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आरबीआई गवर्नर का निर्देश, सस्ते कर्ज के लिए बैंक रेपो प्लान लागू करें

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आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास ने ग्राहकों को सस्ता कर्ज देने के लिए बैंकों से रेपो दर आधारित योजना अपनाने को कहा है। दास ने सोमवार को कहा कि बैंक इसका लाभ आम जनता तक पहुंचाएं। आने वाले कुछ हफ्ते में केंद्रीय बैंक जरूरी होगा तो इसके लिए कदम भी उठाएगा।

आरबीआई गवर्नर ने इंडियन बैंक्स एसोसिएशनके कार्यक्रम में कहा कि सिर्फ मौद्रिक नीति में ब्याज दर घटाना पर्याप्त नहीं होगा, जब तक कि बैंकों द्वारा इस ब्याज दर को अपनाया न जाए। दिसंबर 2018 में आरबीआई ने संकेत दिया था कि एक अप्रैल से वह बैंकों की होम लोन, ऑटो लोन और अन्य कर्ज की दरों को रेपो दर से जोड़ने के लिए दिशानिर्देश जारी करेगा। लेकिन बैंकों के कड़े ऐतराज के बाद  यह टल गया। एसबीआई ने होम लोन, ऑटो लोन के पुराने ग्राहकों को भी रेपो दर आधारित प्लान की पेशकश करने पर विचार कर रहा है। इससे उन ग्राहकों की ईएमआई में काफी कमी आना तय है।

शीर्ष 50 एनबीएफसी को डूबने नहीं देंगे : रिजर्व बैंक के गवर्नर दोहराया कि किसी भी बड़ी गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनी (एनबीएफसी) को डूबने नहीं दिया जाएगा। उन्होंने बड़ी एनबीएफसी कंपनियों की परिसंपत्ति गुणवत्ता की समीक्षा से इन्कार किया और कहा कि नियामक शीर्ष 50 एनबीएफसी कंपनियों को डूबने नहीं देगा।  आईएलएंडएफएस संकट के बाद से 12,000 से ज्यादा एनबीएफसी और उनकी आवास वित्त सहयोगी कंपनियों को पूंजी से जुड़ी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। इन कंपनियों का ऋण बाजार के एक चौथाई हिस्से पर नियंत्रण है।

रेपो दर में ग्राहकों को ज्यादा लाभ
आरबीआई गवर्नर ने रेपो दर में कमी का लाभ ग्राहकों को देने को कहा है, लेकिन रेपो रेट आधारित कर्ज दरों का यह मतलब नहीं है कि होम या अन्य लोन की दर रेपो दर के बराबर हो जाएगी। रिजर्व बैंक द्वारा बैंकों को कम अवधि के लिए दी जाने वाली रकम पर तय ब्याज को रेपो दर (आरएलएलआर) कहते हैं। रेपो दर अभी 5.40% है। कर्ज की दर रेपो रेट से कम से कम 2.25% ज्यादा होती है। इसको जोड़कर आरएलएलआर 7.65% हो जाती है। इसके ऊपर बैंक लागत के अनुसार 0.40 से 0.55 फीसदी का प्रीमियम लगाते हैं, फिर भी यह मौजूदा दर से कम होती है। 

अवसरों पर ध्यान दें, निराशा का राग छोड़ें
दास ने माना कि अर्थव्यवस्था की गति धीमी पड़ रही है और आंतरिक और बाहरी स्तर पर कई चुनौतियां हैं। उन्होंने सभी को निराशा के राग में सुर से सुर मिलाने की जगह आगे के अवसरों को देखने की सलाह दी। दास का यह वक्तव्य ऐसे समय आया है जब बड़े कारोबारी निराशाजनक प्रतिक्रिया दे रहे हैं।

अभी ये व्यवस्था लागू
बैंकों के फ्लोटिंग रेट पर जितने  लोन चल रहे हैं, वे सीमांत लागत कोष की दरों (एमसीएलआर) पर आधारित होते हैं। एमसीएलआर न्यूनतम कर्ज दर सीमा है और बैंक इसमें लागत को जोड़कर अभी होम लोन, ऑटो लोन आदि की पेशकश करते हैं। इस बार रेपो दर में आरबीआई ने 0.35 फीसदी की कटौती की है, लेकिन बैंकों ने 0.15 से 0.20 फीसदी तक ही कर्ज सस्ता किया है। ऐसे में कटौती का पूरा लाभ ग्राहकों को नहीं मिला। 

* 0.15 से 0.25 फीसदी सस्ता है रेपो रेट लिंक्ड प्लान अभी।
* 1.10 फीसदी की कटौती की आरबीआई ने फरवरी से अगस्त में।
* 0.35 से 0.55%ब्याज दर ही घटाई बैंकों ने।

ये बैंक योजना से जुड़े
एसबीआई
बैंक ऑफ बड़ौदा
सिंडिकेट बैंक
आंध्र बैंक
केनरा बैंक
इंडियन बैंक
इलाहाबाद बैंक
बैंक ऑफ इंडिया 
यूनियन बैंक 

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  • Web Title:Reserve Bank of India Governor Shaktikanta Das Ask Bank For Repo Plan