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1 जनवरी, 2021|12:55|IST

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'किसान आंदोलन के कारण तीसरी तिमाही में 70 हजार करोड़ का नुकसान'

farmers calls mahapanchayat at up-delhi border on 30 december

पीएचडी चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री ने गुरुवार को कहा कि नए कृषि कानूनों के खिलाफ किसानों के आंदोलन से दिसंबर तिमाही में 70,000 करोड़ रुपए का आर्थिक नुकसान होगा। चैम्बर के अध्यक्ष संजय अग्रवाल ने कहा,‘36 दिनों के कृषि आंदोलन में अब तक वित्तीय वर्ष 2020-21 के तीसरी तिमाही में 70,000 करोड़ रुपए से अधिक का आर्थिक नुकसान होगा ... आपूर्ति श्रृंखलाओं में व्यवधान और विशेष रूप से दिन-प्रतिदिन की आर्थिक गतिविधियों में व्यवधान के चलते। यह नुकसान विशेषरूप से प्रगतिशील राज्य पंजाब और हरियाणा और राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के सीमावर्ती क्षेत्र में होगा।’

उन्होंने कहा कि सरकार और किसानों के बीच दो बिंदुओं पर सहमति बनी है, पराली जलाने और बिजली संशोधन बिल, 2020 पर जो सराहनीय है और चैम्बर शेष दो मुद्दों के शीघ्र समाधान के लिए तत्पर है। किसानों और केंद्र के बीच बातचीत तीन कृषि कानूनों को निरस्त करने और एमएसपी की कानूनी गारंटी के मुख्य विवादास्पद मुद्दों पर रुकी हुई है। पंजाब और हरियाणा में लगभग 25 लाख एमएसएमई हैं, जो पंजाब और हरियाणा के कुल 14 लाख करोड़ रुपए के जीएसडीपी (वर्तमान मूल्य) में 45 लाख से अधिक योगदान करने वाले 45 लाख से अधिक कर्मचारियों को रोजगार देते हैं।

अग्रवाल ने कहा कि पंजाब और हरियाणा के जीएसडीपी (सकल राज्य घरेलू उत्पाद) का अनुमान 5.75 लाख करोड़ रुपए और 2019-20 में क्रमशः 8.31 लाख करोड़ रुपए था। उन्होंने कहा कि खाद्य प्रसंस्करण, सूती वस्त्र, वस्त्र, ऑटोमोबाइल, कृषि मशीनरी, सूचना प्रौद्योगिकी, व्यापार, पर्यटन, आतिथ्य और परिवहन जैसे क्षेत्रों ने आंदोलन को बुरी तरह प्रभावित किया है, जिससे उद्योग को कई कच्चे माल की आपूर्ति बाधित हुई है।

गौरतलब है कि पंजाब, हरियाणा और देश के विभिन्न हिस्सों से आए किसान केन्द्र के तीन नए कृषि कानूनों को रद्द किए जाने की मांग को लेकर पिछले लगभग एक महीने से राष्ट्रीय राजधानी की विभिन्न सीमाओं पर आंदोलन कर रहे हैं।

क्या है मामला
कृषि क्षेत्र में बड़े सुधार के तौर पर सरकार ने सितंबर में तीनों कृषि कानूनों को लागू किया था। सरकार ने कहा था कि इन कानूनों के बाद बिचौलिए की भूमिका खत्म हो जाएगी और किसानों को देश में कहीं पर भी अपने उत्पाद को बेचने की अनुमति होगी। वहीं, किसान तीनों कृषि कानूनों को रद्द करने की मांग पर अड़े हुए हैं। प्रदर्शन कर रहे किसानों का दावा है कि ये कानून उद्योग जगत को फायदा पहुंचाने के लिए लाए गए हैं और इनसे मंडी और न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) की व्यवस्था खत्म हो जाएगी।

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  • Web Title:Over Rs 70000 cr economic loss in Q3 due to farmers agitation says PHDCCI