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जेट एयरवेज: कभी थी देश की दूसरी सबसे बड़ी एयरलाइन, अब होगी नीलाम, जानें कहां हुई चूक

कुछ समय पहले तक नरेश गोयल की जेट एयरवेज देश की दूसरी सबसे बड़ी एयरलाइन हुआ करती थी लेकिन अब घरेलू और इंटरनेशनल सभी उड़ानें बंद है। कभी एक दिन में 600 से अधिक फ्लाइट्स उड़ाने वाली जेट को बैंक कर्जदाताओं के फंड्स देने से मना करने के बाद अपना ऑपरेशन अस्थायी तौर पर बंद करना पड़ा। जेट एयरवेज की आखिरी फ्लाइट ने बुधवार रात को उड़ान भरी। 

एयरलाइन ने पास ईंधन और अन्य सर्विस और रोजाना के खर्चों के लिए पैसा चुकाने के लिए नहीं था जिसके कारण बंद करना पड़ा। रिपोर्ट के मुताबिक जेट एयरवेज को रोजाना 21 करोड़ रुपए का नुकसान हो रहा था। उसका कर्ज और देनदारी 15000 करोड़ रुपए तक पहुंच गया था। अस्थायी तौर पर बंद होने के कारण 16,500 कर्मचारियों पर नौकरी जाने का खतरा बढ़ गया है। जेट एयरवेज के घरेलू उड़ानें बंद होने से हवाई किरायों में भी बढ़ोतरी हो गई है।

पिछले एक दशक में किंगफिशर एयरलाइन के बाद कामकाज बंद करने वाली जेट एयरवेज दूसरी बड़ी कंपनी बन गई है। शराब कारोबारी विजय माल्या की किंगफिशर ने साल 2012 में कामकाज बंद कर दिया था। अब 25 साल से अपनी सेवाएं दे रही जेट एयरवेज ने अपनी उड़ाने अस्थायी तौर पर बंद कर दी है। हालांकि अभी भी जेट के फिर से उड़ान भरने की उम्मीदें खत्म नहीं हुई है। बैंक उसे बचाए रखने के लिए बोली प्रक्रिया शुरू करने के लिए प्रतिबद्धता दिखा रहे हैं। 

अब 25 साल से अपनी वर्ल्ड क्लास सेवाओं को लिए जानी जाने वाली एयरलाइन के साथ क्या गलत हुआ। आइए जानते हैं क्या हुआ गलत.. 

कैसे हुई जेट की शुरूआत
जेट ने टैक्सी सर्विस ऑपरेटर को तौर पक 1993 में कारोबार शुरू किया। जेट को 20 फीसदी इक्विटी योगदान  कुवैत एयरवेज और गल्फ एयर से मिला जो बाद में बाहर भी हो गए। साल 2004 में चेन्नई-कोलंबो रूट बढ़ने से जेट का ओवरसीज बिजनेस चलने लगा। साल 2005 में कंपनी अपना आईपीओ लेकर आई। जेट ने साल 2007 में एयर सहारा को 1,450 करोड़ रुपए में खरीदा।

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शेयर होल्डिंग 
नरेश गोयल के इस्तीफे के बाद गोयल की जेट एयरवेज में 51 फीसदी हिस्सेदारी घटकर 25.5 फीसदी पर आ गई है। अब जेट एयरवेज पर 51 फीसदी नियंत्रण बैंकों का है। एतिहाद एयरवेज के पास 24 फीसदी हिस्सेदारी है और बाकी पब्लिक के पास है। फिलहाल जेट एयरवेज पर कई पब्लिक और विदेशी बैंकों का कर्ज है। इसमें पब्लिक सेक्टर बैंक में केनरा बैंक, एसबीआई, बैंक ऑफ इंडिया, सिंडिकेट बैंक, इंडियन ओवरसीज बैंक, इलाहबाद बैंक शामिल हैं। 

मार्केट शेयर 
साल 2010 में जेट एयरवेज देश की तीसरी बड़ी एयरलाइन थी। जेट की पैसेंजर मार्कट में हिस्सेदारी 22.6 फीसदी थी। अक्टूबर 2017 में जेट एयरवेज दूसरे स्थान पर आ गई थी। वह 52 डेस्टिनेशन पर अपनी फ्लाइट उड़ा रही थी। कर्ज सकंट से पहले जेट का मार्केट शेयर 11 फीसदी था। जेट के पास दिसंबर तक 119 एयरक्राफ्ट थे। 

कहां हुई गलती
इंडस्ट्री का मानना है कि जेट की पहली गलती साल 2007 में एयर सहारा खरीदना था। इससे जेट को कैश की कमी हुई और वह अतिरिक्त आय को प्रतियोगी कंपनियों से लड़ने के लिए इस्तेमाल नहीं कर पाया। 

जेट एयरवेज का एयरबस A330  और बोईंग  777 प्लेन को खरीदना उसकी दूसरी गलती माना जाता है। नरेश गोयल ने कस्टमर को बेहतर सर्विस देने के लिए 400 सीट की जगह 308 सीट वाले एयरक्राफ्ट का चुनाव किया। इसका असर जेट की आय पर पड़ा। 

आगे क्या होगा
भारतीय स्टेट बैंक (सीबीआई) के नेतृत्व में 26 ऋणदाताओं के एक संघ ने संभावित निवेशकों से हिस्सेदारी की नीलामी के लिए बोलियां मंगाई हैं। अभी 4 इक्विटी फंड हाउस ने अपना जेट में हिस्सेदारी खरीदने को लेकर बोली में दिलचस्पी दिखाई है। ये चार बोलीदाता एतिहाद एयरवेज, राष्ट्रीय निवेश कोष एनआईआईएफ, निजी क्षेत्र के टीपीजी कैपिटल और इंडिगो पार्टनर हैं। बोलीदाताओं को 10 मई तक अपनी बोली जमा करनी है। जेट एयरवेज के ऋणदाताओं ने हिस्सेदारी की बिक्री के लिए बोली प्रक्रिया के सफलतापूर्वक पूरी होने की उम्मीद जाहिर की। इससे जेट को लेकर थोड़ी उम्मीदें अभी भी हैं। 
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  • Web Title:Jet airways once 2nd largest airline will now face auction