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4 मार्च, 2021|4:28|IST

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Income Tax: इन्वेस्टमेंट प्रूफ रखें तैयार वर्ना अगले तीन महीने बंपर कटेगी सैलरी, जानें टैक्स बचाने के 18 तरीके

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वित्तीय वर्ष 2020-21 की आखिरी तिमाही शुरू हो चुकी है। अगर आप सैलरीड हैं, तो आपका एम्प्लॉइअर आपको टैक्स सेविंग इंस्ट्रूमेंट्स में इन्वेस्टमेंट का प्रूफ जमा करने के लिए बार-बार रिमाइंडर मेल भेज रहा होगा। वित्तीय वर्ष के शुरू यानी अप्रैल में हम कंपनी को इन्वेस्टमेंट डेक्लरेशन (Investment Declaration) देते हैं तब आपको इसका प्रूफ नहीं जमा करना होता है, लेकिन ज्यादातर जगहों पर जनवरी तक इन्वेस्टमेंट प्रूफ जमा करने होते हैं। 

अगर आप निवेश के दस्तावेज  जमा (Investment Proof Submission) कर देते हैं तो आपकी अगली तीन महीने की सैलरी से स्रोत पर टैक्स की कटौती यानी टीडीएस (TDS) उसी अनुपात में कम कटेगा, नहीं तो ज्यादा कटेगा। यानी टैक्स सेविंग इंस्ट्रेमेंट्स (Tax Saving Investments) में निवेश के प्रूफ अपने एम्प्लॉइअर को नहीं देने का असर अगले तीन महीने तक आपकी टेक होम सैलरी पर पड़ेगा।

इसलिए, अगर आपने निवेश कर लिया है तो इन्वेस्टमेंट प्रूफ सब्मिट करने में देरी न करें और नहीं किया है, तो हम आपको बता रहे हैं कि अगले एक सप्ताह में क्या-क्या करके अपनी मोटी रकम टीडीएस के रूप में कटने से बचा सकते हैं। 

80C के तहत मिलने वाली छूट
आयकर अधिनियम की धारा 80 सी के तहत सरकार 1,50,000 रुपये तक के निवेश पर टैक्स छूट देती है। इसमें कई तरह के निवेश के विकल्प शामिल हैं। नीचे उन विकल्पों के बारे में जानते हैं--- 

1. होम लोन के मूलधन पर टैक्स छूट
अगर आपने घर खरीदने या बनवाने के लिए होम लोन लिया है और उसे EMI में चुका रहे हैं तो आपको टैक्स सेविंग में फायदा मिलेगा। इसकी वजह है कि होम लोन में मूलधन यानी प्रिंसपल अमाउंट सेक्शन 80सी के तहत टैक्स फ्री है।

2.बच्चों की पढ़ाई पर है टैक्स छूट
बच्चों की पढ़ाई की फीस के तहत दी जाने वाली ट्यूशन फीस इनकम टैक्स के सेक्शन 80सी के तहत टैक्स सेविंग के दायरे में आती है। ये छूट सरकारी या प्राइवेट स्कूल, कॉलेज या संस्थान में जमा की गई ट्यूशन फीस पर ही मिलती है। यह छूट सिर्फ फुल टाइम रेगुलर कोर्सों के लिए दो बच्चों की पढ़ाई तक ही सीमित होती है। 

3.पब्लिक प्रोविडंट फंड (PPF)
पब्लिक प्रोविडंट फंड (पीपीएफ) लंबी अवधि का एक लोकप्रिय निवेश विकल्प है। यह न सिर्फ सुरक्षित निवेश माना जाता है बल्कि इसमें बेहतर ब्याज भी मिलता है। साथ ही इसमें किया जाने वाला पूरा निवेश टैक्स फ्री होता है। पीपीएफ खाता पर सालाना आधार पर 7.6 फीसद की दर से ब्याज मिलता है। मिलने वाला ब्याज भी टैक्स फ्री होता है। परिपक्वता पर मिलने वाली रकम भी पूरी तरह टैक्स फ्री होता है।

4. कर्मचारी भविष्य निधि (EPF)
सैलरी पाने वाले एंप्लॉयी इस विकल्प में पहले से ही इन्वेस्ट कर रहे हैं। हर महीने आपको मिलने वाले वेतन के बेसिक का 12% राशि आपके ईपीएफ अकाउंट में रकम जमा हो जाती है। अगर आप चाहें तो स्वेच्छा से अधिक का योगदान भी कर सकते हैं।

5.ईएलएसएस में कर सकते हैं निवेश
ईएलएसएस म्यूचुअल फंड में निवेश की योजना है। इसका मुख्य उद्देश्य टैक्स बचाने के साथ ही अच्छा रिटर्न दिलाना है। रिटर्न पर एक अप्रैल 2018 से लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन टैक्स लगाने के बावजूद यह निवेश रिटर्न के लिहाज से अच्छा है। ईएलएसएस से केवल एक लाख से अधिक का लाभ एलटीसीजी कर के तहत कर योग्य होगा। 

6.सीनियर सिटिजन सेविंग स्कीम
वरिष्ठ नागरिकों के लिए सीनियर सिटिजन सेविंग स्कीम (एससीएसएस) आयकर एक बेहतर योजना है।  सीनियर सिटिजन सेविंग स्कीम में फिलहाल 8.7 फीसद की दर से ब्याज मिल रहा है। इस स्कीम में किया जाने वाला निवेश आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 80सी के अंतर्गत कर छूट के दायरे में आता है।

7. बैंक में पांच साल की एफडी
आयकर की धारा 80 सी के तहत आयकर बचाने के लिए सावधि जमा योजना (एफडी) पुरानी और सबसे सुरक्षित मानी जाने वाली निवेश योजना है। इस पर अभी बैंक  4.5% से 7.5% प्रतिवर्ष के बीच ब्याज दे रहे हैं। एफडी से प्राप्त होने वाले ब्याज पर कर चुकाना पड़ता है। टैक्स बचाने के लिए अगर आप एफडी में निवेश कर रहे हैं तो आपको 5 साल की लॉक-इन अवधि के लिए निवेश करना होगा। इससे कम अवधि के निवेश पर आप टैक्स छूट का लाभ नहीं ले पाएंगे। कई बैंक टैक्स सेविंग एफडी के लिए ऑनलाइन सुविधा उपलब्ध करवाते हैं। परिपक्वता के बाद राशि सीधे आपके बैंक खाते में आ जाती है।

8.इंश्योरेंस प्रीमियम
लाइफ इंश्योरेंस या बीमा पॉलिसी पर चुकाए प्रीमियम पर सेक्शन 80सी के तहत टैक्स छूट का फायदा उठा सकते हैं। सेक्शन 80C के तहत टैक्स लाभ लेने के लिए आपको हर साल नया प्लान लेने की जरूरत नहीं है। हर साल चुकाए जा रहे प्रीमियम पर टैक्स छूट ले सकते हैं।

9. सुकन्या समृद्धि योजना 
केंद्र सरकार की बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ योजना के तहत लॉन्च की गई यह स्कीम बेटियों के लिए बड़ा फंड तैयार करने के लिए अच्छा विकल्प है। यदि आपकी बेटी की उम्र 10 साल से कम है तो आप यह खाता खोल सकते हैं। यह अकाउंट आपकी बेटी के 21 वर्ष का होने पर मैच्योर होगा। इस पर टैक्स छूट का लाभ भी उठा सकते हैं।

10. टर्म लाइफ इंश्योरेंस
टर्म लाइफ इंश्योरेंस के लिए चुकाई गई प्रीमियम की रकम पर आप इनकम टैक्स कानून के सेक्शन 80सी के तहत टैक्स छूट का लाभ प्राप्त कर सकते हैं। इंश्योरेंस प्लान असल में बहुत मामूली प्रीमियम पर काफी अधिक जीवन बीमा कवर खरीदने का मौका देता है।

11.स्टांप ड्यूटी पर भी ले सकते हैं फायदा
घर खरीदने पर दी स्टांप ड्यूटी और रजिस्ट्रेशन चार्ज पर भी सेक्शन 80सी के तहत 1.5 लाख रुपये तक की टैक्स छूट ली जा सकती है। फिर चाहे घर लोन लेकर खरीदा हो या फिर अपने पैसों से। यह छूट उसी साल ली जा सकती है। अगर किसी ने ज्वॉइंट में प्रॉपर्टी खरीदी है, तो दोनों खरीदार स्टांप ड्यूटी और रजिस्ट्रेशन चार्ज पर टैक्स छूट का दावा अपनी-अपनी हिस्सेदारी के मुताबिक कर सकते हैं। हालांकि इस सूरत में भी केवल 1.5 लाख रुपये तक का ही लाभ मिलेगा।

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अब ऐसे निवेश के बारे में जानते हैं जो 80सी में नहीं आते हैं पर टैक्स बचाने में काफी मददगार हैं। इनमें निवेश या हुए खर्च के जरिए आप डेढ़ लाख से अतिरक्त टैक्स बचा सकते हैं।

1.NPS में निवेश कर ले सकते हैं 50000 की और छूट 
एनपीएस यानी नेशनल पेंशन सिस्टम में निवेश करने पर भी टैक्स में छूट मिलती है। आयकर की धारा  80सीसीडी (1बी) के तहत कोई करदाता 50,000 रुपये तक के निवेश पर टैक्स छूट का दावा कर सकता है। यानी आप  80सी के तहत 1.5 लाख रुपये के निवेश पर छूट पा रहे हैं और NPS में भी निवेश कर लेते हैं तो 2 लाख रुपये पर टैक्स डिडक्शन क्लेम कर सकते हैं। 

2.एजुकेशन लोन पर भी है छूट
ग्रैजुएशन और पोस्ट ग्रैजुएशन लेवल की पढ़ाई के लिए एजुकेशन लोन पर जो ब्याज दिया जाता है, वह टैक्स फ्री होता है। यह प्रावधान इनकम टैक्स एक्ट के सेक्शन 80ई के तहत है और किसी भी अमाउंट में लिए गए लोन पर लागू होता है।

3.हेल्थ इंश्योंरेंस पर छूट
देश में इलाज कराने का खर्च तेजी से बढ़ रहा है। ऐसे में हर किसी के लिए हेल्थ इंश्योरेंस लेना जरूरी हो गया है। आप हेल्थ इंश्योरेंस लेकर न सिर्फ बीमारी के समय वित्तीय बोझ से बच सकते हैं बल्कि आयकर से भी छूट प्राप्त कर सकते हैं। आयकर अधिनियम 1961 की धारा 80डी के अंतर्गत आपको अपने लिए, अपनी पति/पत्नी और बच्चों के लिए दिए गए सभी हेल्थ इंश्योरेंस प्रीमियम पर 25,000 रुपये तक की कर छूट प्राप्त कर सकते हैं। आप 60 साल से कम उम्र के माता-पिता के लिए खरीदी गई हेल्थ पॉलिसी के प्रीमियम पर अलग से 25,000 रुपये तक आयकर छूट का दावा कर सकते हैं। अगर आपके माता-पिता वरिष्ठ नागरिक हैं तो आप इस मद में 50,000 रुपये तक छूट का दावा कर सकते हैं। 

4. हेल्थ चेकअप पर छूट
प्रिवेंटिव हेल्थ चेक-अप कराने के फायदे ही फायदे हैं। जहां आप रेग्युलर हेल्थ चेकअप करवा कर कई बीमारियों के बारे में पहले ही अलर्ट हो सकते हैं, वहीं टैक्स भी बचाया जा सकता है। प्रिवेंटिव हेल्थ चेक-अप के 5 हजार रुपये तक के बिल टैक्स छूट मिलती है।

5.विकलांगता के इलाज पर राहत
अगर परिवार में कोई विकलांग है तो उसके इलाज के खर्च की रकम पर आयकर में छूट का दावा किया जा सकता है। धारा 80डीडी के तहत 75,000 रुपये तक के खर्च पर कर छूट का दावा किया जा सकता है। वहीं, गंभीर रूप से विकलांग लोगों के इलाज के लिए 1,25,000 रुपये तक के खर्च पर कर छूट का दावा किया जा सकता है।

6. HRA पर कर छूट का दावा 
अगर आप जॉब में हैं और नियोक्ता से एचआरए पाते हैं तो आप उस रकम पर कर छूट का दावा कर सकते हैं। अगर नियोक्ता से मिलने वाले वेतन में एचआरए शामिल नहीं है और आप किराए पर रहते हैं तो आप इस रकम पर आयकर कानून के सेक्शन 80जीजी के तहत टैक्स छूट पाने का दावा कर सकते हैं। एचआरए पर कर छूट का दावा करने के लिए आपको फॉर्म 10बीए में घोषणा करनी पड़ती है।

7. होम लोन के ब्याज पर मिलती है छूट
इनकम टैक्स के सेक्शन 24 के अनुसार आपको होम लोन पर भरे जाने वाले ब्याज पर छूट मिलती है। होम लोन के ब्याज पर अधिकतम छूट दो लाख रुपये की मिलती है।

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