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हिंदी न्यूज़ बिजनेसछोटे निवेशकों को नहीं भा रहा आरबीआई का डायरेक्ट प्लान, छह महीने में सिर्फ 96 करोड़ के सरकारी बॉन्ड बिके

छोटे निवेशकों को नहीं भा रहा आरबीआई का डायरेक्ट प्लान, छह महीने में सिर्फ 96 करोड़ के सरकारी बॉन्ड बिके

RTI के तहत मिले जवाब के मुताबिक नवंबर में लॉन्च होने से लेकर अप्रैल के अंत तक इस योजना में कुल 73,713 पंजीकरण हुए। पंजीकरण की सबसे अधिक संख्या 45,847, पहले महीने में हुई और तब से इसमें गिरावट जारी है।

छोटे निवेशकों को नहीं भा रहा आरबीआई का डायरेक्ट प्लान, छह महीने में सिर्फ 96 करोड़ के सरकारी बॉन्ड बिके
Tarun Singhशायन घोष,नई दिल्लीThu, 26 May 2022 08:35 AM

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भारतीय रिजर्व बैंक की ओर से बॉन्ड में खुदरा निवेशकों को सीधे निवेश की सुविधा (डायरेक्ट प्लान) को लेकर ग्राहकों में ज्यादा उत्साह नहीं है। आरबीआई के आंकड़ों के मुताबिक इस योजना के पहले छह महीनों में मात्र ₹96 करोड़ के सरकारी बॉन्ड खरीदे गए हैं।

सूचना के अधिकार के तहत मिले जवाब के मुताबिक नवंबर में लॉन्च होने से लेकर अप्रैल के अंत तक इस योजना में कुल 73,713 पंजीकरण हुए। पंजीकरण की सबसे अधिक संख्या, 45,847, पहले महीने में हुई और तब से इसमें गिरावट जारी है। इस साल अप्रैल में केवल 3,590 पंजीकरण हुए। विशेषज्ञों का कहना है कि खुदरा निवेशकों के बीच न केवल सरकारी प्रतिभूतियों बल्कि व्यापक बॉन्ड बाजार के बारे में समझ में गंभीर अंतर है। अन्य कारणों में कर प्रोत्साहन की कमी और अपर्याप्त जागरूकता कार्यक्रम भी शामिल हैं। 

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बैंकबाजार डॉट कॉम के मुख्य कार्यकारी अधिकारी आदिल शेट्टी ने कहा। कि सरकारी प्रतिभूतियों (जी-सेक) में प्रत्यक्ष निवेश एक नया विचार है, और अधिकांश खुदरा निवेशक अभी इसमें नहीं आ रहे हैं। इसके अलावा इसमें निवेश की प्रक्रिया भी इक्विटी की तरह सरल और निर्बाध नहीं है। हालांकि, शेट्टी को उम्मीद है कि समय के साथ ज्यादा से ज्यादा खुदरा निवेशक सीधे निवेश करेंगे, क्योंकि यह कई छोटी बचत योजनाओं की तुलना में अधिक रिटर्न के साथ-साथ पूंजी सुरक्षा प्रदान कर सकता है। 

इस योजना का उद्देश्य अधिक से अधिक लोगों को बॉन्ड बाजारों में लाना है, जिससे सरकार के उधार के अवसरों का विस्तार होता है। खुदरा निवेशक एक समर्पित वेबसाइट के माध्यम से ट्रेजरी बिल और सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड और विभिन्न राज्य सरकारों द्वारा जारी प्रतिभूतियों सहित सभी केंद्र सरकार की प्रतिभूतियों के प्राथमिक निर्गम में गैर-प्रतिस्पर्धी बोलियां लगा सकते हैं। साथ ही आरबीआई की ट्रेडिंग प्रणाली के माध्यम से द्वितीयक बाजार तक भी पहुंच सकते हैं।

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