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RBI ने बैंकों से कहा, Q4 नतीजों में IL&FS को दिये कर्ज का अलग से उल्लेख करें

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रिजर्व बैंक ने वाणिज्यिक बैंकों से कहा है कि वह चौथी तिमाही के परिणाम जारी करते हुए कर्ज संकट में फंसी आईएलएण्डएफएस को दिये गये कर्ज का अलग से उल्लेख करें। हालांकि, केन्द्रीय बैंक ने बैंकों में आईएलएण्डएफएस के कर्ज खाते को एनपीए वर्गीकृत करने पर लगाई गई रोक के फैसले की समीक्षा के लिये एनसीएलएटी में याचिका दायर की है। यह याचिका लंबित है।

ढांचागत क्षेत्र की कंपनियों को कर्ज देने वाली वित्तीय कंपनी आईएलएण्डएफएस के पूरे समूह की 348 कंपनियों पर कुल 94,000 करोड़ रुपये का कर्ज है जिसमें से 54,000 करोड़ रुपये से अधिक कर्ज बैंकों से लिया हुआ है। कंपनी पिछले साल अगस्त से लिये गये धन की वापसी में डिफाल्ट हो रही है। अक्टूबर में सरकार ने कंपनी के निदेशक मंडल को हटाकर बैंकर उदय कोटक की अध्यक्षता में नया निदेशक मंडल नियुक्त कर दिया।

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केन्द्रीय बैंक ने कहा कि उसका नया निर्देश राष्ट्रीय कंपनी विधि अपीलीय न्यायाधिकरण (एनसीएलएटी) के 25 फरवरी के आदेश के अनुरूप है। इस आदेश में एनसीएलएटी ने बैंकों को आईएलएण्डएफएस कंपनी और समूह को दिये गये कर्ज को एनपीए घोषित नहीं किये जाने को कहा है।

एनसीएलएटी ने अपने आदेश में कहा है कि कोई भी वित्तीय संस्थान उसकी अनुमति के बिना आईएलएण्डएफएस और इसकी इकाइयों के खातों को गैर-निष्पादित परिसंपत्ति यानी एनपीए घोषित नहीं करेगा। रिजर्व बैंक ने 19 मार्च को इस संबंध में समीक्षा याचिका दायर की है और इस पर निर्णय लंबित है। न्यायाधिकरण ने आरबीआई की मांग पर कारपोर्रेट कार्य मंत्रालय के विचार मांगे हैं।

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रिजर्व बैंक ने ताजा अधिसूचना में बैंकों से कहा है कि वह आईएलएण्डएफएस और उसकी समूह कंपनियों को दिये गये कर्ज को अपने लेखा-जोखा खाते में अलग से दिखायें। एक निश्चित तिथि को बैंकों को बकाये का उल्लेख करना होगा और सकल बकाया राशि जो कि संपत्ति वर्गीकरण नियमों के मुताबिक एनपीए हो चुकी है लेकिन उसे एनपीए के तौर पर वर्गीकृत नहीं किया गया है।

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  • Web Title:RBI asks banks to disclose ILFS provisions in Q4 accounts