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बिजनेसइंडिया रेटिंग्स ने भारत की जीडीपी वृद्धि का अनुमान घटाकर 10.1 फीसद किया

एजेंसी,मुंबईPublished By: Drigraj Madheshia
Fri, 23 Apr 2021 05:02 PM
इंडिया रेटिंग्स ने भारत की जीडीपी वृद्धि का अनुमान घटाकर 10.1 फीसद किया

आर्थिक शोध एजेंसी इंडिया रेटिंग्स एण्ड रिसर्च ने शुक्रवार को वर्ष 2021- 22 के लिये भारत की सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) वृद्धि का अनुमान पहले के 10.4  फीसद से घटाकर 10.1  फीसद कर दिया है। वहीं एसबीआई रिसर्च ने भी शुक्रवार को चालू वित्त वर्ष के लिए वृद्धि पूर्वानुमानों को 11 फीसद से घटाकर 10.4 फीसद कर दिया।  देश में कोरोना वायरस की दूसरी लहर को देखते हुये यह संशोधन किया गया है। इंडिया रेटिंग्स ने कहा है कि जब देश के बड़े हिस्से में कोरोना वायरस के बढ़ते मामलों से चिकित्सा सुविधाओं पर भारी दबाव है। ऐसे में एजेंसी ने कहा है कि कोरोना की यह दूसरी लहर मध्य मई से कमजोर पड़नी शुरू हो जाएगी। 

जीडीपी में 7.6  फीसद गिरावट आने का अनुमान

रिजर्व बैंक ने भी इस माह की शुरुआत में जारी मौद्रिक नीति की समीक्षा में चालू वित्त वर्ष के दौरान जीडीपी वृद्धि 10.5  फीसद रहने का अनुमान व्यक्त किया है हालांकि गवर्नर शक्तिकांत दास ने इस दौरान देश में कोरोना वायरस के बढ़ते मामलों को वृद्धि के रास्ते में आने वाली सबसे बड़ी अड़चन बताया।  न्यू ब्रोकरेज कंपनियां और विश्लेषक भी कोरोना वायरस की दूसरी लहर को देखते हुए भारत की आर्थिक वृद्धि के अपने अनुमानों को कम कर रहे हैं। पिछले वित्त वर्ष 2020- 21 में भारत की जीडीपी दर में 7.6  फीसद गिरावट आने का अनुमान है। 

यह भी पढ़ें: बोफा का अनुमान: लॉकडाउन से जीडीपी का एक से दो फीसद का नुकसान

इंडिया रेटिंग्स ने कहा है कि कोरोना वायरस की दूसरी लहर का आर्थिक प्रभाव इतना ज्यादा नहीं होगा जैसा कि पहली लहर का पड़ा था। इसकी वजह, पहली लहर के चरम पर पहुंचने के समय जितने मामले थे उसके मुकाबले दूसरी लहर में दैनिक मामलों की संख्या तीन गुणा तक पहुंच जाने के बावजूद लॉकडाउन स्थानीय स्तर तक ही सीमित रखा जा रहा है। 

21 अप्रैल तक 13.20 करोड़ लोगों को टीका लगा

इसके साथ ही कोरोना वायरस का टीका लगने से भी सुरक्षा बढ़ेगी। देश में 21 अप्रैल तक 13.20 करोड़ लोगों को टीका लग चुका है। सरकार ने एक मई से सभी वयस्को को टीका लगाने की घोषणा की है इसके लिये 176.80 करोड़ खुराक की आवश्यकता होगी। टीके का उत्पादन और टीकाकरण की रफ्तार दोनों ही कोरोना के बढ़ते मामलों को नियंत्रित करने में महत्वपूर्ण होंगे। एजेंसी ने कहा है, ''यही वजह है कि इंडिया रेटिंग्स ने वित्त वर्ष 2021-22 की जीडीपी वृद्धि के अनुमान को पहले के 10.4  फीसद से घटाकर 10.1  फीसद कर दिया है।

एसबीआई ने भी वृद्धि अनुमानों को घटाकर 10.4 फीसद किया

देश में कोरोना वायरस संक्रमण के मामलों में लगातार बढ़ोतरी और कई राज्यों में लॉकडाउन जैसे प्रतिबंधों को लागू करने के चलते एसबीआई रिसर्च ने शुक्रवार को चालू वित्त वर्ष के लिए वृद्धि पूर्वानुमानों को 11 फीसद से घटाकर 10.4 फीसद कर दिया। भारत में पिछले 24 घंटे के दौरान कोविड-19 संक्रमण के 3.34 लाख से अधिक मामले सामने आए हैं। 

जीडीपी का हो चुका है 0.7 फीसद नुकसान

बैंक के मुख्य आर्थिक सलाहकार सौम्य कांति घोष द्वारा तैयार रिपोर्ट में यह सुझाव भी दिया गया है कि पूर्ण लॉकडाउन लागू करने की तुलना में तेजी से टीकाकरण करना अर्थव्यवस्था के लिहाज से अधिक सस्ता है। रिपोर्ट के मुताबिक टीकाकरण की कुल लागत जीडीपी के मुकाबले 0.1 फीसद है, जबकि लॉकडाउन के चलते पहले ही जीडीपी का 0.7 फीसद नुकसान हो चुका है। रिपोर्ट में कहा गया है कि एक मई से राज्य विनिर्माताओं से सीधे टीका खरीदने के लिए स्वतंत्र हैं, ऐसे में अनुमान है कि 13 बड़े राज्यों के टीकाकरण की लागत उनके कुल जीडीपी का केवल 0.1 फीसद होगी।

घोष ने कहा कि लॉकडाउन के कारण जीडीपी को होने वाले आर्थिक नुकसान की तुलना में यह काफी कम है, जो पहले ही 0.7 फीसद हो चुकी है। उन्होंने आगे कहा कि लगभग सभी राज्यों में आंशिक, स्थानीय और सप्ताहांत के लॉकडाउन के चलते हम अपने वृद्धि पूर्वानुमानों को घटा रहे हैं और वित्त वर्ष 2021-22 के लिए वास्तविक जीडीपी वृद्धि दर 10.4 फीसद और नॉमिनल जीडीपी वृद्धि दर 14.3 फीसद रह सकती है। उन्होंने कहा कि सीमित लॉकडाउन से करीब 1.5 लाख करोड़ रुपये के नुकसान का अनुमान है, जिसमें 80 फीसद हिस्सेदारी सिर्फ महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश और राजस्थान की है और सिर्फ 54 फीसद हिस्सेदारी महाराष्ट्र की है। 

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