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सख्ती : घर मिलने तक ईएमआई से राहत 'खेल' नहीं चलेगा

राष्ट्रीय आवास बैंक (एनएचबी) ने आवास वित्त कंपनियों से ब्याज सहायता योजना (इंट्रेस्ट सबवेंशन स्कीम) के तहत होम लोन नहीं देने का निर्देश दिया है। इससे बिल्डर निर्माणाधीन घर पर खरीदारों को कुछ समय तक ईएमआई से राहत देने के नाम पर खुद ब्याज का भुगतान करने की स्कीम नहीं चला पाएंगे। एनएचबी ने कहा है कि बिल्डर को कर्ज का वितरण सीधे तौर पर फ्लैट के निर्माण की प्रगति के हिसाब से होगा।

दरअसल, सबवेंशन स्कीम में फ्लैट की कीमत का पांच या दस फीसदी देकर घर खरीदने का मौका दिया जाता है। इसमें बिल्डर को यह लाभ होता है कि उसे स्वीकृत लोन का बड़ा हिस्सा लोन देने वाले बैंक या आवास वित्त कंपनियों से एकमुश्त मिल जाता है। इससे बिल्डर को अपने प्रोजेक्ट को पूरा करने के लिए फंड की जरूरत आसानी से पूरा हो जाती है। बिल्डर उस अवधि की ईएमआई के ब्याज का भुगतान कर्जदाता कंपनी को करता रहता है। इसे प्री-ईएमआई कहते हैं। ऐसी योजना में ईएमआई घर पर कब्जा मिलने के बाद शुरू होती है।

घर मिलने तक ईएमआई से छूट ने आकर्षण बढ़ा 
इस ब्याज सहायता योजना के जरिये बिल्डर खरीदारों को 10:90 और 5:95 स्कीम की पेशकश करते हैं।  इसमें घर खरीदारों को 10 फीसदी रकम जमा करके फ्लैट बुक करना होता है। बाकी रकम पर बैंक से कर्ज मिल जाता है। सबवेंशन में ग्राहक को फायदा होता है कि उसे घर तैयार होने तक या 12 से 18 माह के तय समय तक ईएमआई का कोई भुगतान नहीं करना पड़ता। घर खरीदार12 से 36 महीने की ईएमआई छूट के कारण इस योजना को अपनाते हैं, क्योंकि वे एक साथ ईएमआई और किराये का बोझ सहना नहीं चाहते हैं। 

क्या है इस योजना में पेंच
सबवेंशन स्कीम के तहत आवासीय कंपनियों और बिल्डर के बीच तय समय के लिए ही समझौता होता है। उस समय के बीच तक वित्तीय कंपनियां दिए हुए पैसे पर सिर्फ ब्याज लेती है। लेकिन, बिल्डर अगर किसी कारण बस समय पर कब्जा नहीं देता है तो प्री-ईएमआई का बोझ खरीदार के ऊपर आ जाता है। कई बिल्डरों के दिवालिया होने से भी संकट खुलकर सामने आ गया है।

नए प्रोजेक्ट के लिए फंड जुटाना होगा मुश्किल
सबवेंशन स्कीम के तहत लोन नहीं देने के निर्देश के बाद रियल एस्टेट में पूंजी की कमी होगी। अंतरिक्ष इंडिया ग्रुप के सीएमडी राकेश यादव ने कहा कि इससे बिल्डर के लिए नए प्रोजेक्ट के लिए फंड जुटाना मुश्किल होगा। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि अधिकांश बिल्डर इस योजना की पेशकश अब नहीं कर रहे हैं। बाजार में रेडी टू मूव प्रॉपर्टी के ऑप्शन उपलब्ध होने से डाउन पेमेंट या कंस्ट्रक्शन लिंक प्लान ही मुख्य रूप से चल रहा है।

फ्लैट में देरी से संकट
यह तय समय तक ईएमआई न देने का समझौता होता है। लेकिन बिल्डर अगर किसी कारणवश समय पर कब्जा नहीं देता है तो प्री-ईएमआई का बोझ खरीदार के ऊपर आ जाता है। कई बिल्डरों के दिवालिया होने से भी खरीदारों का यह संकट खुलकर सामने आ गया है।

कितने तरह के बुकिंग प्लान
प्रॉपर्टी की बिक्री के लिए बिल्डर कई तरह की प्लान घर खरीदारों के सामने रखते हैं। इसमें फ्लेक्सी प्लान, कंस्ट्रक्शन लिंक प्लान, डाउन पेमेंट प्लान, सबवेंशन प्लान, एश्योर्ड रिटर्न मुख्य है। हालांकि, अब एश्योर्ड रिटर्न प्लान करीब-करीब बंद किया जा चुका है। विशेषज्ञों का कहना है कि एक आम खरीदार को कंस्ट्रक्शन लिंक प्लान चुनना चाहिए। इसके तहत बिल्डर के प्रोजेक्ट कंस्ट्रक्शन के हिसाब से खरीदारों को पैसा देना होता है।जैसे-जैसे प्रोजेक्ट का काम आगे बढ़ता है बैंक से लोन की अदायगी की जाती है।

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  • Web Title:NHB crackdown on home loans under subvention scheme to affect buyers builders