
झटकाः पेट्रोल 80 रुपये के पार, डीजल भी 67 पर, जानें चार महानगरों में क्या है कीमत
देश में पेट्रोल और डीजल की कीमतें आसमान छूती जा रही है। हर दिन कीमतों में बढ़ोत्तरी से अब हालात ये हो गए हैं कि पेट्रोल की कीमत 80 रुपये प्रति लीटर को भी पार कर गई है। जबकि डीजल के दाम भी 67 रुपये...
देश में पेट्रोल और डीजल की कीमतें आसमान छूती जा रही है। हर दिन कीमतों में बढ़ोत्तरी से अब हालात ये हो गए हैं कि पेट्रोल की कीमत 80 रुपये प्रति लीटर को भी पार कर गई है। जबकि डीजल के दाम भी 67 रुपये प्रति लीटर तक पहुंच गए हैं। हालांकि ये वृद्धि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में लगातार आ रही बढ़ोतरी की वजह से है।
अगर देश की राजधानी दिल्ली की बात करें तो यहां डीजल की कीमत नये रिकार्ड पर है। यहां पेट्रोल 72.33 प्रति लीटर तो डीजल 63.01 प्रति लीटर है। वहीं देश की आर्थिक राजधानी मुंबई में सोमवार को एक लीटर पेट्रोल 80.10 रुपये पर पहुंच गया। वहीं, डीजल के लिए भी यहां लोगों को 67.10 रुपये चुकाए। वैसे दोनों ही ईंधन वाणिज्यक महानगर में सबसे अधिक हैं। सरकार ने पिछले साल 15 अक्टूबर से दोनों ईंधन की कीमतों को रोजाना अंतरराष्ट्रीय भावों के अनुरूप तय करने का निर्णय लिया था। इसके बाद एकाध मौके को छोड़कर दाम बढ़ते ही रहे हैं।
चार बड़े महानगरों में आज दाम इस प्रकार हैं
पेट्रोल (रुपये प्रति लीटर)
दिल्ली................ 72.33
कोलकाता......... 74. 94
मुम्बई................ 80.10
चेन्नई .................74.91
डीजल (रुपये प्रति लीटर)
दिल्ली .................63.01
कोलकाता ............65.67
मुंबई ...................67.10
चेन्नई ...................66.44
इस बीच सरकार ने कहा है कि वह लगातार पेट्रोल और डीजल को जीएसटी के दायरे में लाने की कोशिश में जुटी हुई है।
पेट्रोलियम मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहा है कि सरकार लगातार पेट्रोल-डीजल और केरोसीन को जीएसटी के दायरे में लाने की कोशिश में जुटी हुई है। इसके लिए प्रयास किए जा रहे हैं।
उन्होंने उम्मीद जताई कि जीएसटी परिषद जल्द ही इसको लेकर कोई फैसला ले सकती है। पेट्रोल और डीजल की लगातार बढ़ती कीमतों को लेकर उन्हेांने कहा कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लगातार कच्चे तेल की कीमतें बढ़ रही हैं। दूसरी तरफ, राज्यों की तरफ से वसूले जाने वाले वैट की वजह से भी कीमतें लगातार बढ़ती जा रही हैं।
अगर पेट्रोल और डीजल को जीएसटी के दायरे में लाया जाता है, तो इससे इन दोनों की कीमतें 50 रुपये के तहत आ सकती हैं। इससे केंद्रीय स्तर पर लगने वाली एक्साइज ड्यूटी और राज्यों की तरफ से वसूले जाने वालो वैट से आम आदमी को छुटकारा मिल जाएगा। जीएसटी के तहत इस पर परिषद ज्यादा से ज्यादा 28 फीसदी जीएसटी लगा सकती है।
इसके साथ ही ये भी संभव है कि सरकार कुछ एक्स्ट्रा सेस भी इसके साथ लगाए. हालांकि फिलहाल इसको लेकर कोई सहमति नहीं बनी है। इससे भले ही आम आदमी को राहत मिले, लेकिन राज्यों को इससे राजस्व में बड़ा नुकसान उठाना पड़ सकता है। यही वजह है कि सभी राज्य इसके लिए अपनी सहमति देने में समय लगा रहे हैं।





