खादी का कारोबार साढ़े 88 हजार करोड़ रुपये के पार, पीपीई किट में भी Khadi का इस्तेमाल
मुख्य बातें
- आजादी की लड़ाई में कभी महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाली खादी अब कोरोना के खिलाफ जंग में भी उतर चुकी है
- खादी परिधाान, सौंदर्य प्रसाधन , साबुन और शैंपू बनाने वाला खादी इंडिया ने खादी का इस्तेमाल..

आजादी की लड़ाई में कभी महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाली खादी अब कोरोना के खिलाफ जंग में भी उतर चुकी है। खादी परिधाान, सौंदर्य प्रसाधन , साबुन और शैंपू बनाने वाला खादी इंडिया ने खादी का इस्तेमाल करते हुए पीपीई किट तैयार किया है, जो अभी परीक्षण के दौर पर है और इसकी मंजूरी की प्रक्रिया चल रही है। यहीं नहीं कोरोना वायरस को मारने के लिए खादी इंडिया ने हैंड सैनिटाइजर भी बाजार में उतार दिया है। समय के साथ खादी इंडिया अब एक बड़ा ब्रांड बन गया है। खादी एवं ग्रामोद्योग आयोग-केवीआईसी का वित्त वर्ष 2019-20 में कुल कारोबार 88 हजार 887 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है।
वित्त वर्ष 2015-16 में ग्रामोद्योगों के उत्पादों का उत्पादन 33 हजार 425 करोड़ रुपये था और यह उत्पादन वित्त वर्ष 2019-20 में 96 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी के साथ 65 हजार 393.40 करोड़ रुपये हो गया। वित्त वर्ष 2015-16 में ग्रामोद्योगों के उत्पादों की बिक्री 40 हजार 385 करोड़ रुपये थी, जिसमें लगभग 110 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई और यह वित्त वर्ष 2019-20 में 84 हजार 675.39 करोड़ रुपये हो गया।
केवीआईसी के अध्यक्ष विनय कुमार सक्सेना ने शनिवार को यहां कहा कि खादी उद्योग को पुनर्जीवित करने के सरकार के निरंतर प्रयासों और खादी को दैनिक जीवन की आवश्यकता के रूप में अपनाने के लिए, प्रधानमंत्री की अपील करने के परिणामस्वरूप केवीआईसी लगातार विकास कर रहा है। सक्सेना ने बताया कि खादी परिधानों के अलावा, ग्राम उद्योग उत्पादों की एक विस्तृत श्रृंखला जैसे सौंदर्य प्रसाधन , साबुन और शैंपू ,आयुर्वेदिक दवाएं , शहद , तेल , चाय , अचार , पापड़, हैंड सैनिटाइजर , मिष्ठान्न ,खाद्य पदार्थ और चमड़े की वस्तुओं ने भी बड़ी संख्या में देश-विदेश के उपभोक्ताओं को आकर्षित किया है। इसके परिणामस्वरूप, पिछले पांच वर्षों में ग्रामोद्योग उत्पादों के उत्पादन और बिक्री में लगभग दोगुनी वृद्धि दर्ज की गई है।
पीपीई किट में खादी का इस्तेमाल
उन्होंने कहा कि खादी इंडिया ने खादी का इस्तेमाल करते हुए पीपीई किट तैयार की है, जो अभी परीक्षण के दौर पर है और इसकी मंजूरी की प्रक्रिया चल रही है। आयोग ने अभी तक खादी किट बाजार में जारी नहीं की है। खादी इंडिया ने कोरोना महामारी के खिलाफ संघर्ष में योगदान के लिए माास्क का निमार्ण किया है। यह पूरी तरह से सुरक्षित है और इनको बनाने में हाथ से बुने कपड़े का इस्तेमाल किया जाता है । केवीआईसी ने विभिन्न राज्य सरकारों, सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों जैसे एयर इंडिया , आईओसी , ओएनजीसी, आरईसी और अन्य, कॉलेजों, विश्वविद्यालयों , भारतीय रेल और स्वास्थ्य मंत्रालय को अपने उत्पाद बेचे हैं।
लेखक के बारे में
Drigraj Madheshiaदृगराज मद्धेशिया पिछले 21 वर्षों से पत्रकारिता जगत का एक विश्वसनीय चेहरा हैं। वर्तमान में 'लाइव हिन्दुस्तान' की बिजनेस टीम के एक महत्वपूर्ण सदस्य के रूप में, वे शेयर बाजार, कमोडिटी, पर्सनल फाइनेंस और यूटिलिटी सेक्टर पर अपनी गहरी पकड़ रखते हैं। वह कलम से बाजार की नब्ज टटोलने वाले एक पत्रकार हैं, जो शेयर बाजार से लेकर आपकी जेब (Personal Finance) तक, हर खबर को आसान बनाते हैं। टीवी, प्रिंट और डिजिटल मीडिया के अपने विस्तृत अनुभव के साथ, दृगराज जटिल मार्केट डेटा को आम पाठकों के लिए 'कुछ अलग' और आसान भाषा में पेश करने के लिए पहचाने जाते हैं। उन्होंने अपने करियर में हिन्दुस्तान, सहारा समय, दैनिक जागरण और न्यूज नेशन जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दी हैं। मूलत: उत्तर प्रदेश के कुशीनगर जिले के रहने वाले दृगराज मैथ्स बैकग्राउंड होने के कारण डेटा और कैलकुलेशन में माहिर हैं, जो बिजनेस पत्रकारिता के लिए एक बड़ा प्लस पॉइंट है। उन्होंने कॅरियर की शुरुआत गोरखपुर से सहारा समय साप्ताहिक से बतौर फ्रीलांसर की और बहुत ही जल्द सहारा समय उत्तर प्रदेश/उत्तराखंड के हिस्सा बन गए। इसके बाद छत्तीसगढ़ में वॉच न्यूज से जुड़े। टीवी को छोड़ हिन्दुस्तान अखबार के बरेली एडिशन की लॉन्चिंग टीम का हिस्सा बने। साढ़े सात साल की मैराथन पारी के बाद अगला पड़ाव न्यूज नेशन डिजिटल रहा। इसके बाद एक बार फिर हिन्दुस्तान दिल्ली से जुड़े और अब डिजिटल टीम का हिस्सा हैं। और पढ़ें


