DA Image

अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

मानसिक और पुरानी फैमिली बीमारियों के लिए भी बीमा कंपनी देगी कवर, जानें डिटेल्स

insurance policy

बीमा नियामक इरडा ने तमाम बहानों से स्वास्थ्य बीमा करने से इनकार करने वाली कंपनियों पर नकेल कसी है। इरडा ने एकअधिसूचना जारी कर कहा है कि कंपनियां वंशानुगत या मानसिक रोगों को स्वास्थ्य बीमा के दायरे से बाहर नहीं रख सकती हैं। रजोनिवृत्ति जैसी महिलाओं से जुड़ी बीमारियों पर भी कंपनियां कवर से इनकार नहीं करेंगे। इरडा ने कहा है कि पॉलिसी लेने के बाद भी कोई बीमारी होती है तो वह भी बीमा के दायरे में होगी। लिहाजा ऐसे जो भी उत्पाद इन नियमों पर खरे नहीं उतरते हैं, उन्हें कंपनियों को वापस लेना पड़ेगा।

महिलाओं को दी राहत
इरडा ने महिलाओं को विशेष राहत दी है और प्रौढ़ता या मेनोपॉज (रजोनिवृत्ति) से जुड़ी बीमारियों या विसंगतियों को भी हेल्थ इंश्योरेंस प्लान के दायरे में रखने का आदेश दिया है। दरअसल, कानूनी तौर पर बीमा कंपनियों के लिए मानसिक बीमारियों को करना जरूरी है, लेकिन वे ज्यादातर बीमारियों पर ऐसा करने से मना कर देती हैं। 

पॉलिसी की पूर्व बीमारी भी दायरे से बाहर
प्री एक्जिस्टिंग डिसीज (पॉलिसी के पूर्व की बीमारियों) को ही बीमा के दायरे से बाहर रखा जा सकता है, जिनमें क्लेम के दावे के पहले कम से कम दो साल का वेटिंग पीरियड हो। डायग्नोस्टिक टेस्ट, निसंतानता से जुड़ा उपचार, वजन नियंत्रण से जुड़ी सर्जरी, प्लास्टिक सर्जरी इसमें शामिल है।

जीवन रक्षक प्रणाली का उपचार भी
इरडा मुताबिक, कोई शख्स जीवन रक्षक उपकरण या प्रणाली पर है तो उसका खर्च भी बीमा के दायरे में होगा, जब तक कि इलाज कर रहा डॉक्टर यह न कह दे कि मरीज ब्रेन डेड की स्थिति में पहुंच गया है। यही नहीं, ओरल कीमोथेरेपी और रोबोटिक सर्जरी का खर्च भी बीमा के तहत होगा।

डिप्रेशन जैसी बीमारी के लिए भी मिलेगा कवर
मानसिक रोग, तनाव या मनोवैज्ञानिक विसंगति और न्यूरो डिजनरेटिव डिसऑर्डर जैसी बीमारियों के लिए कवर देना होगा। अगर कोई व्यक्ति अवसाद रोधी दवाएं या अन्य उपचार पर खर्च कर रहा है तो उसे बीमा से बाहर नहीं रखा जा सकता। यही नहीं चिकित्सकीय सलाह या उपचार न लेने को आधार पर कंपनियां क्लेम से मना नहीं कर सकतीं। 

31 मई तक खाते में रखें इतना पैसा, नहीं तो हो जाएगा 2 लाख का नुकसान

डायबिटीज पर वेटिंग पीरियड 30 दिन से ज्यादा नहीं
हाइपरटेंशन, डायबिटीज, हृदय रोग के लक्षणों जैसी जीवनशैली की बीमारियों में वेटिंग पीरियड 30 दिन से ज्यादा नहीं हो सकता, बशर्ते ये प्री एक्जिस्टिंग डिसीज या पॉलिसी लेने के वक्त घोषित की गई हों। 

स्पोर्ट्स एडवेंचर पर सुरक्षा कवच नहीं मिलेेगा

अगर आप किसी पेशेवर के तौर पर जोखिम भरे या एडवेंचर स्पोर्ट्स जैसे पैराग्लाइडिंग, पर्वतारोहण, स्कूबा डाइविंग रैफ्टिंग आदि में हिस्सा लेते हैं और चोट के कारण उपचार की जरूरत होती है तो दायरे में नहीं आएगा। .

स्वास्थ्य बीमा में ये बीमारियां भी कवर नहीं होगी

मिरगी, हेपटाइटिस बी, अल्जाइमर, पार्किन्सन, क्रोनिक लीवर या किडनी के रोग, एचआईवी एड्स भी स्वास्थ्य बीमा के दायरे में नहीं होता है। इसका इलाज बीमा धारक को खुद के खर्च पर करना होगा। 

प्री एक्जिस्टिंग डिसीज (पॉलिसी के पूर्व की बीमारियों) को ही बीमा के दायरे से बाहर रखा जा सकता है, जिनमें क्लेम के दावे के पहले कम से कम दो साल का वेटिंग पीरियड हो। डायग्नोस्टिक टेस्ट, निसंतानता से जुड़ा उपचार, वजन नियंत्रण से जुड़ी सर्जरी, प्लास्टिक सर्जरी इसमें शामिल है।

इरडा मुताबिक, कोई शख्स जीवन रक्षक उपकरण या प्रणाली पर है तो उसका खर्च भी बीमा के दायरे में होगा, जब तक कि इलाज कर रहा डॉक्टर यह न कह दे कि मरीज ब्रेन डेड की स्थिति में पहुंच गया है। यही नहीं, ओरल कीमोथेरेपी और रोबोटिक सर्जरी का खर्च भी बीमा के तहत होगा। 

वॉलेट कंपनी कर रही है आपको परेशान, देना पड़ेगा एक लाख रुपए तक हर्जाना

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title:IRDA add more family diseases in insurance policy