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तेल में उछाल से मांग बढ़ने के साथ बढ़ेगी महंगाई,पेट्रोल-डीजल के दाम करने का बस यही एक उपाय

नई दिल्ली। हिन्दुस्तान ब्यूरोPublished By: Drigraj Madheshia
Thu, 25 Jun 2020 09:24 AM
तेल में उछाल से मांग बढ़ने के साथ बढ़ेगी महंगाई,पेट्रोल-डीजल के दाम करने का बस यही एक उपाय

पिछले 19 दिनों से पेट्रोल-डीजल के दाम में आग लगी हुई है। दिल्ली में डीजल पहली बार पेट्रोल से महंगा होकर 80 रुपये के पार चला गया है। ऐसे में महंगाई बढ़ने के पूरे आसार हैं। इसके बावजूद पेट्रोल-डीजल की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी से फौरी तौर पर ज्यादा असर नहीं पड़ता नहीं दिख रहा है, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि अर्थव्यवस्था में मांग बढ़ने के साथ महंगाई भी बढ़ने का खतरा है। कीमतों में यह बढ़ोतरी अगले कुछ दिनों तक और जारी रह सकती है। अर्थशास्त्री अरुण कुमार के अनुसार, इसकी वजह ईंधन पर केंद्र द्वारा उत्पाद शुल्क और राज्यों द्वारा वैट में वृद्धि है।

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उनका कहना है कि डीजल के दाम तेजी से बढ़ने पर अमूमन महंगाई बढ़ती है क्योंकि माल ढुलाई में इस्तेमाल होने वाले ट्रक डीजल से ही चलते हैं लेकिन मौजूदा स्थिति थोड़ी अलग है। डीजल की कीमत रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंचने के बावजूद बाजार में मांग बहुत ही कम है। इससे तत्काल महंगाई बढ़ने का खतरा नहीं है। जब मांग बढ़ेगी तब ही कीमत में बढ़ोतरी होगी। शायद, इसलिए भी सरकार डीजल की कीमत में बढ़ोतरी पर चुप बैठी है। इससे अपस्फीति (संकुचन) रोकने में भी मदद मिलेगी।

पेट्रोल-डीजल की कीमत का करीब दो तिहाई हिस्सा टैक्स

पेट्रोल-डीजल की कीमत में 64 फीसदी हिस्सा यानी करीब 50.69 रुपये प्रति लीटर ग्राहक टैक्स के तौर पर चुका रहे हैं। पेट्रोल पर केंद्र का उत्पाद शुल्क 32.98 रुपये और 17.71 रुपये राज्यों के बिक्री कर का है। डीजल पर टैक्स कीमत का 63 फीसदी यानी करीब 49.43 रुपये प्रति लीटर है। इसमें 31.83 रुपये केंद्रीय उत्पाद शुल्क और 17.60 रुपये राज्यों का वैट है। 

दिल्ली ज्यादा टैक्स वाले राज्यों में

राज्य वैट(पेट्रोल) वैट डीजल
दिल्ली 30% 30%
तेलंगाना 35.20% 27%
तमिलनाडु 34% 25%
उत्तर प्रदेश 26.80% 17.48%
बिहार 22 से 26% 15 से19%

 

राजधानी में पेट्रोल पर टैक्स का गणित
 

  • आधार मूल्य 22.11
  • ढुलाई  0.33
  • डीलर लागत 22.44
  • उत्पाद कर 32.98
  • डीलर कमीशन 3.60
  • वैट 17.71
  • खुदरा मूल्य 76.73

राजधानी में डीजल पर टैक्स का गणित 
आधार मूल्य---22.93
परिवहन लागत-0.30
डीलर की लागत---23.23
उत्पाद कर-31.83
डीलर कमीशन-2.53
बिक्री कर—17.60
कुल खुदरा मूल्य—75.19
(स्रोत: दिल्ली में 16 जून को टैक्स, कमीशन प्रति लीटर, स्रोत-आईओसीएल)

कर संग्रह बढ़ाने के लिए सबसे मुफीद तेल

ऊर्जा विशेषज्ञ नरेंद्र तनेजा ने बताया कि कोरोना संकट से जीएसटी संग्रह में भारी गिरावट आई है। ऐसे में केंद्र और राज्य सरकारों के पास कर संग्रह बढ़ाने का सबसे बढ़िया जरिया पेट्रोल-डीजल पर उत्पाद शुल्क और वैट में बढ़ोतरी है। इसके बावजूद भी केंद्र और राज्य सरकारों को नुकसान उठाना पड़ रहा है। इसकी वजह पेट्रोल-डीजल की मांग में बड़ी गिरावट है। इस मद से कुल कर संग्रह कोरोना काल से पहले के मुकाबले बहुत ही कम है। जब तक बाजार में ईंधन की मांग नहीं बढ़ती है तब तक घाटे की भरपाई करना संभव नहीं होगा। 

दो लाख करोड़ रुपये की कमाई टैक्स बढ़ने से

  • 13 रुपये टैक्स केंद्र ने बढ़ाया दो माह में, राज्यों का वैट अलग 
  • 03 रुपये बढ़ा था उत्पाद शुल्क 14 मार्च को पेट्रोल-डीजल पर 
  • 10 रुपये बढ़ा शुल्क पेट्रोल और 13 रुपये डीजल पर पांच मई को
  • 02 लाख 87 हजार 540 करोड़ रुपये कमाई पेट्रोल-डीजल से

अंतराष्ट्रीय बाजार में कच्चा तेल उछला

  • 85% की वृद्धि कच्चे तेल की कीमत में मई में
  • 12.60% की वृद्धि कच्चे तेल के दाम जून में 

टैक्स में कटौती से ही कीमत में कमी संभव 

एजेंल ब्रोकिंग के डिप्टी वाइस प्रेसीडेंट ( रिसर्च एंड कमोडिटी ) अनुज गुप्ता ने बताया कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत 40 डॉलर प्रति बैरल के आसपास चल रहा है। इसमें और बड़ी की कमी की उम्मीद नहीं है। भारतीय बास्केट में कच्चे तेल की औसत कीमत 60 से 65 डॉलर के आसपास रही है। उससे मौजूदा दर बहुत ही कम है। ऐसे कच्चे तेल में बड़ी कमी की आगे कोई संभवना नहीं है। ऐसे में अगर पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमत से आम जनता को राहत देना तो सरकार को उत्पाद शुल्क और वैट में कटौती करनी होगी।

 

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