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बिजनेसदूसरी लहर से एक तिहाई EMI अटकीं, 2.90 करोड़ असफल रहे ऑटो डेबिट लेन-देन

नई दिल्ली। हिन्दुस्तान ब्यूरोPublished By: Drigraj Madheshia
Sat, 15 May 2021 07:15 AM
दूसरी लहर से एक तिहाई EMI अटकीं, 2.90 करोड़ असफल रहे ऑटो डेबिट लेन-देन

कोरोना महामारी की दूसरी लहर ने आर्थिक गितिविधयों की रफ्तार फिर से धीमी कर दी है। इसका असर लोन की ईएमआई भुगतान पर हुआ है। कारोबारियों के कारोबार मंदा होने और नौकरीपेशा वर्ग की नौकरी जाने से अप्रैल में ऑटो-डेबिट भुगतान में बाउंस के मामले बढ़ गए हैं। यानी लोन की ईएमआई का अटकने की घटनाएं बढ़ी हैं।

नेशनल ऑटोमेटेड क्लियरिंग हाउस (एनएसीएच) के आंकड़ों के मुताबिक, संख्या के लिहाज से अप्रैल में 34.05 फीसदी ऑटो-डेबिट लेनदेन असफल रहे, जबकि मार्च में 32.76 फीसदी ऑटो-डेबिट लेनदेन ही असफल रहे थे। यह फरवरी 2020 के बाद निचला स्तर था। यानी स्थिति में सुधार हो रहा था लेकिन फिर से संकट गहरा गया है। अप्रैल में कुल 8.54 करोड़ ऑटो-डेबिट लेनदेन का प्रयास किया गया। इनमें से 5.63 करोड़ सफल और 2.90 करोड़ असफल रहे। कुल ऑटो-डेबिट में से असफल ऑटो-डेबिट की हिस्सेदारी दिसंबर से घट रही थी। इससे उपभोक्ता सामान की मासिक किस्त (ईएमआई), यूटिलिटी और बीमा प्रीमियम भुगतान में अत्यधिक नियमितता बरतने का संकेत मिलता है।

लॉकडाउन लंबा खींचने से स्थिति और बिगड़ेगी

वित्तीय विशेषज्ञों का कहना है कि अप्रैल के आंकड़ें बहुत चिंताजनक नहीं है लेकिन लॉकडाउन लंबा खींचने से स्थिति और गंभीर होगी। कोराना के मामले में कमी आता नहीं देख कई राज्यों में लॉकडाउन की अवधि बढ़ सकती है। महाराष्ट्र, दिल्ली और बिहार में लॉकडाउन की अवधि को बढ़ा दिया है। आने वाले दिन में इसको दूसरे भी राज्य अपना सकते हैं।

चेक बाउंस के मामले बढ़े

कोरोना की पहली लहर से उबरकर ईएमआई समय पर भुगतान में सुधार के संकेत थे, लेकिन अप्रैल में स्थिति फिर से खराब हो गई है। बैंकों के अनुसार, सिर्फ ऑटो डेबिट असफल होने की घटनाएं नहीं बढ़ी हैं बल्कि चेक बाउसं करने के केस में भी इजाफा हुआ है। यह इस बात का संकेत हैं कि लोग फिर से डरे हुए हैं औेर वह अपने संकट के समय के लिए फंड रखना चाहते हैं।

स्वरोजगार वाले सबसे ज्यादा संकट में

विशेषज्ञों का कहना है कि दूसरी लहर और लॉकडाउन का सबसे ज्यादा असर स्वरोजगार करने वाले और असंगठित क्षेत्र में काम करने वाले पर हुआ है। संगठित क्षेत्र में काम करने वाले लोगों को वेतन मिल रहा है जबकि स्वरोजगार करने वाले का काम-धंधा बंद है। इससे उनके लिए लोन की ईएमआई चुकाना मुश्किल हो गया है।

पिछले साल जून में सर्वोच्च स्तर था

ऑटो-डेबिट लेनदेन के असफल रहने का स्तर पिछले साल जून में सर्वोच्च स्तर पर था। उस समय लेनदेन के असफल होने की दर 45 फीसदी से ऊपर थी। उसके बाद इसमें लगातार कमी आ रही थी क्योंकि आर्थिक गतिविधियां सुधरने लगी थीं। इसके बावजूद बाउंस दर कोविड से पहले के स्तरों के मुकाबले ऊंची बनी हुई है। जनवरी और फरवरी 2020 में बाउंस दर करीब 31 फीसदी थी। वित्त वर्ष 2021 में असफल ऑटो-डेबिट आग्रह कुल ऑटो-डेबिट आग्रहों के 38.91 फीसदी रहे। ये वित्त वर्ष 2020 में 30.3 फीसदी और वित्त वर्ष में 23.3 फीसदी रहे।

 

डिजिटल की रफ्तार के बावजूद नकदी शीर्ष पर

कोरोना वायरस की दूसरी लहर की वजह से इस वक्त देश में नकदी का चलन जीडीपी के छठे हिस्से तक पहुंच चुका है। इसके साथ ही डिजिटल पेमेंट भी काफी बढ़ा है। 7 मई 2021 में सिस्टम में कैश बढ़ कर 29.4 लाख करोड़ रुपये पर पहुंच गया। इस बीच डिजिटल ट्रांजेक्शन 40.1 फीसदी बढ़ गया है। जानकारों का कहना है कि कोरोना महामारी की अनिश्चितता के कारण सर्तकता बरते हुए लोगों ने नकदी को प्राथमिकता दी है। इससे अर्थव्यवस्था में नकदी का चलन बढ़ा है।

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