कोरोना का प्रभाव: पलायन से छोटे कस्बों और शहरों में बढ़ सकती है घरों की मांग

May 25, 2020 10:06 am ISTDrigraj Madheshia नई दिल्ली | एजेंसी ,
share

कोरोना वायरस महामारी के कारण बड़े शहरों (मेट्रो सिटी) से शुरू हुए पलायन के कारण रिवर्स माइग्रेशन को बढ़ावा मिला है, जिससे दूसरी और तीसरी श्रेणी के शहरों में प्रारंभिक तौर पर घरों की मांग बढ़ने की...

कोरोना का प्रभाव: पलायन से छोटे कस्बों और शहरों में बढ़ सकती है घरों की मांग

कोरोना वायरस महामारी के कारण बड़े शहरों (मेट्रो सिटी) से शुरू हुए पलायन के कारण रिवर्स माइग्रेशन को बढ़ावा मिला है, जिससे दूसरी और तीसरी श्रेणी के शहरों में प्रारंभिक तौर पर घरों की मांग बढ़ने की संभावना है। रियल एस्टेट कंसलटेंट फर्म एनरॉक की एक रिपोर्ट में यह बात कही गई है। रिपोर्ट के मुताबिक मौजूदा समय में भारत के कुल आवासीय बाजार का 70 फीसदी हिस्सा शीर्ष सात शहरों में है, जबकि शेष 30 फीसदी हिस्सा दूसरी और तीसरी श्रेणी के शहरों में है।

यह भी पढ़ें: वित्त मंत्री का ऐलान- शहरी गरीबों और प्रवासी मजदूरों को मिलेंगे सस्ते किराये पर घर, अफोर्डेबल रेंटल हाउसिंग स्कीम लाएगी मोदी सरकार

भविष्य में आवासीय बाजार का यह औसत बदल सकता है। इसमें कहा गया है कि राष्ट्रव्यापी बंद के दौरान होने वाला पलायन सामान्य दिनों की अपेक्षा होने वाले पलायन से एकदम उलट है। एनरॉक के चेयरमैन अनुज पुरी ने कहा, प्रवासी मजदूरों के बीच रिवर्स माइग्रेशन पहले से ही बहुत दिखाई दे रहा है। यह प्रवृत्ति उन कुशल पेशेवरों में भी दिख सकती है, जो अधिकृत रूप से नौकरी से बाहर हो चुके हैं या उनके बार हो जाने की संभावना है। छोटे कस्बों और शहरों में घरों की मांग बढ़ सकती है।

यह भी पढ़ें: लॉकडाउन में पैसों की दिक्कत तो क्रेडिट कार्ड से भी दे सकते हैं घर का किराया, जानिए कैसा है यह विकल्प

उन्होंने कहा कि अमेरिका, यूरोपीय देशों में नौकरी की संभावना कम होने के बाद बड़ी संख्या में एनआरआई के भारत लौटने की संभावना है। इन एनआरआई के लिए शीर्ष सात शहर पहली प्राथमिकता रहेंगे, लेकिन इनमें से कई अपने परिवारों के नजदीक छोटे शहरों में रहने के बारे में भी विचार करेंगे।

Drigraj Madheshia

लेखक के बारे में

Drigraj Madheshia

दृगराज मद्धेशिया पिछले 21 वर्षों से पत्रकारिता जगत का एक विश्वसनीय चेहरा हैं। वर्तमान में 'लाइव हिन्दुस्तान' की बिजनेस टीम के एक महत्वपूर्ण सदस्य के रूप में, वे शेयर बाजार, कमोडिटी, पर्सनल फाइनेंस और यूटिलिटी सेक्टर पर अपनी गहरी पकड़ रखते हैं। वह कलम से बाजार की नब्ज टटोलने वाले एक पत्रकार हैं, जो शेयर बाजार से लेकर आपकी जेब (Personal Finance) तक, हर खबर को आसान बनाते हैं। टीवी, प्रिंट और डिजिटल मीडिया के अपने विस्तृत अनुभव के साथ, दृगराज जटिल मार्केट डेटा को आम पाठकों के लिए 'कुछ अलग' और आसान भाषा में पेश करने के लिए पहचाने जाते हैं। उन्होंने अपने करियर में हिन्दुस्तान, सहारा समय, दैनिक जागरण और न्यूज नेशन जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दी हैं। मूलत: उत्तर प्रदेश के कुशीनगर जिले के रहने वाले दृगराज मैथ्स बैकग्राउंड होने के कारण डेटा और कैलकुलेशन में माहिर हैं, जो बिजनेस पत्रकारिता के लिए एक बड़ा प्लस पॉइंट है। उन्होंने कॅरियर की शुरुआत गोरखपुर से सहारा समय साप्ताहिक से बतौर फ्रीलांसर की और बहुत ही जल्द सहारा समय उत्तर प्रदेश/उत्तराखंड के हिस्सा बन गए। ​इसके बाद छत्तीसगढ़ में वॉच न्यूज से जुड़े। टीवी को छोड़ हिन्दुस्तान अखबार के बरेली एडिशन की लॉन्चिंग टीम का हिस्सा बने। साढ़े सात साल की मैराथन पारी के बाद अगला पड़ाव न्यूज नेशन डिजिटल रहा। इसके बाद एक बार फिर हिन्दुस्तान दिल्ली से जुड़े और अब डिजिटल टीम का हिस्सा हैं। और पढ़ें

जानें Hindi News, Business News, Budget 2026, बजट 2026 Live, Income Tax Live Updates की लेटेस्ट खबरें, शेयर बाजार का लेखा-जोखा, Share Market के लेटेस्ट अपडेट्स Investment Tips के बारे में सबकुछ।,