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आरबीआई ने प्राथमिक क्षेत्र के कर्ज नियमों में किया बदलाव

RBI

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने मंगलवार को कहा कि पंजीकृत एनबीएफसी (म्यूचुअल फंड को छोड़कर) कंपनियां की ओर से कृषि , सूक्ष्म एवं छोटे उद्यम और आवास क्षेत्र को निर्धारित दायरे में दिए गए कर्ज को प्राथमिक क्षेत्र के कर्ज के रूप में माना जाएगा। रिजर्व बैंक ने कहा कि इन क्षेत्रों के उधारदाताओं को कर्ज देने में तेजी लाने के लिए यह कदम उठाया गया है। 

संशोधित नियमों के मुताबिक , एनबीएफसी कंपनियां की कृषि क्षेत्र  के लिए सीमा 10 लाख रुपये प्रति कर्जदार होगी। सूक्ष्म एवं लघु उद्यमों के मामले में यह सीमा 20 लाख रुपये होगी। आवास क्षेत्र के लिए सीमा को बढ़ाकर 10 लाख रुपये से 20 लाख रुपये किया गया है। इस कर्ज को प्राथमिकता वाला कर्ज माना जाएगा।

आवास वित्त कंपनियों को NBFC के रूप में माना जाएगा, RBI के दायरे में आएंगी

वहीं दूसरी ओर, भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने मंगलवार को कहा कि आवास वित्त कंपनियों (एचएफसी) को नियामकीय उद्देश्यों के लिए गैर वित्तीय बैंकिंग कंपनी (एनबीएफसी) की एक श्रेणी के रूप में माना जाएगा। ये कपनियां सीधे उसकी निगरानी में आएंगी। बैंक ने विज्ञप्ति में कहा कि वित्त (नंबर दो) अधिनियम 2019 के तहत राष्ट्रीय आवास बैंक अधिनियम 1987 में संशोधन किया गया है।

केंद्र सरकार की ओर से जारी अधिसूचना के बाद रिजर्व बैंक का यह निर्देश आया है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने अपने पहले बजट 2019-20 के भाषण में घोषणा की थी कि राष्ट्रीय आवास बैंक (एनएचबी) आवास वित्त कंपनी के नियामक के रूप में काम नहीं करेगा।

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  • Web Title:RBI tweaks norms for priority sector lending