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20 जनवरी, 2020|3:06|IST

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ITR फाइल करते समय न करें ये 7 गलतियां, बचे हैं 3 दिन 

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अक्ससर लोग इनकम टैक्स रिटर्न की फाइलिंग करते वक्त सैलरी तो दर्शाते हैं लेकिन सैलरी के अलावा अन्य जरियों से हो रही इनकम को या तो छिपा लेते हैं या फिर अनजाने में डिक्लेकयर नहीं करते हैं। वहीं कुछ लोग टैक्सेकबल चीजों को दर्शाते हैं, जबकि इनकम टैक्स  से छूट वाली सेविंग्स  या इनकम को नहीं खोलते हैं, जो कि सही नहीं है। टैक्स  फॉर्म भरते वक्त आपको हर तरह की इनकम को दर्शाना जरूरी होता है, फिर चाहे वह टैक्सेंबल हो या नहीं। आइए जानते हैं टैक्स फॉर्म भरते समय किन बातों का ध्यान रखना चाहिए। 

बैंक और पोस्ट  ऑफिस से आ रहा ब्याज
अगर आपने बैंक या पोस्टऑ ऑफिस में किसी भी तरह की सेविंग्स  कर रखी है तो उसे रिटर्न भरते वक्त जरूर दर्शाएं। इन सेविंग्स में फिक्स्ड डिपॉजिट (FD), रिकरिंग डिपॉजिट (RD), किसान विकास पत्र, एनएससी आदि आते हैं। ब्या‍ज से हो रही आय टैक्स  के दायरे में है या नहीं इसकी कैलकुलेशन बैंक या पोस्ट में मौजूद सभी सेविंग्स‍ को मिलाकर आ रहे ब्याज पर होती है। इसे अपने आईटीआर में जरूर दिखाएं। 

डिविडेंड-बॉन्ड्स से हो रही आय
किसी भी तरह के बॉन्ड और डिविडेंड टैक्स के दायरे में आते हैं। जब आप शेयर मार्केट में निवेश करते हैं तो आपने जिस कंपनी में इन्वे‍स्ट किया है, वह प्रॉफिट होने पर आपको उसका कुछ अंश देती है। इसे ही डिविडेंड कहते हैं। आपको इस इनकम को भी दर्शाना होता है। 

इंश्योरेंस पॉलिसी
अगर आपने लाइफ या हेल्थ इंश्यो रेंस करा रखा है तो इसे भी रिटर्न फाइलिंग के दौरान बताएं। इनकम टैक्स  में आपको इंश्योइरेंस का फायदा मिलता है। अगर आपका लाइफ इंश्योरेंस, सालाना प्रीमियम का 10 गुना है तो आपको सेक्शइन 10(10डी) के तहत टैक्सय से छूट मिलती है। 

स्टॉशक मार्केट से कमाई
जब भी आप किसी चीज को बेचते हैं तो उससे हुई कमाई को कैपिटल गेन कहा जाता है। शेयर मार्केट में निवेश दो अवधि के लिए किया जाता है- शॉर्ट टर्म और लॉन्गट टर्म। लॉन्गय टर्म इन्वेमस्ट मेंट 5 साल या उससे ज्या(दा अवधि के लिए होता है। ऐसे मे जब आप शॉर्ट टर्म शेयर को बेचते हैं तो उसे शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन और लॉन्ग टर्म शेयर्स को बेचने को लॉन्गम टर्म कैपिटल गेन कहते हैं। देश में स्टॉक और इक्विटी फंड से शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन पर टैक्स लगता है। वहीं लॉन्ग  टर्म कैपिटल गेन टैक्स  फ्री है। 

गोल्ड, प्रॉपर्टी को बेचकर हुई कमाई
अगर आपने गोल्डल, प्रॉपटी, डेट स्कीसम्सॉ आदि की बिक्री की है तो इसे भी टैक्स फॉर्म में दर्शाना जरूरी है। इन चीजों से शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन पर नॉर्मल रेट से टैक्स  लगता है।

टैक्स के तहत न आने वाली सेविंग्स बताना भी जरूरी
टैक्से्बल के साथ-साथ टैक्सट से छूट वाली इनकम भी रिटर्न फाइलिंग के दौरान उजागर करनी चाहिए। इनमें पीपीएफ, पीएफ, स्टॉक्स मार्केट से लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन आदि शामिल हैं। इस इनकम को बताकर आप भविष्य में कभी भी इसका इस्तेमाल बेरोकटोक कर सकते हैं। आईटीआर-1 फॉर्म में टैक्स से छूट वाली इनकम दर्शाने के लिए भी सेक्शन है। 

न छिपाएं बड़ी खरीदारी
अगर आप कोई महंगी कार, प्रॉपर्टी आदि जैसे बड़े सौदे करते हैं या फिर कोई बड़ा अमाउंट इन्वेटस्ट करते हैं तो इसकी भी जानकारी इनकम टैक्सम डिपार्टमेंट को दें। वजह है कि इस बात की काफी संभावना है कि आप जिन लोगों से सौदा कर रहे हैं, उनके जरिए यह जानकारी डिपार्टमेंट को मिल जाएगी। ऐसे में अगर कभी आपसे इस खरीदारी या इन्वेस्टमेंट का सोर्स पूछा जाए तो आप सवाल-जवाब से आसानी से दे सकते हैं क्योंकि आपने इसे टैक्स रिटर्न में दिखाया हुआ है।
 

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