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घर मिलने की राह आसान होगी, अटके प्रोजेक्ट को पूरा करने के लिए मिल सकती है वित्तीय मदद

देशभर में अटकी अवासीय परियोजनाओं में फ्लैट खरीदने वाले लाखों घर खरीदारों को इस हफ्ते वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से बड़ी राहत मिल सकती है। सूत्रों का कहना है कि रियल एस्टेट कंपनियों की नकदी किल्लत दूर करने और घर खरीदारों को उनका घर दिलाने के लिए इस हफ्ते वित्तीय मदद (स्ट्रेस फंड) की घोषणा हो सकती है।

इसके साथ ही निर्माणाधीन आवासीय परियोजना पर लगने वाले जीएसटी में बदलाव की भी संभावना है। सूत्रों ने बताया कि जीएसटी परिषद ने निर्माणाधीन घरों पर जीएसटी घटाकर 12 से पांच फीसदी कर दिया था। साथ ही किफायती आवास परियोजनाओं पर जीएसटी आठ से घटाकर एक फीसदी कर दिया था। हालांकि इसके साथ इनपुट टैक्स क्रेडिट की व्यवस्था भी खत्म कर दी गई थी।

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इससे डेवलपर पर निर्माण की लागत बढ़ गई  थी। वह इसका बोझ घर खरीदारों पर डालने लगे थे। हाल ही में वित्त मंत्री के साथ घर खरीदारों के प्रतिनिधियों ने मुलाकात के दौरान इस मुद्दे को उठाया था। इसको देखते हुए निर्माणाधीन परियोजना पर जीएसटी दर में बदलाव करने की तैयारी है।

मामले से जुड़े सूत्रों का कहना है कि निर्माणाधीन आवासीय परियोजना पर जीएसटी की दर पांच फीसदी से बढ़ाकर आठ फीसदी की जा सकती है। लेकिन इनपुट क्रेडिट का लाभ फिर से दिया जाएगा। इससे परियोजना की निर्माण लागत में कमी आएगी। इसका फायदा डेवलपर घर खरीदारों को देंगे।

नकदी किल्लत दूर करना जरूरी : अंतरिक्ष इंडिया ग्रुप के सीएमडी राकेश यादव ने बताया कि सैकड़ो प्रोजेक्ट का काम नकदी संकट से रुका पड़ा या बहुत धीमी गति से आगे बढ़ रहा है। इससे रियल एस्टेट कंपनियों और घर खरीदारों दोनों का नुकसान हो रहा है। फंड की कमी से डेवलपर प्रोजेक्ट का काम पूरा नहीं पा रहे हैं। अगर इस सेक्टर में नकदी की समस्या दूर होती है तो घर खरीदारों को घर मिलने का रास्ता साफ हो जाएगा।

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सस्ते कर्ज से बढ़ेगी मांग : वित्त मंत्री ने आवास वित्त कंपनियों को 20 हजार करोड़ रुपये अतिरिक्त देने की घोषणा की है। वहीं बैंकों को कर्ज रेपो रेट से जोड़ने को कहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि इससे कर्ज की उपलब्धता बढ़ेगी और लोन की ईएमआई घटेगी। 

* 220 प्रोजेक्ट में 1.74 लाख घर सात बड़े शहरों में अटके।
* 1.18 लाख फ्लैट अटके हुए हैं सिर्फ एनसीआर में।
* 1774 अरब कीमत है अटके प्रोजेक्ट की।
* 2022 तक सभी को घर देने का लक्ष्य है सरकार का।

28% घटी है घरों की बिक्री
ब्रोकरेज कंपनी एनारॉक की एक रिपोर्ट के अनुसार, पिछले पांच साल के दौरान घरों के दाम में सात फीसदी का मामूली इजाफा हुआ है, जबकि इस दौरान इनकी मांग 28 फीसदी घटी है। इसी तरह घरों की आपूर्ति में इस दौरान 64 प्रतिशत की गिरावट आई है।

इसलिए आई रियल एस्टेट में मंदी
प्रॉपर्टी विशेषज्ञ प्रदीप मिश्रा ने बताया कि इस सेक्टर में मंदी आने की वजह आपूर्ति बढ़ना और मांग में कमी आना है। 2012 में कई डेवलपर ने अपनी वित्तीय स्थिति को आंके बिना कई प्रोजेक्ट एक साथ लॉन्च किए बाद में उसे पूरा नहीं कर पाए। इससे खरीदारों का विश्वास डोला और बिक्री गिर गई। 

पांच लाख घर खरीदार प्रभावित
फोरम फॉर पीपुल्स कलेक्टिव एफर्ट्स के अनुसार, प्रॉजेक्ट्स में देरी से देशभर में पांच लाख से अधिक घर खरीदार प्रभावित हैं। सबसे ज्यादा एनसीआर के हैं। 

अर्थव्यवस्था पर अच्छा असर
नारेडको अध्यक्ष निरंजन हीरानंदानी का कहना है कि रियल्टी पर करों को तर्कसंगत बनाने और नकदी संकट दूर करने से अर्थव्यवस्था पर सकारात्मक असर पड़ेगा।

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  • Web Title:Real Estate Company Gets Financial Help For Complete His Project