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2 अप्रैल, 2020|9:32|IST

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बजट 2020: मोदी सरकार के कार्यकाल में इनकम टैक्स के मोर्चे पर अब तक ये हुए बदलाव

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एक फरवरी 2020 को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने अपना दूसरा बजट पेश किया।  अपने सबसे लंबे बजट भाषण में उन्होंने किसानों से लेकर युवा वर्ग को साधने की कोशिश की पर नौकरी पेशा या मध्यम आय वर्ग के लोगों को बजट 2020 से सबसे ज्यादा उम्मीद इनकम टैक्स में छूट की सीमा बढ़ाने को लेकर थी। निर्मला सीतारमण ने इस बार कर दाताओं के लिए दो तरह के स्लैब के विकल्प दिए हैं। आइए देखें मोदी सरकार के कार्यकाल में इनकम टैक्स के मोर्चे पर क्या-क्या बदलाव हुए...

2014 : इनकम टैक्स में छूट की सीमा 2 लाख से बढ़ाकर 2.5 लाख हुई

2014 के लोकसभा चुनाव में भारी जीत हासिल करने के मोदी सरकार का पहला बजट वित्तमंत्री अरुण जेटली ने पेश किया। जेटली ने इनकम टैक्स में छूट की सीमा 2 लाख से बढ़ाकर 2.5 लाख कर दी। वरिष्ठ नागरिकों के लिए यह सीमा 2.5 लाख से बढ़ाकर 3 लाख कर दी गई। वहीं 80 साल और उसके ऊपर के टैक्स में छूट की सीमा (5 लाख रूपये) में कोई परिवर्तन नहीं किया गया। 80 सी के तहत मिलने वाली छूट की सीमा एक लाख रुपये से बढ़ाकर 1.5 लाख वहीं होम लोन के लिए यह सीमा 1.5 लाख से 2 लाख कर दी गई। 

2015: एनपीएस में निवेश पर 50,000 रुपये की अतिरिक्त छूट

मोदी सरकार के दूसरे बजट में भी इनकम टैक्स में राहत दी गई। कर छूट के लिए स्वास्थ्य बीमा की लिमिट 5,000 से 25,000 रुपये अैर सिनियर सिटीजन के लिए 20,000 से बढ़ाकर 30,000 कर दी गई। यही नहीं इस बजट में  परिवहन भत्ता छूट (transport allowance exemption) में भी राहत दी गई। इसे 800 रुपये से बढ़ाकर 1,600 रुपये मासिक कर दी गई। इस बजट में वित्त मंत्री अरुण जेटली ने 80 CCD के तहत एनपीएस में निवेश पर 50,000 रुपये की अतिरिक्त छूट की भी घोषणा की। वहीं एक करोड़ से ऊपर इनकम वाले लोगों पर सरचार्ज 10 फीसद से बढ़ाकर 12 फीसद कर दिया गया।

2016: मकान किराए पर कर छूट में भारी वृद्धि

मोदी सरकार के तीसरे बजट में वित्त मंत्री अरुण जेटली ने 87A के तहत मिलने वाले टैक्स रीबेट को 2,000 से बढ़ाकर 5,000 रुपये कर दिया। यह उन लोगों के लिए था जिनकी सलाना कमाई 5 लाख से अधिक थी। वहीं 80GG के तहत मिलने मकान किराए पर मिलने वाले कर छूट को 24,000 से बढ़ाकर 60,000 रुपये सलाना कर दिया। इस साल भी एक करोड़ सलाना कमाई करने वालों पर सरचार्ज बढ़ाया गया और इसे 12% से 15% कर दिया गया। 


2017 : टैक्स स्लैब में बदलाव

मोदी सरकार के चौथे बजट में टैक्स स्लैब में बदलाव किया गया। 2.5 लाख - 5 लाख वाले स्लैब में टैक्स की दर 10% से घटाकर 5% कर दी गई, इससे इस आयवर्ग के लोगों को कुल 12,500 का फायदा हुआ। वित्तमंत्री ने 87A के तहत मिलने वाले टैक्स में छूट की सीमा 2,500 रुपये से बढ़ाकर 5,000 कर दी। यह छूट उन करदाताओं के लिए थी, जिनकी सलाना इनकम 3.5 लाख तक थी। जहां तक सरचार्ज की बात करें तो 50 लाख से एक करोड़ के बीच सलाना आय वाले लोगों पर 10% कर दिया गया।

2018: कई तरह के छूट का मिला लाभ

मोदी सरकार के पांचवें बजट में परिवहन भत्ते में मौजूदा छूट के बदले 40,000 रुपये की मानक कटौती और विविध चिकित्सा खर्चों की प्रतिपूर्ति की अनुमति दी, इस प्रकार करदाताओं को 5,800 रुपये का लाभ हुआ। वहीं इस बजट में सीनियर सिटिजन के लिए मेडिकल खर्च की सीमा 30,000 रुपये से बढ़ाकर 50,000 रुपये कर दी गई।
                       
वहीं बैंक, वरिष्ठ नागरिकों के लिए पोस्ट ऑफिस में जमा राशि पर मिलने वाले ब्याज पर छूट की सीमा 10,000 से बढ़ाकर 50,000 कर दी गई। जेटली ने गरीब और ग्रामीण परिवारों की शिक्षा और स्वास्थ्य आवश्यकताओं की देखभाल के लिए व्यक्तिगत आयकर और कारपोरेट कर पर मौजूदा 3% शिक्षा उपकर को 4% 'स्वास्थ्य और शिक्षा उपकर' से बदलने का भी प्रस्ताव रखा। इस बजट में लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन ( एक लाख से अधिक) पर टैक्स 10% कर दिया। 

2019: पांच लाख तक की आय करमुक्त

यह चुनावी साल था और इस बजट को कार्यकारी वित्त मंत्री पीयूष गोयल ने पेश किया। इस अंतरिम बजट में मध्यम वर्ग को इनकम टैक्स में बड़ी राहत दी गई। 5 लाख तक की आय को करमुक्त कर दिया गया। हालांकि टैक्स स्लैब में कोई बदलाव नहीं किया गया।                                                   
वहीं वेतनभोगी लोगों के लिए स्टैंडर्ड डिडक्शन 40000 से बढ़ाकर 50000 कर दिया गया। मानक कटौती में 10,000 रुपये की वृद्धि के परिणामस्वरूप 30% कर ब्रैकेट (अधिभार और उपकर को छोड़कर) में व्यक्तियों के लिए रु. 3,000 की कर बचत हुई। इसके बाद Modi 2.0 government में वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने पूर्ण बजट पेश किया जिसमें कर ढांचे में कोई बदलाव नहीं किया गया। 

2019-20: इनकम टैक्स में डबल स्लैब ऑप्शन

एक फरवरी 2020 को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने अपना दूसरा बजट पेश कर किया।  नौकरी पेशा या मध्यम आय वर्ग के लोगों को बजट 2020 से सबसे ज्यादा उम्मीद इनकम टैक्स में छूट की सीमा बढ़ाने को लेकर थी।  नई आयकर व्यवस्था वैकल्पिक होगी, करदाताओं को पुरानी व्यवस्था या नई व्यवस्था में से चुनने का विकल्प होगा। ढाई लाख रुपये तक की आय करमुक्त बनी रहेगी। ढाई लाख रुपये से पांच लाख रुपये तक की आय पर पांच प्रतिशत की दर से आयकर लागू होगा, लेकिन छूट के बाद पांच लाख रुपये तक की आय पर कर नहीं लगेगा। नई आयकर व्यवस्था वैकल्पिक होगी, करदाताओं को पुरानी व्यवस्था या नई व्यवस्था में से चुनने का विकल्प होगा। यानी यह बदलाव  शर्तों के साथ है। इसके लिए आपको निवेश पर मिलने वाले छूट का लाभ छोड़ना होगा। अगर आप निवेश में छूट लेते हैं, तो टैक्स की पुरानी दर ही मान्य होगी। यानी 15 लाख रुपये सलाना कमाने वाले को करीब 78 हजार रुपये का फायदा संभावित है।

 

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  • Web Title:new income tax slab 2020 21 changed changes so far on income tax front during tenure of Modi government