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18 अक्तूबर, 2020|10:54|IST

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क्या और कम होगी आपकी EMI? आरबीआई मौद्रिक समीक्षा बैठक में घटा सकता है ब्याज दरें

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रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) की बैठक 29 सितंबर को शुरू हो रही है। रिजर्व बैंक के गवर्नर शक्तिकातं दास के नेतृत्व वाली इस समिति की तीन दिन तक चलने वाली बैठक में दरों में बदलाव पर फैसला होगा। बैठक के नतीजों की घोषणा एक अक्तूबर को की जाएगी। विशेषज्ञों का कहना है कि अर्थव्यवस्था को रफ्तार देने और उपभोक्ता मांग बढ़ाने के लिए इस बार नीतिगत दरों में 0.25 की कटौती की उम्मीद है। हालांकि, खुदरा महंगाई में तेज वृद्धि रिजर्व बैंक की राह में सबसे बड़ा रोड़ा बन सकती है।

रिजर्व बैंक के गवर्नर शक्तिकान्त ने इससे पहले कहा था कि आगे और मौद्रिक कार्रवाई की गुंजाइश है, लेकिन हमें अपने 'हथियारों का इस्तेमाल समझदारी से करना होगा। अगस्त में एमपीसी की पिछली बैठक में रिजर्व बैंक ने मुद्रास्फीति में वृद्धि को रोकने के लिए नीतिगत दरों में बदलाव नहीं किया था। हाल के समय में मुद्रास्फीति छह प्रतिशत को पार कर गई। उस समय रिजर्व बैंक ने कहा था कि महामारी की वजह से अर्थव्यवस्था की स्थिति काफी कमजोर है। फरवरी से रिजर्व बैंक नीतिगत दरों में 1.15 प्रतिशत की कटौती कर चुका है। हाल ही में शक्तिकांत दास ने कहा था कि अर्थव्यवस्था में सुधार के लिए हर कदम उठाने को तैयार हैं। विशेषज्ञ इसे दरों में कटौती का संकेत मानकर चल रहे हैं।

कटौती की उम्मीद क्यों

पहली तिमाही में जीडीपी वृद्धि दर 23.9 फीसदी घटी है। ऐसे में रिजर्व बैंक पर अर्थव्यवस्था को गति देने का दबाव होगा। वहीं विशेषज्ञों का कहना है कि उपभोक्ता मांग रिजर्व बैंक के उम्मीद के मुताबिक अभी तक नहीं बढ़ी है। उनका कहना है कि त्योहारों से पहले कर्ज सस्ता होने से उपभोक्ता मांग तेज हो सकती है। इससे उपभोक्ता और कंपनियों को फायदा होने के साथ अर्थव्यवस्था को भी लाभ मिलेगा। विशेषज्ञों का कहना है कि दरों में कटौती से त्योहारों पर कर्ज सस्ता होने से वाहन और इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पाद की मांग में तेजी आने से रोजगार के अवसर भी बढ़ सकते हैं।

रिजर्व बैंक की चुनौतियां

खुदरा महंगाई छह फीसदी से ऊपर होने से आरबीआई के लिए दरें घटाने का फैसला करना मुश्किल हो सकता है। करोना के प्रसार को देखते हुए सस्ते कर्ज के बावजूद उपभोक्ता कर्ज लेने से परहेज कर रहे हैं। ऐसे में रिजर्व बैंक दूसरे विकल्पों को तरजीह दे सकता है।

एसौचैम-एनरॉक को कटौती की आस
उद्योग मंडल एसोचैम के महासचिव दीपक सूद ने कहा कि कोविड-19 महामारी की वजह से अर्थव्यवस्था में गिरावट के मद्देनजर रिजर्व बैंक को अपने नरम रुख को जारी रखना चाहिए। एनारॉक प्रापर्टी कंसल्टेंट्स के चेयरमैन अनुज पुरी ने कहा कि इस सप्ताह एमपीसी के समक्ष ब्याज दरें घटाने या यथावत रखने को लेकर असमंजस रहेगा। उन्होंने कहा कि इस साल महामारी की वजह से भारतीय अर्थव्यवस्था में बड़ी गिरावट आएगी। ऐसे में निश्चित रूप से ऐसी उम्मीदें लगाई जा रही हैं कि ब्याज दरों में कटौती होगी।

दरों में कटौती पर असमंजसः सीआईआई

भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) ने कहा, ''रिजर्व बैंक को अपने नरम रुख को जारी रखना चाहिए। वृद्धि को समर्थन महत्वपूर्ण है, लेकिन रिजर्व बैंक को मुद्रास्फीति में कुछ कमी आने का इंतजार करना चाहिए। यूनियन बैंक के प्रबंध निदेशक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी राजकिरण राय जी ने कहा, रिजर्व बैंक यथास्थिति बरकरार रखेगा। मुद्रास्फीति इतनी ऊंची होने की वजह से मुझे इस बार ब्याज दरों में कटौती की उम्मीद नहीं दिखती। इक्रा की प्रमुख अर्थशास्त्री अदिति नायर ने कहा कि सितंबर में मुद्रास्फीति और बढ़ेगी। उसके बाद अगले कुछ महीनों तक यह नीचे रहेगी। नायर ने कहा कि हमारा अनुमान है कि रिजर्व बैंक इस बार ब्याय दरों को यथावत रखेगा। केयर रेटिंग्स के मुख्य अर्थशास्त्री मदन सबनवीस ने कहा कि रिजर्व बैंक के रुख, रेपो दर या सीआरआर में कोई बदलाव नहीं होगा।
 

रिजर्व बैंक मौद्रिक समीक्षा में ब्याज दरों में बदलाव करेगा या नहीं, जानें एक्सपर्ट की राय

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  • Web Title:RBI may cut repo rate in monetary policy meeting