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उपभोक्ता से बीमा लेने से पहले सारी शर्तें पढ़ने की उम्मीद बेमानी: उपभोक्ता आयोग

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बीमाधारकों के दावे धड़ल्ले से खारिज करने की शिकायतों पर उपभोक्ता आयोग ने सख्त रुख अपनाया है। दिल्ली राज्य उपभोक्ता आयोग ने बुधवार को कहा कि बीमा कंपनियां नियम-शर्तों की आड़ में मामूली वजहों से उपभोक्ता के दावे खारिज नहीं कर सकतीं। 

आयोग ने एक मामले की सुनवाई के दौरान कहा कि यह उम्मीद करना बेमानी है कि एक आम आदमी किसी बीमा दस्तावेज पर हस्ताक्षर करते हुए सारी शर्तों को पढ़ता होगा।
 सामान्यतया उपभोक्ता को दावे के एवज में पैसे पाने के लिये भागदौड़ करनी पड़ती है। आयोग ने हैरत जताते हुए कहा कि बीमा के एवज में दावा करना और बीमा कंपनी से आसानी से पैसे मिल जाए तो यह संयोग से कम नहीं है। इसके अलावा बीमा की शर्तें भी बेहद जटिल होती हैं। 

आयोग पुरानी बीमारी और पेशे की जानकारी नहीं बताने के आधार पर एक बीमा कंपनी द्वारा दावा खारिज किये जाने के मामले की सुनवाई कर रहा था। फरीदाबाद के वीरपाल नागर ने अपने मृत भाई प्रताप सिंह के बीमा के संबंध में याचिका दायर की थी। याचक ने कंपनी पर अनुचित व्यापार का तरीका अपनाने और सेवा में कोताही बरतने का आरोप लगाया था। याचक के अनुसार, मृतक सिंह ने पांच दिसंबर 2008 को 20 साल के लिए एचडीएफसी का 50 लाख रुपये का एक सावधि बीमा लिया था। सिंह के निधन के बाद नॉमिनी नागर ने कंपनी के समक्ष बीमा का दावा किया था। कंपनी ने 19 अप्रैल 2010 को नागर का दावा खारिज कर दिया था। कंपनी ने पॉलिसी लेने से पहले से ही मृतक को अस्थमा और पक्षाघात की बीमारी तथा पेशे के बारे में जानकारी नहीं देने का हवाला देकर दावा खारिज किया था।

आयोग के सदस्य अनिल श्रीवास्तव ने माना कि दावे को खारिज करने के पीछे कंपनी ने जो आधार दिये हैं वे सही नहीं हैं। उन्होंने कहा कि यह उम्मीद करना बेमानी होगा कि एक आम आदमी किसी बीमा दस्तावेज पर हस्ताक्षर करने से पहले उसकी सारी शर्तें पढ़ ले। आयोग ने कंपनी को दो महीने के भीतर 50 लाख रुपये भुगतान करने का निर्देश दिया। 

पुरानी बीमारी को लेकर स्थिति स्पष्ट की
दिल्ली राज्य उपभोक्ता आयोग ने स्पष्ट किया कि किसी भी बीमारी को पुरानी बीमारी सिर्फ तभी माना जा सकता है यदि बीमाधारक उक्त बीमारी को लेकर कभी अस्पताल में भर्ती हुआ हो या उसे ऑपरेशन कराना पड़ी हो। कंपनी पहले से रही बीमारियों को लेकर बीमा लेने के बाद एक से चार साल तक कवर नहीं देती हैं और इसको लेकर काफी सारे मामले खारिज हो जाते हैं। कंपनियां किसी ब्लड प्रेशर, हाइपरटेंशन या अवसाद से हुई किसी बीमारी को लेकर भी दावे खारिज कर देती हैं। 

धोखाधड़ी न हुई तो क्लेम का निपटारा करें
दिल्ली राज्य उपभोक्ता आयोग ने कहा कि मुख्य तौर पर कोई उपभोक्ता भविष्य में अचानक सामने आने वाली चिकित्सा जरूरतों के लिये स्वास्थ्य बीमा लेता है। ऐसे में यदि बीमा लेते समय कोई धोखाधड़ी नहीं की गई हो तो उसके धारक के दावे का निपटारा किया जाना चाहिए, क्योंकि उस वक्त पीड़ित बेहद जरूरत में होता है। 

हस्ताक्षर के अलावा विकल्प नहीं होता     
कंपनियों की मनमानी पर आयोग ने कहा कि अधिकांश मौकों पर किसी बीमा पॉलिसी पर हस्ताक्षर करते समय उपभोक्ता के पास किसी शर्त को मना करने का विकल्प नहीं होता है। ऐसा नहीं हो सकता कि ग्राहक कोई बीमा उत्पाद लेते समय किसी एक नियम या शर्त को मानने से इनकार कर दे। 

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  • Web Title:Insurance companies can not dismiss claims for minor reasons