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बिजनेसअभी कच्चे तेल की तेजी का असर आना बाकी, 3 रुपये तक महंगा हो सकता है पेट्रोल

नई दिल्ली। आलोक सिंहPublished By: Drigraj Madheshia
Sat, 08 May 2021 07:30 AM
अभी कच्चे तेल की तेजी का असर आना बाकी, 3 रुपये तक महंगा हो सकता है पेट्रोल

अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चा तेल (ब्रेंट क्रूड) एक बार फिर 70 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गया है। इसका असर से घरेलू बाजार में शुक्रवार को पेट्रोल-डीजल कीमतें ऐतिहासिक उच्चतम स्तर पर पहुंच गई। वहीं, ऊर्जा विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले समय में ईंधन की कीमतें और तेजी से बढ़ेंगी क्योंकि भारतीय बाजार पर अभी कच्चे तेल की तेजी का असर आना बाकी है।

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आईआईएफएल सिक्योरिटीज के वाइस प्रेसिडेंट (कमोडिटीज एंड करेंसीज) अनुज गुप्ता ने हिन्दुस्तान को बताया कि ब्रेंट क्रूड 70 डॉलर प्रति बैरल के मनोवैज्ञानिक स्तर को छु लिया है। हालांकि, बीते दो दिन से हल्की गिरावट आई है और यह 68 डॉलर प्रति बैरल पर चल रहा है लेकिन इस महीने के अंत तक 75 डॉलर प्रति बैरल पर ब्रेंट क्रूड पहुंच सकता है। ऐसा इसलिए कि दुनियाभर के विकसित देशों में कोरोना संक्रमण रोकने के लिए टीकाकरण जोरों पर हो रहा है। टीकारण होने के साथ दुनिया की अर्थव्यवस्था तेजी से खुल रही है। यह कच्चे तेल की मांग बढ़ाने का काम कर रहा है। मांग बढ़ने से कीमत में तेजी आनी तय है। इससे भारतीय बाजार भी अछूता नहीं रह सकता है। यहां भी पेट्रोल-डीजल की कीमतों में रिकॉर्ड तेजी देखने को मिल सकती है।

तीन से चार रुपये महंगा हो सकता है पेट्रोल

गुप्ता ने बताया कि मांग बढ़ने के साथ कच्चा तेल महंगा होना शुरू हो गया है। ऐसे में बहुत उम्मीद है कि इस महीने के अंत तक ब्रेंट क्रूड 75 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच सकता है।अगर ऐसा हुआ तो भारतीय बाजार में पेट्रोल 3 से 4 रुपये महंगा हो सकता है। इतना ही उछाल डीजल की कीमत में भी देखने को मिल सकता है। यह कोरोना संकट के बीच महंगाई बढ़ाने का काम करेगा क्योंकि डीजल महंगा होने से माल भाड़ा बढ़ेगा। साथ ही तमाम पेट्रोलियम उत्पाद महंगे होंगे।

मांग बढ़ने की उम्मीद में आई तेजी

ऊर्जा विशेषज्ञ नरेंद्र तनेजा ने हिन्दुस्तान को बताया कि कच्चे तेल की कीमत में तेजी उम्मीद पर बढ़ी है। दरअसल, तेल की खपत करने वाले बड़े देशों में टीकाकरण काफी तेजी से चलाया जा रहा है। इसमें अमेरिका, चीन, ब्रिटेन समेत कई पश्चिमी देश शामिल हैं। ऐसे में तेल उत्पादक देशों को उम्मीद है कि जल्द ही दुनिया की अर्थव्यवस्था पटरी पर लौट आएगी। इससे ईंधन की मांग तेजी से बढ़ेगी लेकिन मांग के अनुरूप उत्पादन करना एकदम से संभव नहीं होगा। इसी उम्मीद में कीमत बढ़ रही है। हालांकि, जैसा तेल उत्पादक देश सोच रहे हैं ऐसा हो यह कहना अभी जल्दबाजी होगा।

कच्चा तेल 35 फीसदी तक महंगा हुआ

इस साल में अब तक कच्चे तेल में 35 फीसदी की तेजी देखने को मिली है। अमेरिका, यूरोप में लॉकडाउन में ढील से तेजी आई है। अमेरिका में तेजी से हो रहे वैक्सीनेशन से बल मिला है। चीन के अच्छे आर्थिक आंकड़ों से सपोर्ट मिला है। गोल्डमैन सैक्स ने कहा कि गर्मियों के सीजन में ब्रेंट क्रूड 80 डॉलर तक जा सकता है।

खुदरा कीमतों में 60 फीसदी तक शुल्क

वर्तमान में पेट्रोल की खुदरा कीमत में 60 प्रतिशत तक केन्द्र और राज्य के करों का हिस्सा है जबकि डीजल के खुदरा मूल्य में करों का हिस्सा 54 प्रतिशत तक है। वहीं, वर्तमान में प्रतयेक राज्य पेट्रोल, डीजल पर अपनी जरूरत के हिसाब से मूल्य वर्धित कर (वैट) लगाता है, जबकि केन्द्र इस पर उत्पाद शुल्क और अन्य उपकर वसूलता है। इसके चलते देश के कुछ हिस्सों में पेट्रोल के दाम 102 रुपये लीटर तक पहुंच गया है।

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