5 सेक्टरों के 9.3 करोड़ शहरी कामगारों पर पड़ी है कोरोना महामारी की मार

Drigraj Madheshia सुनेत्रा चौधरी, नर्द दिल्ली
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मुख्य बातें

  • कोरोना महामारी से पांच सेक्टरों के करीब 9.3 करोड़ शहरी वर्कर्स बुरी तरह प्रभावित हुए हैं
  • कोविड -19 महामारी और लॉकडाउन की मार मैन्यूफैक्चरिंग, निर्माण, व्यापार, पर्यटन और आतिथ्य क्षेत्र पर अधिक..
5 सेक्टरों के 9.3 करोड़ शहरी कामगारों पर पड़ी है कोरोना महामारी की मार

कोरोना महामारी से पांच सेक्टरों के करीब 9.3 करोड़ शहरी वर्कर्स बुरी तरह प्रभावित हुए हैं। कोविड -19 महामारी और लॉकडाउन की मार मैन्यूफैक्चरिंग, निर्माण, व्यापार, पर्यटन और आतिथ्य क्षेत्र पर अधिक पड़ी है। मंत्रियों के समूह की अध्यक्षता करने वाले श्रम मंत्री थावरचंद गहलोत ने यह जानकारी दी।

सुझावों के साथ पिछले सप्ताह प्रधानमंत्री कार्यालय को एक रिपोर्ट में प्रस्तुत किया गया था, जिसमें श्रमिकों का एक डेटाबेस, अपने गांव लौटने वाले हर प्रवासी कामगार के लिए जॉब कार्ड और ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना के तहत निजी कारखाने या निर्माण स्थल में काम करने की अनुमति देना, नियोक्ता को मनरेगा मजदूरी घटक के ऊपर मजदूरी का भुगतान करना जैसे सुझाव दिए गए थे। हिंदुस्तान टाइम्स ने इस रिपोर्ट की समीक्षा की है। वहीं गहलोत ने रिपोर्ट पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया और कहा कि रिपोर्ट अभी तक सार्वजनिक नहीं हुई है।

श्रमिकों को शहरों में वापस लाने के लिए जगाना होगा उनमें विश्वास

प्रवासी श्रमिकों को शहरों में वापस लाने के लिए मंत्रियों के समूह ने जोर देते हुए कहा कि उनकी वापसी के लिए उनके मन में विश्वास जगाने के लिए कई उपाय किए जाने चाहिए।  ये उपाय उनके बच्चों के लिए छात्रवृत्ति, आंगनवाड़ियों तक पहुंच, प्रशिक्षण और अपस्किलिंग के रूप में हो सकते हैं। सभी प्रवासी श्रमिकों को आयुष्मान भारत या राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा योजना में ऑटोमटिक शामिल कर लेना चाहिए।

मंत्रियों के समूह ने यह भी बताया कि संगठित क्षेत्र के श्रमिकों को भी अपनी नौकरी खोने का खतरा था। सेंटर फॉर मॉनिटरिंग ऑफ इंडियन इकोनॉमी (सीएमआईई) की घोषणा में बताया गया है कि सप्ताह के अंत में 11.4 करोड़ नौकरियां खो गई हैं और बेरोजगारी 27.1% की रिकॉर्ड ऊंचाई पर है।

आर्थिक संकट का सामना कर रहा है देश

देश अब एक आर्थिक संकट का सामना कर रहा है। जान के साथ-साथ नौकरियां और आजीविका भी जा रही हैं। रिपोर्ट की  इसकी पहली पहली सिफारिश आर्थिक गतिविधियों को जल्द से जल्द शुरू करना है। यह सुनिश्चित करने के लिए, सरकार ने चरणबद्ध तरीके से और अधिक आर्थिक गतिविधियों को फिर से शुरू करने की अनुमति दी है। इस हफ्ते, उसने सीमित उड़ानों और कुछ नियमित ट्रेन सेवाओं को फिर से शुरू करने की घोषणा की।

कोई ऐप नहीं करेगा मदद 

जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय में अर्थशास्त्र के प्रोफेसर बिस्वजीत धर के मुताबिक उन्हें यकीन नहीं होता कि कोई ऐप मदद करेगा।  प्रवासियों को तत्काल मदद की आवश्यकता है और इसलिए सरकार को इसे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने और स्थानीय स्तर पर रोजगार खोजने में मदद करने के अवसर के रूप में देखना चाहिए। जब उनमें से अधिकांश ऑनलाइन नहीं होंगे तो ऐप्स कैसे मदद करेंगे?

Drigraj Madheshia

लेखक के बारे में

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दृगराज मद्धेशिया पिछले 21 वर्षों से पत्रकारिता जगत का एक विश्वसनीय चेहरा हैं। वर्तमान में 'लाइव हिन्दुस्तान' की बिजनेस टीम के एक महत्वपूर्ण सदस्य के रूप में, वे शेयर बाजार, कमोडिटी, पर्सनल फाइनेंस और यूटिलिटी सेक्टर पर अपनी गहरी पकड़ रखते हैं। वह कलम से बाजार की नब्ज टटोलने वाले एक पत्रकार हैं, जो शेयर बाजार से लेकर आपकी जेब (Personal Finance) तक, हर खबर को आसान बनाते हैं। टीवी, प्रिंट और डिजिटल मीडिया के अपने विस्तृत अनुभव के साथ, दृगराज जटिल मार्केट डेटा को आम पाठकों के लिए 'कुछ अलग' और आसान भाषा में पेश करने के लिए पहचाने जाते हैं। उन्होंने अपने करियर में हिन्दुस्तान, सहारा समय, दैनिक जागरण और न्यूज नेशन जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दी हैं। मूलत: उत्तर प्रदेश के कुशीनगर जिले के रहने वाले दृगराज मैथ्स बैकग्राउंड होने के कारण डेटा और कैलकुलेशन में माहिर हैं, जो बिजनेस पत्रकारिता के लिए एक बड़ा प्लस पॉइंट है। उन्होंने कॅरियर की शुरुआत गोरखपुर से सहारा समय साप्ताहिक से बतौर फ्रीलांसर की और बहुत ही जल्द सहारा समय उत्तर प्रदेश/उत्तराखंड के हिस्सा बन गए। ​इसके बाद छत्तीसगढ़ में वॉच न्यूज से जुड़े। टीवी को छोड़ हिन्दुस्तान अखबार के बरेली एडिशन की लॉन्चिंग टीम का हिस्सा बने। साढ़े सात साल की मैराथन पारी के बाद अगला पड़ाव न्यूज नेशन डिजिटल रहा। इसके बाद एक बार फिर हिन्दुस्तान दिल्ली से जुड़े और अब डिजिटल टीम का हिस्सा हैं। और पढ़ें

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