भारत की जीडीपी वृद्धि दर 2012 के बाद सबसे धीमी रहेगी
मुख्य बातें
- देश की जीडीपी वृद्धि दर पहली तिमाही (जनवरी से मार्च महीने की तिमाही) में 2012 के बाद सबसे धीमी रहने की आशंका है
- इस तिमाही की आर्थिक वृद्धि पर कोरोना महामारी का प्रभाव पड़ा है
- रॉयटर्स के सर्वे..

देश की जीडीपी वृद्धि दर पहली तिमाही (जनवरी से मार्च महीने की तिमाही) में 2012 के बाद सबसे धीमी रहने की आशंका है। इस तिमाही की आर्थिक वृद्धि पर कोरोना महामारी का प्रभाव पड़ा है। रॉयटर्स के सर्वे से यह बात सामने आई है। वहीं फिच रेटिंग्स ने भी चालू वित्त वर्ष (2020-21) में भारतीय अर्थव्यवस्था में पांच प्रतिशत की गिरावट का अनुमान लगाया है।
सर्वे के अनुसार, एशिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था में पिछले साल से ही सुस्ती शुरू हो गई थी, लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 25 मार्च से देशव्यापी लॉकडाउन लागू करने के कारण आर्थिक गतिविधियां पूरी *तरह से रुक गईं। एचएसबीसी की अर्थशास्त्री आयुषी चौधरी ने कहा, जनवरी और फरवरी महीने में गतिविधियां मजबूत थीं, किंतु मार्च महीने में मंदी से दो महीनों के तेजी को काफी नुकसान पहुंचा।
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20 से 25 मई के बीच किया 52 अर्थशा्त्रिरयों का सर्वे बताता है कि भारत की अर्थव्यवस्था मार्च महीने में 2.1 फीसदी की दर से बढ़ रही थी। साल 2012 की शुरुआत में तुलनीय रिकॉर्ड शुरू होने के बाद से यह सबसे कम दर है। यह पिछले तीन महीने में 4.7 फीसद की अपेक्षा भी बहुत कम है।
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