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GST के दायरे में नहीं आने से राहत की उम्मीद टूटी, उलटे और बढ़ सकती हैं पेट्रोल-डीजल की कीमतें

भाषा,नई दिल्लीPublished By: Prabhash Jha
Sat, 18 Sep 2021 12:03 AM
GST के दायरे में नहीं आने से राहत की उम्मीद टूटी, उलटे और बढ़ सकती हैं पेट्रोल-डीजल की कीमतें

पेट्रोल और डीजल के को जीएसटी के दायर में लाए जाने से इसकी कीमतों में कमी आने की उम्मीद लगाए लोगों को आज जबरदस्त झटका लगा है। उलटे अब अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उछाल आने की वजह से देश में पेट्रोल, डीजल की खुदरा कीमतों में और वृद्धि की आशंका सताने लगी है। अगस्त के शुरू में अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट देखने को मिली थी, लेकिन इसी महीने के अंतिम सप्ताह से लगातार उछाल आना शुरू हो गया। ब्रेंट कच्चा तेल की वायदा कीमत शुक्रवार को मामूली गिरावट के साथ 75.02 डालर प्रति बैरल पर बोली गई।

जीएसटी काउंसिल की बैठक से आन लोगों की राहत की उम्मीद थी, लेकिन वहां भी मायूसी ही हाथ लगी। काउंसिल की 45वीं बैठक में पेट्रोल-डीजल पर चर्चा हुई, लेकिन इसके पक्ष में निर्णय नहीं लिया जा सका बैठक के बाद वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि केरल हाई कोर्ट के आदेश पर पेट्रोलियम उत्पादों को जीएसटी के दायरे में लाने के लिए आज के एजेंडे में  शामिल किया गया था। सदस्यों ने कहा कि इन उत्पादों को जीएसटी के दायरे में लाने का यह उपयुक्त समय नहीं है और इसलिए इसके पक्ष में निर्णय नहीं हो सका। 

पेट्रोल और डीजल की कीमतों में 12 दिन से कोई बदलाव नहीं हुआ है, लेकिन अब अंतरराष्ट्रीय कीमतों में फिर से तेजी आने लगी है।  ग्लोबल मार्केट में तेल की कीमतें बढ़ने से तेल कंपनियां के मार्जिन पर दबाव बढ़ जाता है।  ऐसे में सूत्रों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय कीमतें बढ़े हुए स्तर पर बनी रहती हैं, तो तेल मार्केटिंग कंपनियों को पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतों में वृद्धि करनी होगी।

सूत्र ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में पेट्रोल और डीजल की मौजूदा कीमतें अगस्त माह के औसत दाम की तुलना में प्रति बैरल लगभग चार से छह डॉलर ऊपर पहुंच गई हैं। इसके बावजूद तेल कंपनियों ने खुदरा कीमतों में कोई वृद्धि नहीं की है। पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतों में आखिरी बार क्रमश: 17 जुलाई और 15 जुलाई को बढ़ाई गई थीं।

 दिल्ली में पेट्रोल की कीमत फिलहाल 101.19 रुपये प्रति लीटर और डीजल की कीमत 88.62 रुपये प्रति लीटर है। जुलाई की तुलना में इस साल अगस्त में अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की औसत कीमत में प्रति बैरल तीन डॉलर से अधिक की गिरावट हुई थी। ऐसा अमेरिका और चीन के आर्थिक आंकड़ों और कोरोना वायरस के तेजी से फैलते डेल्टा वेरिएंट के कारण एशिया में आवाजाही पर लगे प्रतिबंधों के बीच हुआ था। इस कारण से 18 जुलाई के बाद से तेल मार्केटिंग कंपनियों ने कीमतों में मामूली कटौती की थी। दिल्ली में पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतें क्रमश: 0.65 रुपये प्रति लीटर और 1.25 रुपये प्रति लीटर कमी की गई थीं। आखिरी बार पांच सितंबर को कीमतों में कमी की गई थी।

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