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RBI के उपायों के बाद मोदी सरकार स्लोडाउन को लेकर हुई सक्रिय, वित्त मंत्री के साथ की समीक्षा

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अर्थव्यवस्था में छा रही सुस्ती को दूर करने के लिए केंद्र सरकार सक्रिय हो गई है। इसी मुहिम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण व शीर्ष अधिकारियों के साथ अर्थव्यवस्था की विस्तृत समीक्षा की। 

सूत्रों ने कहा, प्रधानमंत्री ने 73वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर लाल किले से संबोधन के बाद अर्थव्यवस्था की ताजा स्थिति पर वित्त मंत्री के साथ विचार मंथन किया। इसमें वित्त मंत्रालय के सभी वरिष्ठ अधिकारी भी शामिल थे। सूत्रों ने कहा कि यह बैठक में वर्तमान आर्थिक सुस्ती की प्रकृति और इसके दीर्घकालिक प्रभावों पर विचार किया गया गया। उम्मीद लगाई जा रही है कि सरकार जल्दी ही अर्थव्यवस्था के कुछ क्षेत्रों के लिए कुछ खास प्रोत्साहन उपायों की घोषणा कर सकती है। गौरतलब है कि 2018-19 में आर्थिक वृद्धि घट कर 6.8 प्रतिशत पर आ गई थी। यह 2014-15 के बाद की न्यूनतम दर है। 2018-19 की आखिरी तिमाही में भी विकास दर 5.8 फीसदी रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि इस समय उपभोक्ताओं के विश्वास का स्तर गिर रहा है और विदेशी निवेश भी एक ऊंचाई पर पहुंच कर ठहर गया है। रिजर्व बैंक ने चालू वित्त वर्ष की आर्थिक वृद्धि अनुमान को 7.0 प्रतिशत से घटा कर 6.9 प्रतिशत कर दिया है। देश में मानसून के असामान्य स्तर और कृषि पर असर को देखते हुए ग्रामीण अर्थव्यवस्था में भी नरमी रह सकती है।

1. 5.8 फीसदी रही 2018-19 की आखिरी तिमाही में विकास दर 
2. 6.9 प्रतिशत किया विकास दर अनुमान 2019-20 के लिए रिजर्व बैंक ने
3. 19 साल में सबसे कम रही जुलाई 2019 में वाहनों की बिक्री देश में

इस सेक्टर्स पर सबसे ज्यादा असर  
- वाहन और कलपुर्जा क्षेत्र (ऑटो सेक्टर)
- रियल एस्टेट सेक्टर 
- पूंजीगत सामान 
- एफएमसीजी सेक्टर 
- गैर बैंकिंग वित्तीय क्षेत्र

आरबीआई के उपायों के बाद सरकार पर दरोमदार
विशेषज्ञों का कहना है कि केंद्रीय बैंक ब्याज दर में इस साल 1.10 प्रतिशत की कटौती कर चुका है ताकि आर्थिक वृद्धि को तेज करने प्रयासों में मदद मिले। इसके बाद निजी क्षेत्र सरकार की ओर से राहत के उपायों की उम्मीद कर रहा है। केंद्र ने सरकारी बैंकों की कर्ज देने की स्थिति सुधारने के लिए चालू वित्त वर्ष में उन्हें 70,000 करोड़ रुपये का पूंजी देने की घोषणा की है। बैंकों में एनपीए की स्थिति नियंत्रण में आने की उम्मीद है। लेकिन गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनियों का वित्तीय संकट अब भी बना हुआ है,जिससे उपभोक्ता सामान और आवास के लिए कर्ज की सुविधा प्रभावित हुई है।

मंदी की आहट से हिला अमेरिकी शेयर बाजार 
आर्थिक मंदी की आहट बढ़ने से अमेरिकी शेयर बाजार और मुद्रा डॉलर हिल गए हैं। अमेरिकी प्रमुख सूचकांक डाऊजोंस के लिए बुधवार इस साल का सबसे बुरा दिन रहा। यह सूचकांक 800 अंक या 3.1 प्रतिशत गिर कर 24,479.42 पर आ गया। टोक्यो शेयर बाजार एक प्रतिशत से अधिक और सिडनी करीब तीन प्रतिशत गिर कर बंद हुआ। जकार्ता बाजार में गिरावट रही। विशेषज्ञ 2008 के बाद फिर मंदी की आहट से डरे हुए हैं।

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  • Web Title:Modi govt is not active for slowdown in economy