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रिलायंस रिटेल के साथ हाथ मिला सकती है अलीबाबा!

अनिरुद्ध लस्कर, मुंबईGovind
Tue, 21 Aug 2018 10:52 PM
रिलायंस रिटेल के साथ हाथ मिला सकती है अलीबाबा!

चीन की अलीबाबा ग्रुप होल्डिंग लिमिटेड ने मुकेश अंबानी के रिलायंस रिटेल लिमिटेड के साथ मेगा इंडियन रिटेल संयुक्त उद्यम बनाने के लिए वार्ता शुरू की है। मिंट अखबार के मुताबिक इस मामले की सीधी जानकारी रखने वाले दो व्यक्तियों ने बताया कि फ्लिपकार्ट और अमेजन के प्रभुत्व को दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था में चुनौती देने के लिए कम से कम 5 बिलियन डॉलर के निवेश के साथ संयुक्त उद्मम शुरू करने की तैयारी है। नाम ना छापने की शर्त पर दो व्यक्तियों ने बताया कि अलीबाबा ग्रुप ने विशालकाय डिजिटल मार्केटप्लेस में रिलायंस रिटेल में बड़ी हिस्सेदारी का प्रस्ताव रखा है। इसके अलावा भारत में अलीबाबा खुदरा कारोबार भी विस्तार करने जा रही है।

बाजार में बड़ी हिस्सेदारी रखने वाले इन दोनों कंपनियों के साथ आने से संकेत मिल रहे हैं कि भारत के उभरते ई-कॉमर्स बाजार की लड़ाई तेज होगी। हालांकि रिलायंस के एक प्रवक्ता ने कहा कि रिलायंस रिटेल लिमिटेड में हिस्सेदारी हासिल करने के लिए अलीबाबा या किसी और के साथ कोई चर्चा नहीं हुई है।

दोनों व्यक्तियों के अनुसार अलीबाबा के कार्यकारी अध्यक्ष जैक मा ने रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड के चेयरमैन मुकेश अंबानी से हाल ही में प्रस्ताव पर चर्चा करने के लिए मुलाकात की। उन्होंने बताया कि दोनों ने प्रस्तावित संयुक्त उद्मम के माध्यम से मल्टी चैनल रिटेल बनाने की योजना सहित कई मुद्दों पर चर्चा की है। मल्टी चैनल रिटेल खरीदारों को ऑनलाइन और ऑफलाइन स्टोर्स से आसान खरीदारी की सुविधा प्रदान करता है। 
 
इस मामले की जानकारी रखने वाले दो लोगों में से एक ने बताया कि अलीबाबा रिलायंस रिटेल में एक महत्वपूर्ण हिस्सेदारी लेने के लिए इच्छुक है। अलीबाबा कम से कम 50 फीसदी हिस्सेदारी लेने और 5 से 6 अरब डॉलर निवेश करने की योजना में है। अलीबाबा और रिलायंस रिटेल के बीच रणनीतिक संयुक्त उद्मम हो सकता है जिसमें अलीबाबा की छोटी हिस्सेदारी हो।
 
जानकारी रखने वाले एक अन्य व्यक्ति ने बताया कि गोल्डमैन सॉक्स अलीबाबा को प्रस्तावित उद्मम की सलाह दे रहा है। गोल्डमैन सॉक्स के प्रवक्ता ने इस पर टिप्पणी करने से इंकार कर दिया है। इस बाबत रिलायंस और अलीबाबा को भेजे ईमेल का अभी कोई जवाब नहीं आया है। 

यदि संयुक्त उद्मम होता है तो यह अलीबाबा का किसी भी भारतीय कंपनी में सबसे बड़ा निवेश होगा। 

मामले की जानकारी रखने वाले दूसरे व्यक्ति ने कहा, "यह समझौता अलीबाबा के लिए महत्वपूर्ण है, खासतौर पर भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने पेटीएम को शेयरहोल्डिंग पैटर्न के कारण नए कस्टमर बनाने से रोक दिया है। पेटीएम में अलीबाबा की 49 फीसदी हिस्सेदारी है। आरबीआई को इस बात चिंता है कि चीनी कंपनी के पास पेटीएम के ग्राहक डेटा की पहुंच है। आरबीआई ने पेटीएम को ग्राहक डेटा के सुरक्षा तंत्र में सुधार करने के लिए कहा है।

दूसरे व्यक्ति ने कहा, "अलीबाबा ने पेटीएम के सफल ई-कॉमर्स और डिजिटल वॉलेट बिजनेस से लाभान्वित होने के उद्देश्य से पेटीएम में हिस्सेदारी उठाई थी। रिलायंस रिटेल पेटीएम की तरह ही एक मॉडल की योजना बना रहा है। अगर ऐसा हुआ तो अलीबाबा को उसी तरह लाभ होगा जिस तरह से वह पेटीएम के साथ अपने सहयोग से प्राप्त कर रहा था। 

अलीबाबा की ताओबाओ और टीमॉल दुनिया में ऑनलाइन शॉपिंग के दो बड़े मंच हैं। इनका वर्ष 2016 में कारोबार 479 अरब डॉलर रहा है और उम्मीद है कि 2020 तक दोनों कंपनियों का कारोबार 900 अरब डॉलर से अधिक हो जाएगा। ताओबाओ के 58 करोड़ और टीमॉल के 50 करोड़ से ज्यादा मासिक सक्रिय यूजर हैं। दोनों दुनिया की 20 सबसे ज्यादा देखी जाने वाली वेबसाइटों में हैं। 

अलीबाबा ने यह भी घोषणा की है कि वह अगले पांच सालों में ग्लोबल लॉजिस्टिक नेटवर्क बनाने के लिए 100 अरब युआन निवेश करेगी। 

रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड की एक इकाई रिलायंस रिटेल राजस्व के मामले में भारत का सबसे बड़ा खुदरा विक्रेता है। इसके खुदरा दुकानों में भोजन, किराने का सामान, परिधान, जीवन शैली और गृह देखभाल उत्पादों, उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स, कृषि उपकरण आदि शामिल हैं। कंपनी उपभोक्ता वस्तुओं, उपभोक्ता टिकाऊ वस्तुओं, यात्रा सेवाओं, मनोरंजन उत्पादों के अलावा सब्जियां, फल और फूल भी बेचती है।

31 मार्च को समाप्त हुए वित्तीय वर्ष में रिलायंस रिटेल का लाभ 2,529 करोड़ रुपये हो गया। कंपनी की एक विज्ञप्ति के मुताबिक 30 जून को रिलायंस रिटेल कम से कम 5,200 कस्बों और शहरों में मौजूद था, जिसमें 8,533 स्टोर्स शामिल है, जिसमें 4,530 जियो पॉइंट शामिल है।

रिलायंस रिटेल, जो 10 बिलियन डॉलर के राजस्व को पार चुका है, अपने खुदरा कारोबार का विस्तार करने की योजना बना रहा है। रिलायंस रिटेल अपनी पैरेंट कंपनी की दूरसंचार इकाई रिलायंस जियो इन्फोकॉम लिमिटेड के नेटवर्क का लाभ उठा रहा है।

रिलायंस रिटेल के पास विदेशी ऑनलाइन खुदरा विक्रेताओं पर बढ़त है, क्योंकि विदेशी संस्थाओं को भारत में सूची रखने की अनुमति नहीं है और केवल बाजार के रूप में ही काम कर सकते हैं। अमेजन किसी भी जटिलताओं से बचने के लिए अप्रत्यक्ष मार्ग ले रहा है और बहु-ब्रांड एफडीआई मानदंडों के तहत कई स्थितियों का अनुपालन कर सकता है।

अलीबाबा रिलायंस और दूसरे अन्य संभावित पाटनर्स से उस समय बातचीत कर रही है जब आरबीआई ने वीजा, मास्टरकार्ड जैसे पैमेंट्स बैंक को अक्टूबर तक सिर्फ भारत में ही डेटा स्टोर करने को कहा है।

एडिटर नोट: इस आर्टिकल को रिलायंस की प्रतिक्रिया के बाद संशोधित किया गया है। 

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