केंद्र से राज्यों को मिलेंगे 46,039 करोड़ रुपये, यूपी-बिहार को सबसे ज्यादा, जीएसटी क्षतिपूर्ति के 15,340 करोड़ रुपये जारी
वित्त मंत्रालय ने कहा कि उसने केन्द्रीय करों और शुल्कों में राज्यों के हिस्से की 46,038.70 करोड़ रुपये की मई माह की किस्त को मंजूरी दे दी है। वहीं, सूत्रों ने बताया कि माल एवं सेवाकर (जीएसटी)...
वित्त मंत्रालय ने कहा कि उसने केन्द्रीय करों और शुल्कों में राज्यों के हिस्से की 46,038.70 करोड़ रुपये की मई माह की किस्त को मंजूरी दे दी है। वहीं, सूत्रों ने बताया कि माल एवं सेवाकर (जीएसटी) क्षतिपूर्ति के रूप में राज्यों को इस वित्त वर्ष में अब तक 15,340 करोड़ रुपये जारी किए जा चुके हैं। वित्त मंत्रालय ने एक ट्वीट में कहा, ''मई माह के लिए राज्यों के हिस्से की जारी की गई किस्त अप्रैल के ही समान है। इसकी गणना सरकार की मौजूदा वास्तविक प्राप्तियों के आधार पर नहीं बल्कि वर्ष 2020- 21 के बजट अनुमानों के आधार पर की गई है।
कोरोना वायरस महामारी के खिलाफ लड़ाई में काम आएगी यह रकम
इसमें कहा गया है कि केन्द्र सरकार का सबसे बड़ा उद्देश्य कोरोना वायरस महामारी के खिलाफ लड़ाई में राज्यों के राजस्व की रक्षा करने के साथ ही उनकी नकदी जरूरतों को पूरा करना है। वित्त मंत्रालय के सूत्र बताते हैं कि जहां तक राज्यों को जीएसटी क्षतिपूर्ति की बात है 2019- 20 में नवंबर 2019 तक राजयों को 1,20,498 करोड़ रुपये जारी किए जा चुके हैं जबकि इससे पिछले वर्ष 2018- 19 में पूरे साल के दौरान 69,275 करोड़ रुपये जारी किए गये। उससे पहले 2017- 18 में 41,146 करोड़ रुपये राज्यों को दिये गये। जीएसटी प्रणाली एक जुलाई 2017 से लागू है।
जम्मू और कश्मीर तथा लद्दाख के लिए एक प्रतिशत राशि तय
इस साल के बजट में केन्द्रीय करों में राज्यों का हिस्सा 7.84 लाख करोड़ रुपये रहने का अनुमान लगाया गया है। 15वें वित्त आयोग ने विभाजित होने वाले राजस्व पूल में से राज्यों का हिस्सा 41 प्रतिशत रखने की सिफारिश की है। इसके अलावा नवगठित केन्द्र शासित प्रदेश जम्मू और कश्मीर तथा लद्दाख के लिए एक प्रतिशत राशि तय की गई है। इससे पहले 14वें वित्त आयोग ने केन्द्रीय करों में राज्यों का हिस्सा 42 प्रतिशत रखने का सुझाव दिया था। वित्त मंत्रालय ने एक अन्य ट्वीट में कहा है, ''वित्त मंत्रालय ने केन्द्रीय करों और शुल्कों में राज्यों के हिस्से के लिए मई माह की किस्त के तौर पर 46,038.70 करोड़ रुपये मंजूरी के आदेश जारी किए हैं।
देखें किस राज्य को कितना दे रही केंद्र सरकार
| राज्य | मई माह की किस्त( करोड़ रुपये) |
| उत्तर प्रदेश | 8,255.19 |
| बिहार | 4,631.96 |
| मध्यप्रदेश | 3630.6 |
| पश्चिम बंगाल | 3,461.65 |
| महाराष्ट्र | 2824.47 |
| आंध्र प्रदेश | 1,892.64 |
| असम | 1,441.48 |
| गुजरात | 1,564.40 |
| केरल | 894.53 |
| हरियाणा | 498.15 |
| हिमाचल प्रदेश | 367.84 |
| झारखंड | 1525.27 |
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Drigraj Madheshiaदृगराज मद्धेशिया पिछले 21 वर्षों से पत्रकारिता जगत का एक विश्वसनीय चेहरा हैं। वर्तमान में 'लाइव हिन्दुस्तान' की बिजनेस टीम के एक महत्वपूर्ण सदस्य के रूप में, वे शेयर बाजार, कमोडिटी, पर्सनल फाइनेंस और यूटिलिटी सेक्टर पर अपनी गहरी पकड़ रखते हैं। वह कलम से बाजार की नब्ज टटोलने वाले एक पत्रकार हैं, जो शेयर बाजार से लेकर आपकी जेब (Personal Finance) तक, हर खबर को आसान बनाते हैं। टीवी, प्रिंट और डिजिटल मीडिया के अपने विस्तृत अनुभव के साथ, दृगराज जटिल मार्केट डेटा को आम पाठकों के लिए 'कुछ अलग' और आसान भाषा में पेश करने के लिए पहचाने जाते हैं। उन्होंने अपने करियर में हिन्दुस्तान, सहारा समय, दैनिक जागरण और न्यूज नेशन जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दी हैं। मूलत: उत्तर प्रदेश के कुशीनगर जिले के रहने वाले दृगराज मैथ्स बैकग्राउंड होने के कारण डेटा और कैलकुलेशन में माहिर हैं, जो बिजनेस पत्रकारिता के लिए एक बड़ा प्लस पॉइंट है। उन्होंने कॅरियर की शुरुआत गोरखपुर से सहारा समय साप्ताहिक से बतौर फ्रीलांसर की और बहुत ही जल्द सहारा समय उत्तर प्रदेश/उत्तराखंड के हिस्सा बन गए। इसके बाद छत्तीसगढ़ में वॉच न्यूज से जुड़े। टीवी को छोड़ हिन्दुस्तान अखबार के बरेली एडिशन की लॉन्चिंग टीम का हिस्सा बने। साढ़े सात साल की मैराथन पारी के बाद अगला पड़ाव न्यूज नेशन डिजिटल रहा। इसके बाद एक बार फिर हिन्दुस्तान दिल्ली से जुड़े और अब डिजिटल टीम का हिस्सा हैं। और पढ़ें


