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21 अक्तूबर, 2020|4:35|IST

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छोटे कामगारों के लिए बीमा योजना जल्द, 5 लाख की पॉलिसी पर कंपनियों को खर्च करने होंगे 5000

4.7 फीसदी जीडीपी के अनुपात में है देश में बीमा उपलब्धता, वर्तमान में 43 करोड़ लोग स्वास्थ्य बीमा के दायरे में हैं

भारतीय बीमा नियामक एवं विकास प्राधिकरण (इरडा) के चेयरमैन सुभाष खुंटिया ने बीमा कंपनियों से कहा है कि वह सूक्ष्म, छोटे एवं मझौले उद्योग (एमएसएमई) के कामगारों के लिए भी बीमा उत्पाद पेश करें। उन्होंने कहा कि एमएसएमई के साथ मिलकर कंपनियां इसके लिए सस्ती बीमा पॉलिसी पेश कर सकती हैं। खुंटिया ने उद्योग मंडल भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) के स्वास्थ्य बीमा सम्मेलन में कहा, 'मैं बीमा कंपनियों से बीमारी केंद्रित और उत्पाद बनाने का आग्रह करुंगा।

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खुंटिया ने कहा कि एक कंपनी यदि अपने कर्मचारी को 10 हजार रुपये प्रति माह वेतन देती है तो इसका मतलब है कि वह सालना 1.20 लाख रुपये खर्च करती है। ऐसे में वह पांच लाख रुपये की स्वास्थ्य बीमा पॉलिसी के लिए पांच हजार रुपये प्रति कर्मचारी और खर्च कर सकती है। इरडा के अनुसार, कंपनियां आसानी से कामगारों के प्रीमियम का बोझ उठा सकती हैं। खुंटिया ने कहा कि एमएसएमई कामगारों को स्वास्थ्य बीमा के दायरे में लाने को लेकर यह बहुत बड़ा कदम हो सकता है और कोरोना एवं लॉकडाउन ने हमें इसका महत्व समझा दिया है।

मधुमेह, किडनी की समस्या जैसी बीमारियों पर हो केंद्रित

खुंटिया ने स्वास्थ्य बीमा कंपनियों से मधुमेह, किडनी की समस्या जैसी बीमारियों पर केंद्रित उत्पाद लाने को कहा। इरडा के चेयरमैन ने कहा कि स्वास्थ्य बीमा कंपनियों को लोगों की जरूरतों के अनुसार नए-नए उत्पाद लाने चाहिए। खुंटिया ने कहा, मैं बीमा कंपनियों से बीमारी केंद्रित और उत्पाद बनाने का आग्रह करूंगा। जैसे मधुमेह, हृदय या किडनी संबंधित बीमारियों के लिए अलग से उत्पाद बनाए जा सकते हैं।

खुंटिया ने यह भी कहा कि अभी बड़ी संख्या में स्वास्थ्य बीमा 40 से 50 साल के आयु वर्ग के लोग ले रहे हैं। उन्होंने कहा, अगर अधिक संख्या में युवा आबादी स्वास्थ्य बीमा लेती है, और चूंकि संभव है, उनमें से ज्यादातर बीमार नहीं पड़े, इससे वे स्वास्थ्य बीमा कोष में योगदान दे सकेंगे। इससे अन्य लोगों को लाभ होगा।

ओपीडी-सालाना स्वास्थ्य जांच का कवर दें

इरडा के चेयरमैन ने कहा कि बीमा कंपनियों को बीमा कवर का दायरा ओपीडी और सालाना स्वास्थ्य जांच तक बढ़ाना चाहिए। उन्होंने कहा कि बीमारी केंद्रित उत्पादों के तहत बीमा कंपनियां विशेषज्ञ डॉक्टरों को जोड़ सकती हैं ताकि पॉलिसीधारकों को विभिन्न बीमारियों से बचने के उपायों के बारे में अवगत कराया जा सके।खुंटिया ने सुझाव दिया कि बीमा कंपनियां अपने उत्पादों में टीके आदि को शामिल कर सकती हैं। साथ ही उन्होंने पॉलिसीधारकों को रोग निरोधी सुविधाएं उपलब्ध कराने पर भी ध्यान देने को कहा।

छोटे शहरों में पहुंच बढ़ाएं

इरडा के चेयरमैन ने बीमा कंपनियों को दूसरी और तीसरी श्रेणी के शहरों में भी बीमा पहुंच बढ़ाने का सुझाव दिया।एउन्होंने कहा कि बीमा कंपनियों को युवा आबादी को आकर्षित करने की कोशिश करनी चाहिए। उन्होंने युवाओं को आकर्षित करने के लिए ऐसे जांच या इलाज को बीमा उत्पाद में शामिल करने का सुझाव दिया, जिसके लिए अस्पताल में 24 घंटे भर्ती होने की जरूरत नहीं है।

नई बीमा कंपनियों ने दिए आवेदन

बीमा नियामक इरडा के पास 176 कंपनियों ने बीमा कारोबार शुरू करने के लिए आवेदन दिए हैं। इनमें से ज्यादातर स्वास्थ्य बीमा क्षेत्र में उतरना चाहती हैं। इसके मद्देनजर बीमा नियामक कारोबार शुरू करने की शर्तों में राहत देने की तैयारी हैं। इरडा की एक समिति ने सुझाव दिया है कि बीमा कारोबार शुरू करने के लिए मौजूदा 100 करोड़ रुपये की पूंजी की शर्त को घटाकर 20 करोड़ रुपये कर दिया जाए। इससे छोटी कंपनियों को बीमा कारोबार में उतरने का मौका मिलेगा।

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  • Web Title:Insurance scheme for small workers soon companies will have to spend 5000 on 5 lakh policy