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4 जुलाई, 2020|1:33|IST

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कोविड-19 महामारी से वेंटीलेटर पर रेडियो उद्योग, सरकार से पैकेज की दरकार

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1 / 2FM Raido (File Pic)

covid-19 impact radio industry on ventilator  needs a shot in the arm to survive

2 / 2COVID-19 IMPACT RADIO INDUSTRY ON VENTILATOR, NEEDS A SHOT IN THE ARM TO SURVIVE! (Photo Credit: Twitter)

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कोविड-19 महामारी से गंभीर रूप से प्रभावित होने वाले प्रमुख उद्योगों में से एक रेडियो उद्योग भी है। पहले से ही कम विज्ञापन की वजह से रेडियो कंपनियां दबाव में थीं, लेकिन इस महामारी में अब वो खुद को एक बड़े वित्तीय संकट में देख रही हैं। अप्रैल में रेडियो उद्योग का राजस्व 80% से अधिक नीचे था और मई में 90% तक कम होने का अनुमान है। वहीं  वित्त वर्ष 2020-21 के पहले दो महनों में ही 200 करोड़ रुपये के नुकसान का अनुमान है। इसकी वजह कामर्शियल और किसी भी सरकारी क्षेत्र के विज्ञापन से राजस्व का न मिलना है।

सितंबर तक नुकसान का आंकड़ा 600 करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है

एक अनुमान यह भी है कि सितंबर तक नुकसान का आंकड़ा 600 करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है। एमएसएमई, रियल एस्टेट और रिटेल सेगमेंट पर रेडियो कंपनियों का भारी मात्रा में बकाया है। इसका भुगतान न होने के कारण स्थिति और भी खराब हो गई है। इसके अतिरिक्त इस क्षेत्र को सरकार के बकाया के भुगतान का इंतजार है, जो अब एक वर्ष से अधिक हो चुका है।

पैकेज की जरूरत

इसी के मद्देनजर निजी एफएम चैनलों का एक उद्योग निकाय द एसोसिएशन ऑफ रेडियो ऑपरेटर्स फॉर इंडिया (AROI) सरकार से 'सहायता पैकेज' की मांग करने पहुंचा था। केंद्रीय सूचना और प्रसारण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर को लिखे पत्र में, एआरओआई ने सरकार और प्रसार भारती / डब्ल्यूपीसी द्वारा सभी लाइसेंस शुल्क और शुल्क पर 1 साल की छूट मांगी है। इसके अलावा पत्र में रेडियो पर सरकारी विज्ञापन बहाल करना; डीएवीपी, एनएफडीसी और बीएसएनएल से विज्ञापन पर सरकार की मंजूरी और वित्त वर्ष 2020-21 के लिए अग्रिम भुगतान की मांग की है।

सूचना और प्रसारण मंत्रालय ने बिना ब्याज के लाइसेंस शुल्क भुगतान के तीन महीने के विस्तार के अनुरोध पर जवाब दिया है। हालांकि यह कुछ हद तक उद्योगों पर दबाव को कम करेगा, लेकिन AROI के मांगों की तुलना में यह बहुत कम है। सरकार से सीमित समर्थन के साथ, कंपनियों को भारी लागत में कमी के उपाय करने के लिए मजबूर होना पढ़ेगा, क्योंकि कंपनियां वेतन लागत और ऑपरेटिंग कास्ट  को पूरा करने के लिए पर्याप्त कैश फ्लो की व्यवस्था करने में असमर्थ हैं।

वेतन और मैनपावर को कम करने की मजबूरी

कई कंपनियों ने अनिच्छा से वेतन और मैनपावर को कम कर दिया है जिसके परिणामस्वरूप कइयों की नौकरियां छूट गई हैं। मल्टीमीडिया हाउस जो इन रेडियो चैनलों के मालिक हैं, वे खुद को प्रिंट और टीवी स्पेस में भारी नुकसान के रूप में देखते हैं और इसलिए इस क्षेत्र के लिए आवश्यक पूंजी लगाने में असमर्थ हैं।वर्तमान समय संगीत उद्योग पर भी प्रतिकूल प्रभाव डाल रहा है। यह 1 लाख से अधिक लोगों को रोजगार देता है, रेडियो उनकी आय का प्राथमिक स्रोत है। देश के नागरिकों को सूचना और मनोरंजन प्रदान करने के लिए रेडियो क्षेत्र महत्वपूर्ण और एक आवश्यक उद्योग है। 

पिछले कुछ समय में विभिन्न माध्यमों में सरकार द्वारा श्रोताओं को शिक्षित करने और अपनी महत्वपूर्ण सामाजिक पहल के माध्यम से जागरूकता फैलाने के लिए सराहना की गई है। वर्तमान स्थिति को देखते हुए, सरकार राहत पैकेज के लिए सकारात्मक पहल करे ताकि रेडियो कंपनियों को जीवित रह सकें।

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  • Web Title:Radio industry on ventilator from covid 19 epidemic need package from government