दें  सुप्रीम कोर्ट में बैंकों द्वारा छह महीने की मोरेटोरियम अवधि के दौरान ब्याज पर ब्याज वसूलने के फैसले पर सुनवाई हो रही है। बैंकों ने कर्जदारों से ब्याज पर ब्याज नहीं वसूलने के लिए केंद्र सरकार से विचार करने को कहा है। अभी इस पर फैसला आना बाकी है। बैंकिंग विशेषज्ञ अश्विनी राणा ने हिन्दुस्तान को बताया कि कोरोना संकट के बीच बैंकों द्वारा पहले से दिए गए लोन को पुनर्गठन करने के लिए प्रोसेसिंग शुल्क और अधिक ब्याज वसूलना बिल्कुल गलत है। इससे आम लोगों पर वित्तीय बोझ बढ़ेगा जिससे उनकी माली हालात और खराब होगी। सरकार और भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) को इस मामले में तत्काल दखल देकर आम लोगों को राहत देने की व्यवस्था करनी चाहिए। ऐसा नहीं करने से स्थिति और खराब होगी।

 

 

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  • Web Title:Restructuring loan will increase financial burden on common people