RBI names Infosys co founder Nandan Nilekani as head of panel on digital payments - डिजिटल भुगतान बढ़ाने में नंदन नीलेकणि की सेवाएं लेगा आरबीआई DA Image
13 नबम्बर, 2019|5:47|IST

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डिजिटल भुगतान बढ़ाने में नंदन नीलेकणि की सेवाएं लेगा आरबीआई

01 September 2016, Bangalore: Nandan Nilekani at BetterPlace office. For Deepti’s story. Photo by he

भारतीय रिजर्व बैंक ने डिजिटल भुगतान तथा डिजिटल माध्यम से वित्तीय समावेशन को बढ़ावा देने के लिए भारतीय विशिष्ट पहचान संख्या प्राधिकरण (आधार) के पूर्व अध्यक्ष नंदन नीलेकणि की अध्यक्षता में समिति बनाई है। 

केन्द्रीय बैंक ने मंगलवार को यहां जारी बयान में कहा कि समिति को अपनी पहली बैठक के बाद 90 दिनों में रिपोर्ट देनी होगी। रिजर्व बैंक ने एक बयान में बताया कि इस समिति में पांच सदस्य होंगे। नीलेकणि की अध्यक्षता वाली समिति में रिजर्व बैंक के पूर्व डिप्टी गवर्नर एसआर खान, विजया बैंक के पूर्व प्रबंध निदेशक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी किशोर सांसी, सूचना प्रौद्योगिकी विभाग की पूर्व सचिव अरुणा शर्मा और आईआईएम अहमदाबाद के सेंटर फार इन्नोवेशन, इनक्युबेशन एंड इंटरप्रेन्योरशिप के मुख्य इन्नोवेशन अधिकारी संजय जैन सदस्य बनाए गए हैं।

समिति का काम देश में डिजिटल भुगतान की मौजूदा स्थिति की समीक्षा, व्यवस्था में कमियों की पहचान और उन्हें ठीक के करने के लिए सुझाव देना होगा। साथ ही समिति डिजिटल भुगतान की सुरक्षा से जुड़े सुझाव भी देगी। समिति को देश में भुगतान के डिजिटलीकरण, वर्तमान तंत्र में डिजिटल भुगतान में अंतर को दूर करने के उपाय भी बताने होंगे। हालांकि सरकार ने डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने के लिए कई तरह के छूट का प्रावधान किया है, पर इस क्षेत्र में ज्यादा प्रगति नहीं हुई है। 

आधार अमली जामा पहनाया 
लंबे समय तक आईटी कंपनी इन्फोसिस को सेवा देने वाले नंदन नीलेकणि  2009 में केंद्र सरकार के भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण यूआईडीएआई के प्रमुख बनाए गए।  उन्हें ही भारत सरकार की आधार कार्ड जैसी योजना को अमलीजामा पहनाने का श्रेय जाता है। नीलेकणि मार्च 2002 से अप्रैल 2007 तक इन्फोसिस के मुख्य कार्यकारी अधिकारी थे। वह 2014 में कांग्रेस के टिकट पर बंगलुरु की साउथ सीट से लोकसभा चुनाव लड़े थे हालांकि उन्हें जीत नहीं मिली। 

नोटबंदी के बाद बढ़ा डिजिटल लेनदेन
अक्तूबर 2016 में 108.7 लाख करोड़ रुपये के डिजिटल लेनदेन हुए थे, जबकि अगस्त 2018 में ये आंकड़ा 88 प्रतिशत बढ़कर 204.86 लाख करोड़ रुपये हो गया। नोटबंदी के बाद से अब तक डिजिटल लेनदेन में लगभग तीन गुना इजाफा हुआ। अक्तूबर 2018 में भीम और यूपीआई आधारित लेन-देन की संख्या बढ़कर 48.2 करोड़ हो गई, जबकि इसका मूल्य बढ़कर 74,978.2 करोड रुपये हो गया। 

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