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19 जनवरी, 2020|4:41|IST

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धूम्रपान करने वालों से इतना ज्यादा प्रीमियम वसूलती हैं बीमा कंपनियां, जानें डिटेल्स

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धूम्रपान करना केवल सेहत के लिए ही खतरनाक नहीं है बल्कि आपकी जेब पर भी दोहरी मार करता है। बीमा कंपनियां सामान्य व्यक्तियों के मुकाबले धूम्रपान करने वालों से करीब 75 फीसदी तक ज्यादा प्रीमियम वसूलती हैं। बीमा कंपनियां जोखिम के आधार पर प्रीमियम तय करती हैं जो धूम्रपान करने वालों के मामलें में अधिक होता है। वहीं बीमा कंपनियों से धूम्रपान या किसी नशा के बारे में छुपाना भी आपके लिए घाटे का सौदा है। पेश है एक रिपोर्ट।

कितना महंगा है धूम्रपान
जीवन बीमा का टर्म प्लान सबसे सस्ता होता है। वर्तमान में 30 वर्ष के व्यक्ति के लिए एक करोड़ रुपये का टर्म प्लान 8260 रुपये का है जबकि धूम्रपान करने वाले व्यक्ति के लिए यह 14,750 रुपये का है। इस तरह धूम्रपान करने वाले व्यक्ति को 6490 रुपये ज्यादा प्रीमियम चुकाना पड़ता है। इस तरह सामान्य व्यक्ति की तुलना में धूम्रपान करने वाले को बीमा प्रीमियम 44 फीसदी ऊंचा चुकाना पड़ रहा है। कई कंपनियां इस मामले में 75 फीसदी तक ऊंचा वसूलती हैं।

लाखों रुपये का नुकसान
आप धूम्रपान नहीं करते हैं तो सबसे निचले प्रीमियम स्तर पर सालाना 6490 रुपये बचने का मतलब हर माह करीब 542 रुपये की बचत है। इससे 30 साल में करीब 1.95 लाख रुपये बचेंगे। यदि 542 रुपये हर माह एसाआईपी में 12 फीसदी के अनुमानित रिटर्न पर निवेश करेंगे तो 30 साल में आपकी पूंजी बढ़कर करीब 16.54 लाख रुपये हो जाएगा। इस तरह धूम्रपान करने वाले व्यक्ति को ऊंचे प्रीमियम की वजह से करीब 16 लाख रुपये का नुकसान हुआ।

इन बातों का रखें ध्यान
आप यदि धूम्रपान करते हैं तो आपके जीवन बीमा कवर का प्रीमियम तय करने के लिए बीमा कंपनियां पूछती हैं कि आपने पिछले एक साल में धूम्रपान या तंबाकू से जुड़े उत्पादों का इस्तेमाल किया है।  इसमें सिगरेट, ,तंबाकू और पान मशाला भी शामिल हैं। व्यक्ति द्वारा दी गई जानकारी के आधार पर ही बीमा कंपनी यह तय करती है कि वह व्यक्ति कभी-कभी धूम्रपान करता है या उसका आदी है। इसके आधार पर ही पॉलिसी का प्रीमियम तय होता है।

बीमा दावा रद्द होने का खतरा
बीमा कंपनियां पॉलिसी जारी करते समय यह धूम्रपान से जुड़ी जानकारी भी मांगती हैं। कई बार लोग महंगे प्रीमियम से बचने के लिए पॉलिसी जारी करने के समय बीमा कंपनी से अपनी धूम्रपान की आदतों का खुलासा नहीं करते हैं। ऐसा होन पर बीमा दावा करकते समय कंपनी को जानकारी मिलती है तो वह आपके दावा को रद्द भी कर सकती है। कई बार कंपनियां मेडिकल टेस्ट भी कराने का विकल्प देती हैं।

कंपनियों के डर की वजह
धूम्रपान करने वाले व्यक्ति बीमारियों के मामले में उच्च जोखिम वाली श्रेणी में में आते हैं। इससे फेंफड़े, कैंसर और लीवर की बीमारी का खतरा रहता है। जोखिम अधिक होने से कंपनियों को दावा ज्यादा आने का डर होता है। पूरी दुनिया में हर साल लगभग एक करोड़ मौत धूम्रपान से होती है जिसमें करीब 17 लाख भारत में होती है। आंकड़ों के मुताबिक भारत में करीब 12 करोड़ लोग धूम्रपान करते हैं जो दुनिया के लगभग 12 फीसदी धूम्रपान करने वाले लोगों के बराबर है। उद्योग के जानकारों के अनुसार वर्ष 2030 तक दुनिया भर में धूम्रपान से होने वाली मौतों की कुल संख्या 1.40 करोड़ के पार पहुंच जाएगी।
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