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भारत में सिर्फ 24 फीसद लोग आर्थिक रूप से शिक्षित, जानें क्या है फाइनेंशियल लिटरेसी

what is financial literacy: स्टैंडर्ड एंड पूअर्स फाइनेंशियल सर्विसेज एलएलसी के ग्लोबल सर्वे में खुलासा हुआ है कि दक्षिण एशियाई देशों में 25 फीसद से भी कम युवा आर्थिक तौर पर साक्षर हैं।

भारत में सिर्फ 24 फीसद लोग आर्थिक रूप से शिक्षित, जानें क्या है फाइनेंशियल लिटरेसी
Drigraj Madheshiaएजेंसी,नई दिल्लीTue, 28 Nov 2023 07:14 PM
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भारतीय अब वैश्विक स्तर पर 42 फीसद डिजिटल लेनदेन में योगदान करते हैं। यानी भारतीय लेनदेन में स्मार्ट तो हो रहे हैं पर क्या उनमें वित्तीय साक्षरता भी बढ़ रही है? आपको यह जानकार हैरानी होगी कि भारत में सिर्फ 24 फीसद लोग आर्थिक रूप से शिक्षित हैं। स्टैंडर्ड एंड पूअर्स फाइनेंशियल सर्विसेज एलएलसी के ग्लोबल सर्वे में खुलासा हुआ है कि दक्षिण एशियाई देशों में 25 फीसद से भी कम युवा आर्थिक तौर पर साक्षर हैं।

क्या है वित्तीय साक्षरता

वित्तीय साक्षरता व्यक्तिगत वित्तीय प्रबंधन, बजट और निवेश सहित विभिन्न वित्तीय कौशलों को समझने और प्रभावी ढंग से उपयोग करने की क्षमता है। जब आप वित्तीय रूप से साक्षर होते हैं, तो आपके पास पैसे के साथ रिश्ते की नींव होती है। आप जितनी जल्दी शुरुआत करेंगे, आपके लिए उतना ही बेहतर होगा।

वित्तीय साक्षरतार पर एक सम्मेलन पिछले दिनों दिल्ली में हुआ। इस कार्यक्रम में एजुकेशन, बिजनेस और सरकार से जुड़े 32 से ज्यादा एक्सपर्ट्स ने भाग लिया था। एवोक इंडिया फाउंडेशन की इंटरनेशनल फाइनेंशियल लिटरेसी कॉन्क्लेव-2023 में  पूर्व केंद्रीय मंत्री सुरेश प्रभु ने जनधन योजना के लाभ गिनाते हुए उन्होंने फाइनेंशियल एजुकेशन के फायदे भी गिनाए।

महिलाओं ने खुद ही फाइनेंशियल एजुकेशन को सीखा

सुरेश प्रभु ने कहा कि जनधन योजना के तहत बड़ी तादाद में ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाओं के बैंक खाते खोले गए। इसके बाद उन महिलाओं ने खुद ही फाइनेंशियल एजुकेशन को सीख लिया। इसका असर यह हुआ कि कुछ समय बाद ही उनके परिवार और खासतौर पर बच्चों की लाइफस्टाइल में बदलाव देखा गया। पैसों के सही इस्तेमाल की जरूरतों को समझते हुए महिलाओं ने पूरा फाइनेंशियल एजुकेशन ही समझ लिया। असल में फाइनेंशियल एजुकेशन कहीं और से नहीं बल्कि खुद से सीखने की चीज है।

दक्षिण एशियाई देशों में 25 फीसद से भी कम युवा आर्थिक तौर पर साक्षर
फाइनेंशियल एजुकेशन से जुड़े तथ्यों को पेश करते हुए एवोक इंडिया के संस्थापक प्रवीण कुमार द्विवेदी ने बताया कि दक्षिण एशियाई देशों में 25 फीसद से भी कम युवा आर्थिक तौर पर साक्षर हैं। अनंत नारायण ने सेबी की भूमिका पर अपनी बात रखी. उन्होंने पैसों की बचत करने वालों को इंवेस्टर्स की तरह प्रोत्साहित करने के सेबी के मिशन पर जोर दिया। डॉ. प्रभाकर साहू ने बताया कि भारतीय अब वैश्विक स्तर पर 42 फीसद डिजिटल लेनदेन में योगदान करते हैं, जिसमें जन धन योजना की महत्वपूर्ण भूमिका है।

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