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भारत होगा एशिया-प्रशांत के विकास का इंजन, चीन पड़ गया धीमा 

GDP of India: एसएंडपी ग्लोबल रेटिंग्स की क्रेडिट विश्लेषण रिपोर्ट के मुताबिक 2026 तक भारत की सकल घरेलू उत्पाद (GDP) 7 फीसद तक हो सकती। इस रिपोर्ट में कहा गया है, "चीन धीमा, भारत बढ़ रहा"

भारत होगा एशिया-प्रशांत के विकास का इंजन, चीन पड़ गया धीमा 
Drigraj Madheshiaनई दिल्ली। राजीव जयसवालWed, 29 Nov 2023 10:25 AM
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भारत के नेतृत्व में एशिया-प्रशांत का विकास इंजन चीन से दक्षिण और दक्षिण पूर्व एशिया में स्थानांतरित होने की उम्मीद है। ऐसा एसएंडपी ग्लोबल रेटिंग्स की क्रेडिट विश्लेषण रिपोर्ट में कहा गया है। रिपोर्ट के मुताबिक 2026 तक भारत की सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) 7% तक हो सकती। इस रिपोर्ट में कहा गया है, "चीन धीमा, भारत बढ़ रहा है"।

2024 की पहली तिमाही में एशिया-प्रशांत की कर्ज की स्थितियों का विश्लेषण करने वाली रिपोर्ट में कहा गया है कि 2026 तक भारत की जीडीपी वृद्धि दर 7% की तुलना में, चीन की अर्थव्यवस्था 4.6% तक रह पाएगी। चीन के लिए विकास की गति को कमजोर करने के लिए संपत्ति क्षेत्र के गहराते संकट और उच्च ऋण स्तर जिम्मेदार हैं।

21 नवंबर को हुई एसएंडपी ग्लोबल रेटिंग्स की एशिया-पैसिफिक क्रेडिट कंडीशंस कमेटी पर आधारित रिपोर्ट में कहा गया है कि क्षेत्रीय विकास पैटर्न में बदलाव हो रहा है। रिपोर्ट में कहा गया है, "हमारा अनुमान है कि 2024 में चीन की जीडीपी वृद्धि धीमी होकर 4.6% (2023: 5.4%), 2025 में 4.8% तक बढ़ जाएगी और 2026 में 4.6% पर वापस आ जाएगी।"

अन्य देशों से भारत काफी आगे

रिपोर्ट में इस क्षेत्र में भारत की उच्चतम विकास दर दर्ज की गई। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है, "हम देखते हैं कि भारत 2026 में 7.0% (अभी 6.4%) तक पहुंच जाएगा। वियतनाम, 6.8% (अभी 4.9%); फिलीपींस, 6.4% (अभी 5.4%)और इंडोनेशिया 5% पर स्थिर है।” 

रिपोर्ट एडवर्स जियो-पॉलिटिकल विकास के कारण वैश्विक प्रतिकूल परिस्थितियों की ओर इशारा करते हुए कहती है, " एशिया-प्रशांत के केंद्रीय बैंकों द्वारा ब्याज दरें ऊंची रखने की संभावना के साथ, क्षेत्र के उधारकर्ताओं को महंगी ऋण सेवा देखनी पड़ेगी। मध्य पूर्व में व्यापक संघर्ष ग्लोबल स्पलाई चेन को प्रभावित कर सकता है और ऊर्जा लागत बढ़ा सकता है। इससे मुद्रास्फीति बढ़ सकती है। उच्च इनपुट लागत कॉर्पोरेट मार्जिन को कमजोर करती है, जबकि उच्च कीमतें मांग को कमजोर करती हैं।"

मध्य पूर्व में संघर्ष बढ़ने से पैदा हो सकता है ऊर्जा जोखिम

इसमें कहा गया है कि मध्य पूर्व में संघर्ष बढ़ने से ऊर्जा जोखिम पैदा हो सकता है और 2024 में क्षेत्र की वृद्धि (पूर्व-चीन) के लिए इसका अनुमान 4.4% से घटाकर 4.2% कर दिया गया है। एशिया-प्रशांत का विकास ऊर्जा के झटकों (मध्य पूर्व में बढ़ते संघर्ष) और धीमी वैश्विक मांग (अमेरिका की मुश्किल स्थिति का खतरा) के प्रति संवेदनशील है, यह दुखद है। इसमें कहा गया है कि उद्योगों के लिए संभावनाएं भी अलग-अलग हैं। निर्यात-केंद्रित विनिर्माण की स्थिति भी बदतर है।

अंतरराष्ट्रीय विवादों से घिरा चीन

रिपोर्ट में कहा है, "इस क्षेत्र में मुख्य जोखिम चीन के साथ विवाद है। पश्चिमी और अन्य आयातकों द्वारा चीन पर आपूर्ति श्रृंखला की निर्भरता में और कमी से अगले कुछ वर्षों में लागत बढ़ सकती है, जिससे मुद्रास्फीति का दबाव बढ़ सकता है। दक्षिण और दक्षिण-पूर्व चीन सागर में समुद्र और भूमि पर अंतरराष्ट्रीय विवादों के बढ़ने से आर्थिक गतिविधियों को नुकसान होगा।''

प्रतिकूल प्रभाव के बावजूद बढ़ रहा भारत का आर्थिक विकास

एक सम्मेलन को संबोधित करते हुए केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सोमवार को यह माना कि ग्लोबल एडवर्स कंडीशन का भी भारतीय अर्थव्यवस्था पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है, लेकिन घरेलू ताकतें भारत की उच्च वृद्धि का समर्थन कर रही हैं। उन्होंने कहा कि भारत का "बड़ा कैप्टिव घरेलू बाजार" है। इसके "मिडिल क्लास" की क्रय शक्ति और "स्थिर नीतियां" वैश्विक प्रतिकूल परिस्थितियों और भू-राजनीतिक चुनौतियों के बावजूद इसके आर्थिक विकास को आगे बढ़ा रही हैं। 

भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में से एक

भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में से एक है। अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष ने पिछले महीने अपने विश्व आर्थिक आउटलुक में भारत की 2023-24 जीडीपी ग्रोथ 6.3% होने का अनुमान लगाया था, जो जुलाई से 20 आधार अंक अधिक है। एक आधार अंक एक प्रतिशत अंक का सौवां हिस्सा है। विश्व बैंक ने भी चुनौतीपूर्ण बाहरी परिस्थितियों के बावजूद अपनी द्विवार्षिक समीक्षा में 2023-24 के लिए भारत की आर्थिक वृद्धि का अनुमान 6.3% बरकरार रखा।

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