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ऑनलाइन शॉपिंग की सुविधा बना रही है मांसपेशियों को खोखला

लंदन। एजेंसीPublished By: Madan
Sat, 30 Sep 2017 07:49 AM
ऑनलाइन शॉपिंग की सुविधा बना रही है मांसपेशियों को खोखला

ऑनलाइन सामान-सब्जी खरीदने से तो समय तो बचता है, लेकिन यह आदत आपको शारीरिक तौर पर कमजोर बना रही है। फिजियोथेरेपी विशेषज्ञों का कहना है कि इससे मांसपेशियां कमजोर हो रही हैं, क्योंकि पांच-दस किलो का वजन लेकर एक-दो किलोमीटर चलने की बजाय हम आरामतलबी पर जोर दे रहे हैं। 

फिजियोथेरेपी विशेषज्ञों का कहना है कि ऑनलाइन खरीदारी को बढ़ावा देने के लिए भागदौड़ और पीठ दर्द से मुक्ति की तरह पेश किया जाता है। ई कॉमर्स कंपनियां समय की बचत के साथ बिना पसीना बहाए सामान घर पहुंचाने की पेशकश करती हैं। इससे सुपरमार्केट या दुकानों पर जाकर भारी झोले उठाकर लेने की जहमत नहीं उठानी पड़ती। लेकिन यह सुविधा हमारी मांसपेशियों को खोखला कर रही हैं। 

चार्टर्ड सोसायटी ऑफ फिजियोथेरेपी के अनुसार, घर का सामान या सब्जी लेकर चलना-फिरना या सीढ़ियां चढ़ने से हमारी मांसपेशियां मजबूत रहती हैं और इससे बुढ़ापे में भी हम चुस्त-दुरुस्त बने रहते हैं। सोसायटी ने दो हजार से ज्यादा लोगों से बातचीत की और उनसे बाजार जाकर सामान खरीदने या ऑनलाइन शॉपिंग की प्रवृत्ति के बारे में पूछा। इसमें दो तिहाई ने माना कि वे घर पर ही सामान मंगा लेते हैं। इनमें से 24 फीसदी मांसपेशियों में अकड़न और चलने-फिरने में समस्याएं झेल रहे थे। 

सोसायटी ने कहा कि इससे उम्र बढ़ने के साथ शारीरिक समस्याएं जल्द घेर लेती हैं। ब्रिटेन की राष्ट्रीय स्वास्थ्य सेवा (एनएचएस) ने स्वास्थ्य दिशानिर्देश में कहा है कि हफ्ते में दो बार मांसपेशियों से जुड़ी कसरत जरूरी है। इसमें वजन उठाने या उसे लटकाकर लेकर चलने की आदत मददगार साबित हो सकती है। खासकर कामकाजी लोगों के लिए यह बेहद जरूरी है, जिन्हें कसरत करने का भी वक्त नहीं मिलता। 

बुढ़ापो को ध्यान में रखकर काम करें युवा 

सोसायटी की मुख्य कार्यकारी प्रोफेसर केरन मिडिलटन ने कहा कि युवाओं को बुढ़ापे का ध्यान रखकर सक्रियता रखनी चाहिए। उन्होंने कहा कि फिट रहने और शारीरिक मजबूती के लिए जिम जाना जरूरी नहीं है, हम अपनी जीवनशैली में बदलाव लाकर भी खुद को सक्रिय रह सकते हैं। बगीचे में थोड़ी देर पेड़ पौधों की देखभाल के लिए खुदाई-रोपाई भी ऐसा ही जरिया है।

40 की उम्र से सिकुड़ने लगती हैं मांसपेशियां

ब्रिटेन के सरकारी स्वास्थ्य विभाग में वयस्क स्वास्थ्य सेवा के प्रमुख डॉक्टर जस्टिन वार्ने ने कहा कि हमारी मांसपेशियां 20 साल की उम्र से ही कमजोर होना शुरू हो जाती हैं और 40 की उम्र से वे सिकुड़ने लगती हैं। मांसपेशियों से जुड़ी बीमारियां हमारी कार्यक्षमता को प्रभावित करना शुरू कर देती हैं।  हम भूल जाते हैं कि हम बूढ़े भी होंगे और तब फ्रैक्चर जैसी घटनाएं होती हैं। 

बुजुर्गों के अचानक गिरने के वाकये बढ़े

ब्रिटेन के सेंटर फॉर एजिंग बेटर के कार्यक्रम प्रमुख जेस कुहेन ने कहा कि युवावस्था में मांसपेशियों की सक्रियता से बुढ़ापे में अचानक गिरने, घुटने में दर्द या कूल्हे के फ्रैक्चर का खतरा कम हो जाता है। पिछले दो सालों में ब्रिटेन में 60 साल से ज्यादा उम्र के 25 फीसदी और 80 साल के 40 फीसदी बुजुर्गों ने अचानक गिरने की समस्या का सामना किया। गिरने के 95 फीसदी मामलों में कूल्हे का फ्रैक्चर हुआ। इससे एनएचएस पर सालाना करीब एक अरब पौंड का खर्च पड़ा। 

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