नई कर व्यवस्था में भी एनपीएस निवेश पर ले सकते हैं छूट का लाभ
मुख्य बातें
- नया वित्त वर्ष शुरू हुए करीब दो महीने होने वाला है
- ऐसे में आपने नियोक्ता को जानकारी दे दी होगी कि आप नई या पुरानी कर व्यवस्था के साथ जाना चाहते हैं
- अगर, आपने नई कर व्यवस्था का चुनाव किया है तो तमाम..

नया वित्त वर्ष शुरू हुए करीब दो महीने होने वाला है। ऐसे में आपने नियोक्ता को जानकारी दे दी होगी कि आप नई या पुरानी कर व्यवस्था के साथ जाना चाहते हैं। अगर, आपने नई कर व्यवस्था का चुनाव किया है तो तमाम तरह के निवेश पर मिलने वाला कर छूट का फायदा नहीं मिलेगा लेकिन क्या आपको पता है कि नेशनल पेंशन सिस्टम (एनपीएस) में किए निवेश पर कर छूट का लाभ मिलता रहेगा। एनपीएस में किए निवेश पर आपको आयकर कानून 1961 के तहत लाभ मिलेगा।
नई टैक्स व्यवस्था के तहत कर की दरें
नई कर व्यवस्था के मुताबिक, 2.5 लाख रुपये तक आमदनी पर कोई आयकर नहीं है। 2.5 लाख रुपये से 5 लाख रुपये तक की आय पर 5 फीसदी, 5 लाख रुपये से लेकर 7.5 लाख रुपये तक की आय पर 10 फीसदी, 7.5 लाख रुपये से 10 लाख रुपये तक की आय पर 15 फीसदी, 10 लाख रुपये से 12.5 लाख रुपये की आय पर 20 फीसदी, 12.5 लाख रुपये से 15 लाख रुपये की आय पर 25 फीसदी और 15 लाख रुपये से लेकर इससे ऊपर की आय पर 30 फीसदी की दर से कर देना होगा।
अधिकतम निवेश 7.5 लाख तक
एक बात का ख्याल रखें कि अगर आपने नई कर व्यवस्था को अपनाया है तो ईपीएफ, एनपीएफ और सेवा निवर्तन निधि में निवेश 7.5 लाख रुपये से अधिक न हो। अगर इस से अधिक आप निवेश करेंगे तो जितनी रकम अधिक होगी उस पर कर का भुगतान करना होगा। इसके साथ उस रकम पर ब्याज से हुई आय पर भी आपको कर का भुगतान करना होगा।
इस तरह उदाहरण से समझें
मान लेते हैं कि आपकी सालाना बेसिक सैलरी 10 लाख रुपये है और आपकी कंपनी इसका 10 फीसदी यानी 100,000 रुपये एनपीएस में निवेश करती है। इस रकम के बराबर आप कर छूट का लाभ ले सकते हैं। इस तरह आप नई कर व्यवस्था में कम टैक्स बोझ के साथ निवेश पर कर छूट का लाभ लेकर अपनी करदेनदारी घटा सकते हैं।
धारा 80सीसीडी (2) के तहत छूट
नेशनल पेंशन सिस्टम (एनपीएस) में कंपनी जो योगदान करती है, उस पर आयकर छूट मिलती है। यह आयकर की धारा 80सीसीडी (2) के तहत मिलता है। नई व्यवस्था में भी मिलता रहेगा। आयकर कानून के मुताबिक, अगर कर्मचारी द्वारा कंपनी एनपीएस के टियर-1 खाते में योगदान करती है तो कर्मी को मूल वेतन औैर डीए के 10 फीसदी तक कर छूट मिलती है।
लेखक के बारे में
Drigraj Madheshiaदृगराज मद्धेशिया पिछले 21 वर्षों से पत्रकारिता जगत का एक विश्वसनीय चेहरा हैं। वर्तमान में 'लाइव हिन्दुस्तान' की बिजनेस टीम के एक महत्वपूर्ण सदस्य के रूप में, वे शेयर बाजार, कमोडिटी, पर्सनल फाइनेंस और यूटिलिटी सेक्टर पर अपनी गहरी पकड़ रखते हैं। वह कलम से बाजार की नब्ज टटोलने वाले एक पत्रकार हैं, जो शेयर बाजार से लेकर आपकी जेब (Personal Finance) तक, हर खबर को आसान बनाते हैं। टीवी, प्रिंट और डिजिटल मीडिया के अपने विस्तृत अनुभव के साथ, दृगराज जटिल मार्केट डेटा को आम पाठकों के लिए 'कुछ अलग' और आसान भाषा में पेश करने के लिए पहचाने जाते हैं। उन्होंने अपने करियर में हिन्दुस्तान, सहारा समय, दैनिक जागरण और न्यूज नेशन जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दी हैं। मूलत: उत्तर प्रदेश के कुशीनगर जिले के रहने वाले दृगराज मैथ्स बैकग्राउंड होने के कारण डेटा और कैलकुलेशन में माहिर हैं, जो बिजनेस पत्रकारिता के लिए एक बड़ा प्लस पॉइंट है। उन्होंने कॅरियर की शुरुआत गोरखपुर से सहारा समय साप्ताहिक से बतौर फ्रीलांसर की और बहुत ही जल्द सहारा समय उत्तर प्रदेश/उत्तराखंड के हिस्सा बन गए। इसके बाद छत्तीसगढ़ में वॉच न्यूज से जुड़े। टीवी को छोड़ हिन्दुस्तान अखबार के बरेली एडिशन की लॉन्चिंग टीम का हिस्सा बने। साढ़े सात साल की मैराथन पारी के बाद अगला पड़ाव न्यूज नेशन डिजिटल रहा। इसके बाद एक बार फिर हिन्दुस्तान दिल्ली से जुड़े और अब डिजिटल टीम का हिस्सा हैं। और पढ़ें


